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80 साल की बुजुर्ग को 11 साल बाद मिला इंसाफ, वो भी ऐसे
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Sun, 18 Oct 2015 04:40 PM IST
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11 सालों से अपने ही प्लॉट के लिए संघर्ष कर रही अस्सी साल की एक महिला को जिला लोक अदालत से इंसाफ मिला है। अदालत ने गमाडा को एक महीने में महिला के प्लॉट की निशानदेही कर पजेशन देने के आदेश दिए हैं।
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साथ ही कहा कि अगर गमाडा तय समय में पजेशन नहीं देता है तो गमाडा के सीए को निजी रूप में अदालत में पेश होना पड़ेगा।
जानकारी के मुताबिक सेक्टर-78 निवासी परमजीत कौर ने बताया कि वह एक रिटायर मुलाजिम हैं। 2004 में गमाडा ने उन्हें सेक्टर-76 से अस्सी में एक कनाल का प्लॉट अलॉट किया था। उस समय प्लॉट की कीमत बीस लाख रुपये थी। इन्होंने गमाडा की शर्तों के मुताबिक तय किश्तों में पैसे जमा करवा दिए।
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साथ ही गमाडा ने प्लॉट पर मकान का नक्शा पास कर दिया और प्लॉट की सीडी भी हो गई। जब सारी प्रक्रिया संपन्न हो गई तो अलॉटी ने गमाडा से प्लॉट की पजेशन व निशानदेही की बात कहीं। तो गमाडा ने अलॉटी की बात पर टाल-मटोल की नीति अपनाने लगा।
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परमजीत कौर ने जब देखा कि गमाडा उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है तो उन्होंने 2015 में लोक अदालत में गमाडा के खिलाफ केस दायर किया। शिकायत के बाद जब समन हुए तो गमाडा अधिकारी ने अदालत में कहा कि सेक्टर-76 से अस्सी वाली जमीन पर केस चल रहा है। अदालत में दोनों पार्टियों ने अपना पक्ष रखा।
अदालत में गमाडा ने कहा कि जिस जमीन में अलॉटी का प्लॉट पड़ता है। उसका केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। वहीं, अलॉटी के वकील ने अदालत में उक्त जमीन का नक्शा पेश किया।
साथ ही अदालत को बताया जिस जमीन पर अदालत में केस चल रहा है। अलॉटी का प्लॉट उसकी जमीन से काफी पीछे है। ऐसे में अलॉटी को प्लॉट अलॉट करने में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं है।
इसके बाद अदालत ने गमाडा को 15 दिन में अलॉटी के प्लॉट की निशानदेही और एक महीने में पजेशन देने की बात कहीं थी।