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Panchkula: सात समंदर पार से आईं जूलियट इस्सर ने किया देहदान, माैत के बाद भी कर गई मानवता की सेवा
Thu, 25 Jun 2026 01:27 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2026 01:27 AM IST
सार
जूलियट इस्सर पेशे से नर्स थीं और जीवनभर सेवा कार्यों से जुड़ी रहीं। उन्होंने दार्जिलिंग के एक विद्यालय और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं। परिवार और परिचितों के अनुसार वह हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं।
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पति और बेटी के साथ जूलियट
- फोटो : संवाद
विस्तार
ब्रिटेन में जन्मीं और विवाह के बाद भारतीय संस्कृति को अपनाकर पंचकूला की बहू बनीं जूलियट इस्सर (89) ने मृत्यु के बाद देहदान कर मानव सेवा की मिसाल पेश की है। कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद बुधवार को उनका निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप परिवार ने उनका पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों के लिए पीजीआई को सौंप दिया।
सेक्टर-6 निवासी जूलियट इस्सर का विवाह वर्ष 1965 में भारतीय सेना के अधिकारी ब्रिगेडियर सतीश इस्सर से हुआ था। ब्रिगेडियर इस्सर के अनुसार दोनों की मुलाकात दार्जिलिंग में हुई थी, जहां जूलियट एक स्कूल में नर्स के रूप में कार्यरत थीं। करीब पांच वर्षों के प्रेम संबंध के बाद दोनों ने विवाह किया। इसके बाद जूलियट ने भारत को ही अपना स्थायी निवास बना लिया और भारतीय संस्कृति व जीवन मूल्यों को पूरी तरह अपना लिया।
जीवनभर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद की
जूलियट इस्सर पेशे से नर्स थीं और जीवनभर सेवा कार्यों से जुड़ी रहीं। उन्होंने दार्जिलिंग के एक विद्यालय और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं। परिवार और परिचितों के अनुसार वह हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं। समाज सेवा और बच्चों की देखभाल उनके जीवन का अहम हिस्सा रही। वर्ष 2013 में उन्हें कैंसर का पता चला था लेकिन उन्होंने साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ करीब 13 वर्षों तक बीमारी का सामना किया। बीमारी के दौरान भी उन्होंने सेवा और मानवता के मूल्यों को नहीं छोड़ा।
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मृत्यु से पहले लिया था देहदान का संकल्प
हितैषी फाउंडेशन के अध्यक्ष भारत हितैषी ने बताया कि जूलियट इस्सर ने देहदान का संकल्प लिया था। उनकी इच्छा नेत्रदान की भी थी लेकिन कैंसर से पीड़ित होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। निधन के बाद उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव शरीर पीजीआई चंडीगढ़ को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि जूलियट की बीमारी के दौरान ब्रिगेडियर सतीश इस्सर ने हर परिस्थिति में उनका साथ निभाया। बेटे सुनील और बेटी कविता ने भी उनकी देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
15 वर्षों में हजारों लोगों को किया प्रेरित
हितैषी फाउंडेशन संस्था पिछले 15 वर्षों से नेत्रदान, अंगदान और देहदान के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है। अब तक 5649 लोगों का करवाया जा चुका है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने जूलियट इस्सर के देहदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए लोगों से अधिक से अधिक संख्या में नेत्रदान, अंगदान और देहदान अभियान से जुड़ने की अपील की है।
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सेक्टर-6 निवासी जूलियट इस्सर का विवाह वर्ष 1965 में भारतीय सेना के अधिकारी ब्रिगेडियर सतीश इस्सर से हुआ था। ब्रिगेडियर इस्सर के अनुसार दोनों की मुलाकात दार्जिलिंग में हुई थी, जहां जूलियट एक स्कूल में नर्स के रूप में कार्यरत थीं। करीब पांच वर्षों के प्रेम संबंध के बाद दोनों ने विवाह किया। इसके बाद जूलियट ने भारत को ही अपना स्थायी निवास बना लिया और भारतीय संस्कृति व जीवन मूल्यों को पूरी तरह अपना लिया।
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जीवनभर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद की
जूलियट इस्सर पेशे से नर्स थीं और जीवनभर सेवा कार्यों से जुड़ी रहीं। उन्होंने दार्जिलिंग के एक विद्यालय और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं। परिवार और परिचितों के अनुसार वह हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं। समाज सेवा और बच्चों की देखभाल उनके जीवन का अहम हिस्सा रही। वर्ष 2013 में उन्हें कैंसर का पता चला था लेकिन उन्होंने साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ करीब 13 वर्षों तक बीमारी का सामना किया। बीमारी के दौरान भी उन्होंने सेवा और मानवता के मूल्यों को नहीं छोड़ा।
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मृत्यु से पहले लिया था देहदान का संकल्प
हितैषी फाउंडेशन के अध्यक्ष भारत हितैषी ने बताया कि जूलियट इस्सर ने देहदान का संकल्प लिया था। उनकी इच्छा नेत्रदान की भी थी लेकिन कैंसर से पीड़ित होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। निधन के बाद उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव शरीर पीजीआई चंडीगढ़ को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि जूलियट की बीमारी के दौरान ब्रिगेडियर सतीश इस्सर ने हर परिस्थिति में उनका साथ निभाया। बेटे सुनील और बेटी कविता ने भी उनकी देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
15 वर्षों में हजारों लोगों को किया प्रेरित
हितैषी फाउंडेशन संस्था पिछले 15 वर्षों से नेत्रदान, अंगदान और देहदान के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है। अब तक 5649 लोगों का करवाया जा चुका है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने जूलियट इस्सर के देहदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए लोगों से अधिक से अधिक संख्या में नेत्रदान, अंगदान और देहदान अभियान से जुड़ने की अपील की है।