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Hindi News ›   Chandigarh ›   Kargil vijay diwas 2020: China on the path of Pakistan, But this is not 1962 India

CourageInKargil: रिटायर मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल बोले- 1999 में जो पाक सैनिकों ने किया, वही अब चीनी सेना कर रही

Sun, 26 Jul 2020 02:03 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 26 Jul 2020 02:03 PM IST
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Kargil vijay diwas 2020: China on the path of Pakistan, But this is not 1962 India
मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल (रिटा.), 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान बारामूला में तैनात थे।

पाकिस्तानी घुसपैठियों ने 1999 की शुरुआत में ही श्रीनगर से लेह रोड की ओर जाने वाली ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा करना शुरू कर दिया था। घुसपैठ के शुरुआती दौर में पाकिस्तान ने दावा किया कि घुसपैठिए ‘मुजाहिदीन’ थे लेकिन जब युद्ध शुरू हुआ तो तस्वीर साफ हो गई। पाकिस्तान ने हमसे बड़ा धोखा किया था।

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भारतीय सशस्त्र बल को खतरे से निपटने के लिए तैनात कर दिया गया लेकिन पहाड़ों में यह ऑपरेशन कठिन, धीमी गति से चलने वाला था। ऐसे में सैन्य नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती सामने थी। सेना के बहादुर युवा अधिकारियों ने बेहद कठिन हमलों का नेतृत्व किया। कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे और जीडीआर योगेंद्र यादव जैसे नाम उदाहरण हैं। 
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आर्टिलरी का उपयोग अभिनव तरीके से किया गया ताकि वह दुश्मन पर सीधी आग उगल सके और कहर बरपा सके। ऑपरेशन व्हाइट सी के रूप में वायुसेना ने शानदार भूमिका निभाई। लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल विनाशकारी ढंग से किया। इंच-इंच तक दुश्मन को पीटा गया। यह सब हुआ बहादुर सैनिकों के रक्त और अमूल्य जीवन के बलिदान से। 

पूरे देश ने एकजुट होकर सैनिकों का समर्थन किया। देश के युवा पूरी तरह से चार्ज थे और सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए उत्सुक भी। आम नागरिकों ने रक्तदान कर अपना समर्थन दिया। अंतत: 26 जुलाई 1999 को जीत हासिल हुई और घुसपैठियों को मार दिया गया या खदेड़ दिया गया। यह महान निर्णायक जीत थी। आज हमें अपने उत्तरी भाग के पड़ोसी से खतरा है तो देश फिर एकजुट है। ऐसा लगाता है कि घुसपैठ के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को दारुक, श्योक, दौलत बेग ओल्डी रोड पर हावी होने के लिए भेजा गया है। 1999 में पाकिस्तानी सैनिकों ने जो किया और अब वही काम चीनी सैनिक कर रहे हैं। 

नियंत्रण रेखा जो पाकिस्तान के साथ है और वास्तविक नियंत्रण रेखा जो चीन और भारत के बीच है, उसमें अंतर है। एलओसी स्पष्ट रूप से नक्शे और जमीन पर परिभाषित है, जबकि एलएसी अस्पष्ट और अपरिभाषित है। एलएसी को लेकर हमारी अपनी धारणा है और चीन की अपनी। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एलएसी पर दशकों से कोई गोलीबारी नहीं हुई है। 

चीन भारतीय सेना को लेकर 1962 के अनुभव के आधार पर गलत धारणा पाले है। भारतीय सेना अतीत की तुलना में आज बेहतर सुसज्जित, प्रशिक्षित और प्रेरित है। फिर भी सैन्य उपयोग केवल अंतिम उपाय के रूप में किया जाना चाहिए क्योंकि दो बड़ी परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध एक भयानक परिणाम देने वाला होगा। 

देश आज कोविड-19 महामारी के रूप में एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे समय में एकता समय की जरूरत है। क्षुद्र राजनीतिक समस्याओं और असहमति जताने की बजाय आज पूरे देश को सरकार के फैसलों के साथ डटकर खड़े होने की जरूरत है। तो आइए हम अपने कारगिल नायकों को सलाम करते हैं और उनके वीरतापूर्ण कार्यों को याद करते हैं। ऐसा करते हुए हम अपने देश की रक्षा के समर्थन में एक होकर खड़े होने का संकल्प लें। 1962 में लता मंगेशकर ने एक प्रसिद्ध गीत ‘ये मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी’ गाया था। चीनी लेखकों के लिए अब इस तरह के गीत लिखने का समय आ गया है।  

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