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जेपी प्लांट मामले में नगर निगम चंडीगढ़ के वकील की हाईकोर्ट में दलील, बताया क्यों लिया कब्जा
Wed, 24 Jun 2020 10:26 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 24 Jun 2020 10:26 AM IST
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जेपी कंपनी को गारबेज प्लांट पर स्टे देने का मामला अब हाईकोर्ट में पहुंच गया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम ने दलील दी कि जेपी कंपनी अनुबंध के अनुरूप काम नहीं कर रही थी। इसलिए एनजीटी के निर्देशानुसार प्लांट को कब्जे में लिया गया। कब्जा लेने के बाद कंपनी को स्टे देना ठीक नहीं है। क्योंकि भविष्य में लगने वाला जुर्माना निगम को भरना है न कि कंपनी को।
निगम ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि एनजीटी ने निर्देश दिया था कि जेपी प्लांट कचरे का निस्तारण कर सकता है तो ठीक, नहीं तो निगम इस मामले में निर्णय ले। कचरा प्रोसेस नहीं हुआ तो निगम को ही जुर्माना भरना पड़ेगा। उसके बाद फरवरी माह की सदन की बैठक में तय हुआ था कि जेपी प्लांट को निगम टेकओवर करेगा। प्लांट के अधिकारियों को सात दिन में जगह खाली करने का नोटिस दिया गया था, लेकिन प्लांट के अधिकारी सदन के फैसले के खिलाफ जिला अदालत चले गए।
जिला अदालत ने कहा कि 90 दिनों में प्लांट के अधिकारी कहीं से स्टे ऑर्डर ले आएं या इस फैसले को बदलवा लें। समय सीमा पूरी होने के बाद जब कंपनी के अधिकारी कोई निर्णय नहीं ले सके तो प्लांट को 24 घंटे में खाली करने का नोटिस भेज दिया गया। जेपी प्लांट के अधिकारी निगम से कचरा प्रोसेस करने के एवज में टिपिंग फीस मांग रहे थे, जबकि निगम फीस नहीं देना चाहता था। मामला फिर एनजीटी में पहुंचा। वहां एनजीटी ने कहा कि टिपिंग फीस केवल 9 माह के लिए थी।
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अब निगम कंपनी को टिपिंग फीस नहीं देगा। नगर निगम द्वारा कब्जा लेने के बाद जब प्लांट के अधिकारी रोक के आदेश लेकर पहुंचे तो निगम ने साफ कहा कि कब्जा लेने के बाद अब इसका क्या औचित्य है। अब स्टे ऑर्डर के खिलाफ निगम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए इसे चुनौती दी है।
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निगम ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि एनजीटी ने निर्देश दिया था कि जेपी प्लांट कचरे का निस्तारण कर सकता है तो ठीक, नहीं तो निगम इस मामले में निर्णय ले। कचरा प्रोसेस नहीं हुआ तो निगम को ही जुर्माना भरना पड़ेगा। उसके बाद फरवरी माह की सदन की बैठक में तय हुआ था कि जेपी प्लांट को निगम टेकओवर करेगा। प्लांट के अधिकारियों को सात दिन में जगह खाली करने का नोटिस दिया गया था, लेकिन प्लांट के अधिकारी सदन के फैसले के खिलाफ जिला अदालत चले गए।
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जिला अदालत ने कहा कि 90 दिनों में प्लांट के अधिकारी कहीं से स्टे ऑर्डर ले आएं या इस फैसले को बदलवा लें। समय सीमा पूरी होने के बाद जब कंपनी के अधिकारी कोई निर्णय नहीं ले सके तो प्लांट को 24 घंटे में खाली करने का नोटिस भेज दिया गया। जेपी प्लांट के अधिकारी निगम से कचरा प्रोसेस करने के एवज में टिपिंग फीस मांग रहे थे, जबकि निगम फीस नहीं देना चाहता था। मामला फिर एनजीटी में पहुंचा। वहां एनजीटी ने कहा कि टिपिंग फीस केवल 9 माह के लिए थी।
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अब निगम कंपनी को टिपिंग फीस नहीं देगा। नगर निगम द्वारा कब्जा लेने के बाद जब प्लांट के अधिकारी रोक के आदेश लेकर पहुंचे तो निगम ने साफ कहा कि कब्जा लेने के बाद अब इसका क्या औचित्य है। अब स्टे ऑर्डर के खिलाफ निगम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए इसे चुनौती दी है।
यह था बैठक में फैसला
सदन की बैठक में तय किया गया था कि मिक्स वेस्ट प्लांट की मशीनों को हटाने के लिए कहा जाएगा। कंपोस्ट खाद की मशीनों की राशि निगम कंपनी को देगा। मशीनें समय सीमा के अंदर न हटने पर निगम मशीनों को हटाकर बेच देगा।
मशीनों को खरीदने के लिए निगम तीसरी पार्टी से उसकी उसकी राशि तय कराएगा। इसमें कंपनी पर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व अन्य जुर्माने की राशि को घटाकर कंपनी को पेमेंट किया जाएगा। मशीनों की राशि से जुर्माने की राशि ज्यादा हुई तो बाद में कंपनी से वसूली की जाएगी।
एनजीटी ने लगाई थी फटकार
कमिश्नर ने कहा कि एनजीटी की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सूखे और गीले कचरे का अलग-अलग निस्तारण नहीं हुआ तो एक अप्रैल के बाद 10 लाख रुपये जुर्माना लगने लगेगा। चूंकि कोरोना के कारण फिलहाल जुर्माना नहीं लगाया गया है, लेकिन आगामी दिनों में कचरा निस्तारण नहीं हुआ तो जुर्माना भुगतना पड़ेगा।
मशीनों को खरीदने के लिए निगम तीसरी पार्टी से उसकी उसकी राशि तय कराएगा। इसमें कंपनी पर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व अन्य जुर्माने की राशि को घटाकर कंपनी को पेमेंट किया जाएगा। मशीनों की राशि से जुर्माने की राशि ज्यादा हुई तो बाद में कंपनी से वसूली की जाएगी।
एनजीटी ने लगाई थी फटकार
कमिश्नर ने कहा कि एनजीटी की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सूखे और गीले कचरे का अलग-अलग निस्तारण नहीं हुआ तो एक अप्रैल के बाद 10 लाख रुपये जुर्माना लगने लगेगा। चूंकि कोरोना के कारण फिलहाल जुर्माना नहीं लगाया गया है, लेकिन आगामी दिनों में कचरा निस्तारण नहीं हुआ तो जुर्माना भुगतना पड़ेगा।