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Hindi News ›   Chandigarh ›   Kargil Vijay diwas 2020: Six army Jawan of Sonipat were martyred in Kargil war

CourageInKargil: कारगिल शहीदों के आखिरी पत्र- किसी को आना था घर, कोई परिवार छोड़ सीमा पर गया

Sun, 26 Jul 2020 04:56 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sun, 26 Jul 2020 04:56 PM IST
सार

  • शहीदों के आखिरी पत्र याद कर आज भी भावुक हो जाते हैं परिजन, बोले हमें शहादत पर गर्व
  • महज 19 वर्ष की आयु में शहीद हुए थे रवींद्र दहिया, सुखबीर सिंह ने 23 साल की उम्र में प्राण किए न्यौछावर

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Kargil Vijay diwas 2020: Six army Jawan of Sonipat were martyred in Kargil war
कारगिल शहीद।

विस्तार

कारगिल युद्ध में देश के जवानों के अदम्य साहस ने देश को विजय दिलवाई थी लेकिन उस युद्ध में भारत माता के कई सपूतों को अपनी जान की आहुति भी देनी पड़ी। कारगिल युद्ध में सोनीपत जिले के छह जवानों ने अपनी शहादत देकर अपना नाम ऊंचा किया था। सरकार कारगिल शहीदों को नमन करने के लिए 26 जुलाई को विजय दिवस के रूप में मनाती है। 

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कारगिल में शहीद हुए सोनीपत के छह जवानों में से दो के बेटे अब भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सीमाओं पर प्रहरी बने हुए हैं। बरोदा के शहीद सतबीर सिंह व महलाना के शहीद लक्ष्मण सिंह के बेटे देश सेवा के लिए सेना में गए हैं। शहीदों की शहादत के समय की गई घोषणा अभी भी अधूरी है। शहीदों के परिजन उनके आखिरी पत्र के बारे में याद कर आज भी भावुक हो जाते हैं।
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बचपन से ही सेना में भर्ती होना था रवींद्र का सपना
कारगिल युद्ध में शहीद हुए गांव रोहणा निवासी रवींद्र सिंह दहिया शहादत के समय महज 19 वर्ष के थे। बचपन से ही वह देश सेवा करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सेना में जाना सबसे बेहतर समझा। रवींद्र का जन्म 20 मई 1980 को हुआ था। बंदूक चलाने का शौक रविंद्र को बचपन से ही था।

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Kargil Vijay diwas 2020: Six army Jawan of Sonipat were martyred in Kargil war
शहीद रविंद्र सिंह दहिया।

रविंद्र 6 जून 1999 को कारगिल युद्ध में (काक्सर हिल्स) में हुई लड़ाई में सीने पर गोली खाकर शहीद हो गए थे। शहीद रवींद्र ने अपने आखिरी पत्र में मां से कहा था कि मां अभी रिश्ता मत लेना। मुझे अभी देश के लिए बहुत काम करना है। उनका आखिरी पत्र पढ़कर अभी भी परिजनों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। बीमारी की वजह से शहीद रवींद्र के बड़े भाई का भी देहांत हो चुका है।

शहीद सतबीर सिंह की शहादत से प्रेरणा लेकर बेटा भी सेना में हुआ भर्ती
गांव बरोदा निवासी सतबीर सिंह मोर का जन्म 20 दिसंबर 1968 को हुआ था। 19 वर्ष की उम्र में 24 दिसंबर 1987 को सेना में भर्ती हो गए थे 31 मार्च 1999 को पाकिस्तानी फौज से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। शहीद सतबीर सिंह मोर की पत्नी शीला देवी ने बताया कि शहादत के 15 दिनों पहले ही उनका पत्र आया था। 

उन्होंने गेहूं कटाई शुरू होने से पहले आने की बात कही थी। छुट्टी मंजूर हो गई थी, जिन दिन उन्हें घर पहुंचना था उससे एक दिन पहले ही वह शहीद हो गए थे। उनका बेटा सतपाल मोर पिता की प्रेरणा से उनकी राह पर चलते हुए सेना की जाट रेजिमेंट में भर्ती हुआ है। वह देश का प्रहरी बनकर सेवा दे रहा है।  

बच्चे के जन्म पर छुट्टी लेकर आने वाले थे शहीद सुखबीर सिंह

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शहीद सुखबीर सिंह

गांव रूखी में 1 अप्रैल 1976 को जन्मे सुखबीर सिंह ने मात्र 23 वर्ष की उम्र में ही शहादत दी थी। सुखबीर 18 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने अपने  अंतिम पत्र में पत्नी चंदा देवी को कहा था कि अब बच्चे के जन्म पर ही घर छुट्टी लेकर आऊंगा। युद्ध की वजह से शहीद सुखबीर सिंह अपने छोटे बेटे गौरव को नहीं देख पाए। इससे पहले वह देश के दुश्मनों को रौंदते हुए शहीद हो गए थे।

लक्ष्मण सिंह युद्ध से वापस आकर बनाना चाहते थे घर
गांव महलाना निवासी लक्ष्मण सिंह का जन्म 8 नवंबर 1960 को एक किसान परिवार में हुआ। लक्ष्मण सिंह 18 अप्रैल 1979 में 19 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए थे। सेना से छुट्टी लेकर लक्ष्मण सिंह अपने गांव में अपना मकान बनवा रहे थे। शहीद लक्ष्मण के बेटे पवन ने बताया कि मकान बनवाने के दौरान ही पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू हो गया था। पिताजी ने कहा था कि देश बुला रहा है, अब घर वापस आकर ही बनाऊंगा। शहीद लक्ष्मण सिंह 1 जून को कारगिल के लिए घर से निकले थे और 9 जून, 1999 को शहीद हो गए थे। शहीद लक्ष्मण सिंह का बेटा जयवीर भी अब सेना में देश की सेवा कर रहा है।

अभी भी शहीदों को लेकर की गई घोषणा नहीं हुई पूरी

Kargil Vijay diwas 2020: Six army Jawan of Sonipat were martyred in Kargil war
शहीद सतबीर सिंह मोर

कारगिल विजय दिवस को 21 साल पूरे हो चुके हैं। शहीद परिवारों को आज भी सरकार द्वारा की गई घोषणाओं के पूरे होने का इंतजार करना पड़ रहा है। शहीद सुखबीर सिंह की पत्नी चंदा देवी ने बताया कि गांव के स्कूल का नाम शहीद सुखबीर सिंह के नाम पर रखा जाना था। स्कूल पर बोर्ड तो लगा दिया गया है लेकिन अब तक कागजों में स्कूल का नाम शहीद के नाम पर नहीं रखा गया है। शहीद सतबीर सिंह मोर की पत्नी शीला देवी ने कहा कि शहादत के समय सरकार ने कई घोषणाएं की थी लेकिन इसका लाभ आज तक नहीं मिला।

कारगिल युद्ध में यह जवान हुए थे शहीद

  • हवलदार लक्ष्मण सिंह, जाट रेजिमेंट, गांव महलाना
  • नायक भीम सिंह, जाट रेजिमेंट, गांव पिनाना
  • सिपाही रवींद्र सिंह, जाट रेजिमेंट, गांव रोहणा
  • सिपाही सुखबीर सिंह, गांव रुखी
  • नायब सूबेदार महाबीर सिंह, राजपूत रेजिमेंट, गावं भंडेरी
  • नायक सतबीर सिंह मोर, जाट रेजिमेंट, गांव बरोदा
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