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केंद्र सरकार के खिलाफ उतरी ज्वाइंट एक्शन कमेटी
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चंडीगढ़। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन एंड एमसी इंप्लाइज एंड वर्कर्स की ओर से शुक्रवार को केंद्र सरकार की जन, मजदूर और मुलाजिम विरोधी नीतियों के खिलाफ सेक्टर-23 स्थित हॉर्टिकल्चर दफ्तर के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनियन के नेताओं ने केंद्र सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कन्वीनर अश्वनी कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने लेबर कानूनों में मजदूरों के खिलाफ बदलाव कर दिए हैं। इन बदलावों से मजदूरों का शोषण होगा। पब्लिक सेक्टर का निजीकरण किया जा रहा है। यूटी के बिजली विभागों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। इससे जहां लोगों को भारी नुकसान होगा, वहीं बिजली मुलाजिम भी इससे नहीं बच पाएंगे। मुलाजिमों के ऊपर हमेशा छंटनी की तलवार लटकी रहेगी और वेतन के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा। आम लोगों को महंगी बिजली मिलेगी और बिजली की शिकायतें भी समय पर पूरी नहीं होंगी, इसलिए बिजली विभाग का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।
समान काम के लिए मिले समान वेतन
अश्वनी कुमार और सुरमुख सिंह ने कहा कि सरकार ने जो मुलाजिम 2004 के बाद नौकरी पर रखे हैं, उनके लिए पुरानी पेंशन बंद करके नई पेंशन स्कीम शुरू की है, जबकि उनकी मांग है कि पुरानी पेंशन जल्द से जल्द शुरू की जाए। चौथे दर्जे के मुलाजिमों की बंद की भर्ती फिर से शुरू की जाए और कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग वर्कर्स के लिए सुरक्षित पॉलिसी बनाई जाए। कॉन्ट्रैक्ट मुलाजिमों को रेगुलर किया जाए और आऊटसोर्सिंग वर्कर्स को समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन की मुलाजिम विरोधी नीतियों के कारण मुलाजिम परेशान हैं। इस संबंध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल एडिशनल डिप्टी कमिश्नर से भी मिल चुका है और उन्हें प्रधानमंत्री के नाम एक मांग पत्र दिया गया है।
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ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कन्वीनर अश्वनी कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने लेबर कानूनों में मजदूरों के खिलाफ बदलाव कर दिए हैं। इन बदलावों से मजदूरों का शोषण होगा। पब्लिक सेक्टर का निजीकरण किया जा रहा है। यूटी के बिजली विभागों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। इससे जहां लोगों को भारी नुकसान होगा, वहीं बिजली मुलाजिम भी इससे नहीं बच पाएंगे। मुलाजिमों के ऊपर हमेशा छंटनी की तलवार लटकी रहेगी और वेतन के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा। आम लोगों को महंगी बिजली मिलेगी और बिजली की शिकायतें भी समय पर पूरी नहीं होंगी, इसलिए बिजली विभाग का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।
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समान काम के लिए मिले समान वेतन
अश्वनी कुमार और सुरमुख सिंह ने कहा कि सरकार ने जो मुलाजिम 2004 के बाद नौकरी पर रखे हैं, उनके लिए पुरानी पेंशन बंद करके नई पेंशन स्कीम शुरू की है, जबकि उनकी मांग है कि पुरानी पेंशन जल्द से जल्द शुरू की जाए। चौथे दर्जे के मुलाजिमों की बंद की भर्ती फिर से शुरू की जाए और कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग वर्कर्स के लिए सुरक्षित पॉलिसी बनाई जाए। कॉन्ट्रैक्ट मुलाजिमों को रेगुलर किया जाए और आऊटसोर्सिंग वर्कर्स को समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन की मुलाजिम विरोधी नीतियों के कारण मुलाजिम परेशान हैं। इस संबंध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल एडिशनल डिप्टी कमिश्नर से भी मिल चुका है और उन्हें प्रधानमंत्री के नाम एक मांग पत्र दिया गया है।
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