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विधानसभा की अवधि एक वर्ष से कम होने की स्थिति में चुनाव करवा सकता है आयोग : हाईकोर्ट

Thu, 04 Apr 2024 01:51 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Apr 2024 01:51 AM IST
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Karnal Assembly seat by-election, High Court News
विधानसभा की अवधि एक वर्ष से कम होने की स्थिति में चुनाव करवा सकता है आयोग : हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने करनाल विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका के रद्द होने के बाद अब उप चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि विधानसभा की अवधि एक वर्ष से कम बची है तो भी चुनाव आयोग को उपचुनाव करवाने का अधिकार है। बता दें कि हाईकोर्ट में करनाल उपचुनाव को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
मनोहर लाल के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी सीट
करनाल निवासी कुनाल ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि 13 मार्च को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के साथ ही करनाल विधानसभा सीट रिक्त हो गई। इसी दौरान नायब सैनी को हरियाणा का मुख्यमंत्री बना दिया गया। चुनाव आयोग ने 15 मार्च को करनाल विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी। याची ने बताया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 151ए के अनुसार यदि विधानसभा का कार्यकाल एक वर्ष से कम है तो चुनाव आयोग के पास उपचुनाव कराने का अधिकार नहीं होता है।
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याचिका में दावा किया गया था कि महाराष्ट्र के अकोला निर्वाचन क्षेत्र के उप चुनाव के बारे में चुनाव आयोग ने 15 मार्च को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने चुनाव अधिसूचना को इस आधार पर रद्द कर दिया कि विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में एक वर्ष से भी कम समय बचा है। इसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव को रोक दिया। इसी आधार पर उन्होंने करनाल विधानसभा के उपचुनाव को रद्द करने की बात याचिका में कही थी।
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बिना प्रतिनिधित्व लंबे अरसे तक नहीं छोड़ा जा सकता किसी विधानसभा क्षेत्र को : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने मंगलवार को सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार दोपहर एक बजे अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी निर्वाचन क्षेत्र को प्रतिनिधित्व के बिना लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता। नियम के अनुसार यदि सदन के गैर सदस्य को मंत्री या मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो उसे 6 माह के भीतर जीतना होता है। ऐसे में इन दोनों स्थितियों को ध्यान में रखते हुए उप चुनाव करवाने का चुनाव आयोग का फैसला सही है। हाईकोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले से अलग फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग के फैसले को वैध बताते हुए इसे चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
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