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पहली बारः रेप केस में बयान दर्ज कराने IO के घर पहुंचे जज, जानिए वजह

Thu, 26 Apr 2018 10:46 AM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 26 Apr 2018 10:46 AM IST
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judge reached at io home to give statement in rape case
बच्ची से रेप
जिला अदालत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ होगा कि दुराचार के मामले में जांच अधिकारी के घर जाकर उनके बयान दर्ज किए गए हों। पिछले साल देश में चर्चा का विषय रहे दस वर्षीय बच्ची के केस में भी जांच अधिकारी गर्भवती थीं, लेकिन उनके बयान दर्ज कराने की स्थिति में होने के कारण उनके बयान अदालत में ही दर्ज किए गए थे। बुधवार को महिला अपराध के मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष कोर्ट ने सात वर्षीय बच्ची से दुराचार के मामले में जांच अधिकारी रहीं पीजीआई चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर इरम रिजवी के घर जाकर उनके बयान दर्ज करने के लिए लोकल कमिश्नर (सिविल जज) को नियुक्त किया था।
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दरअसल जांच अधिकारी इन दिनों मातृत्व अवकाश पर हैं और डॉक्टरों ने उन्हें बाहर आने-जाने से मना किया हुआ है। इस पर लोकल कमिश्नर कुशल सिंगला ने सब इंस्पेक्टर के घर जाकर उनके बयान दर्ज किए। उनके साथ स्टेनो के अलावा कोर्ट का पूरा स्टाफ मौजूद और बचाव पक्ष के वकील भी मौजूद रहे। बयान दर्ज होने के बाद बचाव पक्ष ने उनका क्रास एग्जामिनेशन भी किया। मामला अपनी ही सात साल की मासूम बेटी को हवस का शिकार बनाने से जुड़ा है। इसमें मासूम की मां की शिकायत पर आरोपी पिता के खिलाफ सेक्टर-11 थाना पुलिस ने 16 अक्तूबर, 2016 को आईपीसी की धारा 376 (2), (एफ) (1) और पॉक्सो एक्ट 6 और 8 के तहत केस दर्ज किया था।
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केस में सबकी गवाही के बाद जांच अधिकारी के बयान होने शेष थे, लेकिन उनके गर्भवती होने के कारण वह अदालत में आकर बयान दर्ज करा पाने में असमर्थ थीं। इस पर अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील ने अदालत में उनके घर जाकर बयान दर्ज करने की याचिका दायर की थी। सब इंस्पेक्टर ने अदालत को दिए बयान में कहा कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने शिकायतकर्ता मां के सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान दर्ज किए थे। साथ ही सात वर्षीय पीड़िता के 164 के तहत मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज करवाए थे। वहीं जांच के सिलसिले में उन्होंने पीड़िता के घर 3-4 बार विजिट किया था। इसके बाद बचाव पक्ष के एडवोकेट वरुण वोहरा ने उनका क्रास एग्जामिनेशन भी किया।
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बच्ची पिता के खिलाफ दे चुकी है गवाही
सात वर्षीय पीड़िता पिता के खिलाफ गवाही दे चुकी है। अदालत में दर्ज बयान में उसने बताया था कि उसके पिता पहले भी उसके साथ ऐसी घिनौनी हरकत कर चुके है। हालांकि बचाव पक्ष के अनुसार बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके अलावा शिकायतकर्ता मां अदालत में बयान से मुकर चुकी है।


यह भी शिकायत
स्थानीय निवासी 7 वर्षीय बेटी को घर में अकेला पाकर उसके पिता ने उसे हवस का शिकार बना डाला था। मां के घर लौटने पर बच्ची ने उसे पिता की करतूत के बारे में बताया। साथ ही बच्ची ने बताया था कि पहले भी उसका पिता उसके साथ ऐसी हरकतें कर चुका है। पति की इस हरकत से दंग महिला ने इसकी सूचना पुलिस को दी और साथ ही इसकी शिकायत दी। पुलिस ने बच्ची का मेडिकल करवाने के बाद उसके पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था।
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