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Chandigarh News: कल्याणी पर हत्या, साजिश और सुबूत मिटाने की धाराओं में चलेगा मुकदमा

Sun, 05 May 2024 03:35 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 05 May 2024 03:35 AM IST
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Kalyani will be prosecuted under sections of murder, conspiracy and destruction of evidence
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट व राष्ट्रीय निशानेबाज सुखमनप्रीत सिंह सिद्धू उर्फ सिप्पी सिद्धू हत्याकांड की मुख्य आरोपी कल्याणी सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हत्या के नौ साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने कल्याणी सिंह पर आरोप तय कर दिए। कल्याणी पर अब हत्या, सुबूत मिटाने व हत्या की साजिश रचने की धाराओं में मुकदमा चलेगा। इससे पहले बचाव पक्ष आरोप तय होने से बचने के लिए बार-बार अदालत में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर कोर्ट को मामले को टालने का प्रयास कर रहा था। आरोप तय होने से पहले भी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला फिर सीबीआई अदालत में पहुंचा और अब कल्याणी पर आरोप तय कर दिए गए हैं। कल्याणी सिंह शहर के एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत थी।
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वर्ष 2015 में सुखमनप्रीत सिंह उर्फ सिप्पी सिद्धू की सेक्टर-27 के एक पार्क में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम के दौरान सिप्पी सिद्धू के शरीर से चार गोलियां निकली थीं। इस मामले में सेक्टर-26 थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी इस हत्याकांड को सुलझाने में पुलिस पूरी तरह से नाकाम साबित हुई।
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पीड़ित परिवार की ओर से लगाए जा रहे आरोपों और मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस को वर्ष 2016 में सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद सीबीआई ने महिला जज की बेटी कल्याणी सिंह को गिरफ्तार किया था। अदालत में जांच एजेंसी ने दावा किया कि आरोपी कल्याणी ने भी सिप्पी सिद्धू पर गोली चलाई थी। इस हत्याकांड में सीबीआई ने कल्याणी सिंह को ही मुख्य आरोपी बनाया और उसके खिलाफ वर्ष 2022 में चार्जशीट दायर की थी। सीबीआई की इस चार्जशीट में कुल 84 गवाह बनाए गए थे। कई महीनों बाद कल्याणी को सीबीआई अदालत से जमानत मिल गई थी जबकि सीबीआई ने अदालत में दायर अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि सिप्पी सिद्धू और कल्याणी के गहरे संबंध थे और दोनों शादी भी करना चाहते थे लेकिन सिप्पी के परिजनों ने इस शादी से इन्कार कर दिया था।
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सीबीआई ने अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों में यह भी दावा किया था कि शादी से इन्कार होने के बाद सिप्पी ने कल्याणी की कुछ आपत्तिजनक फोटो परिवार और दोस्तों के बीच साझा कर दी थी, जिसके चलते इन दोनों के बीच अनबन हो गई थी। इसी बात को लेकर सिप्पी सिद्धू की हत्या की गई थी।


हत्या की धारा में फांसी तो सुबूत मिटाने पर सात साल तक की सजा
आरोपी कल्याणी पर हत्या की धारा 302, सुबूत मिटाने की धारा 201 व साजिश रचने की धारा के तहत आरोप तय किए गए हैं। हत्या की धारा 302 के तहत आरोपी को आजीवन कारावास या मृत्युदंड (हत्या की गंभीरता के आधार पर) के साथ-साथ जुर्माने की सजा दी जा सकती है। यह एक गैर जमानती और संज्ञेय अपराध है, जो जिला एवं सत्र न्यायालय में चलता है। यह अपराध किसी भी प्रकार से समझौता करने योग्य नहीं है। इसके साथ ही सुबूत मिटाने की धारा 201 के तहत आरोपी को क्रिमिनल व्यक्ति के सुबूत को मिटाने के जुर्म में सात साल तक की सजा हो सकती है।
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