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बीमारी के दर्द को दरकिनार कर लोगों को संक्रमण से बचाने में जुटी हैं जितेंद्र कौर
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चंडीगढ़। जीएमसीएच- 32 में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर जितेंद्र कौर ने अपने दृढ़ निश्चय और मजबूत इरादों के बल पर यह साबित कर दिया है कि बीमारी का दर्द किसी के मजबूत इरादों को कम नहीं कर सकता। कोरोना महामारी के दौरान जितेंद्र ने ड्यूटी के साथ-साथ 3000 से ज्यादा मास्क बनाकर जरूरतमंद लोगों को वितरित किए हैं।
उनका कहना है कि अगर उनके जरा से प्रयास से कोई कोरोना महामारी जैसे संक्रमण से बच जाए तो उनके लिए इससे बड़ी खुशी की बात और क्या होगी। लॉकडाउन के दौरान जब सबकुछ बंद था तब लोग मास्क के लिए काफी परेशान थे। उस समय जितेंद्र ने अपने एक परिचित के घर जाकर उनकी दुकान से मास्क बनाने के लिए कपड़े लिए और रातभर जागकर मास्क तैयार की है। उनके इस कार्य में उनके पति और बेटे ने भरपूर सहयोग किया।
अपना दर्द नजरअंदाज कर लोगों की सेवा की
जीएमसीएच- 32 में 15 साल से नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात जितेंद्र कौर को मधुमेह, हाइपरटेंशन, अस्थमा, हृदय संबंधित परेशानी और कई अन्य गंभीर बीमारियां हैं। इसकी वजह से उन्हें काफी परेशानी होती है, लेकिन जितेंद्र का खुशमिजाज व्यवहार और दूसरों की मदद करने की सोच उनके सारे कष्ट को मानो दूर कर देता है। अब भी सूचना मिलते ही वह मास्क बनाकर दे देती हैं।
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15 दिन पर लगता है इनका लंगर
कोरोना महामारी के दौर में जितेंद्र गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होने के बावजूद हर 15 दिन बाद 75 से 100 लोगों का लंगर बनाकर गुरुद्वारे में देती हैं। उनका कहना है कि अगर उनके जरा से प्रयास से लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाए तो उनके लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। लंगर बनाने के नेक कार्य में उनके बेटे और पति उनका पूरा सहयोग करते हैं।
परिवार बना वरदान
जितेंद्र कौर के लिए उनका परिवार किसी वरदान से कम नहीं है। जितेंद्र का कहना है कि उनके पति बलविंदर सिंह और बेटा अविजोत सिंह के सहयोग से उनकी हर मुश्किल आसान हो जाती है। चाहे बीमारी का दर्द हो या अस्पताल और घर की जिम्मेदारियां हर राह वे बेहद आसानी से पूरा कर लेती हैं। उन्हें पति के प्यार और बच्चे के स्नेह के सामने अपनी सारी मुश्किलें छोटी नजर आती हैं। जितेंद्र का कहना है कि अगर परिवार का सहयोग मिले तो एक नारी के लिए मुश्किल से मुश्किल राह भी आसान हो जाती है।
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उनका कहना है कि अगर उनके जरा से प्रयास से कोई कोरोना महामारी जैसे संक्रमण से बच जाए तो उनके लिए इससे बड़ी खुशी की बात और क्या होगी। लॉकडाउन के दौरान जब सबकुछ बंद था तब लोग मास्क के लिए काफी परेशान थे। उस समय जितेंद्र ने अपने एक परिचित के घर जाकर उनकी दुकान से मास्क बनाने के लिए कपड़े लिए और रातभर जागकर मास्क तैयार की है। उनके इस कार्य में उनके पति और बेटे ने भरपूर सहयोग किया।
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अपना दर्द नजरअंदाज कर लोगों की सेवा की
जीएमसीएच- 32 में 15 साल से नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात जितेंद्र कौर को मधुमेह, हाइपरटेंशन, अस्थमा, हृदय संबंधित परेशानी और कई अन्य गंभीर बीमारियां हैं। इसकी वजह से उन्हें काफी परेशानी होती है, लेकिन जितेंद्र का खुशमिजाज व्यवहार और दूसरों की मदद करने की सोच उनके सारे कष्ट को मानो दूर कर देता है। अब भी सूचना मिलते ही वह मास्क बनाकर दे देती हैं।
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15 दिन पर लगता है इनका लंगर
कोरोना महामारी के दौर में जितेंद्र गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होने के बावजूद हर 15 दिन बाद 75 से 100 लोगों का लंगर बनाकर गुरुद्वारे में देती हैं। उनका कहना है कि अगर उनके जरा से प्रयास से लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाए तो उनके लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। लंगर बनाने के नेक कार्य में उनके बेटे और पति उनका पूरा सहयोग करते हैं।
परिवार बना वरदान
जितेंद्र कौर के लिए उनका परिवार किसी वरदान से कम नहीं है। जितेंद्र का कहना है कि उनके पति बलविंदर सिंह और बेटा अविजोत सिंह के सहयोग से उनकी हर मुश्किल आसान हो जाती है। चाहे बीमारी का दर्द हो या अस्पताल और घर की जिम्मेदारियां हर राह वे बेहद आसानी से पूरा कर लेती हैं। उन्हें पति के प्यार और बच्चे के स्नेह के सामने अपनी सारी मुश्किलें छोटी नजर आती हैं। जितेंद्र का कहना है कि अगर परिवार का सहयोग मिले तो एक नारी के लिए मुश्किल से मुश्किल राह भी आसान हो जाती है।