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तुरंत आरक्षण लेना नहीं चाहते जाट, धरनों का मकसद कुछ और: मलिक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक।
Updated Mon, 13 Jun 2016 09:33 AM IST
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यशपाल मलिक
- फोटो : फाइल फोटो
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि प्रदेश में दिये जा रहे जाट समाज के धरने तुरंत आरक्षण के लिए नहीं हैं।
उनकी पहली मांग गिरफ्तार किये गये युवाओं को जेल से छुड़वाने और उन पर दर्ज मुकदमे खत्म कराने की है। दूसरी मांग यह है कि आरक्षण के संबंध में सरकार कोर्ट में जोरदार पैरवी का आश्वासन दे। ऐसा करने पर धरने खत्म कर दिये जाएंगे।
यशपाल मलिक ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में कहा कि प्रदेश सहित देश भर में जाट समाज के लोग धरने इसलिए नहीं दे रहे हैं कि सरकार उन्हें तुरंत आरक्षण दे। सरकार कोर्ट में पैरवी का आश्वासन दे और युवाओं को जेल से छोड़े, तो धरने खत्म हो जाएंगे।
मलिक ने सीएम के अकड़ में रहने वाले बयान पर कहा कि धूप में धरने पर बैठने वाले अकड़ में नहीं रहते। उन्होंने सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वह बातचीत की अपील करते हैं, लेकिन बैठकों में बुलाकर धमकाया जाता है। आरोप लगाया कि पुलिस ने फर्जी मुकदमे दर्ज करके युवाओं को जेल तो भेज दिया, लेकिन अब सुबूत नहीं होने के कारण 90 दिन में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पा रही है। यही कारण है कि चार्जशीट में लगातार देरी की जा रही है।
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उनकी पहली मांग गिरफ्तार किये गये युवाओं को जेल से छुड़वाने और उन पर दर्ज मुकदमे खत्म कराने की है। दूसरी मांग यह है कि आरक्षण के संबंध में सरकार कोर्ट में जोरदार पैरवी का आश्वासन दे। ऐसा करने पर धरने खत्म कर दिये जाएंगे।
यशपाल मलिक ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में कहा कि प्रदेश सहित देश भर में जाट समाज के लोग धरने इसलिए नहीं दे रहे हैं कि सरकार उन्हें तुरंत आरक्षण दे। सरकार कोर्ट में पैरवी का आश्वासन दे और युवाओं को जेल से छोड़े, तो धरने खत्म हो जाएंगे।
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मलिक ने सीएम के अकड़ में रहने वाले बयान पर कहा कि धूप में धरने पर बैठने वाले अकड़ में नहीं रहते। उन्होंने सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वह बातचीत की अपील करते हैं, लेकिन बैठकों में बुलाकर धमकाया जाता है। आरोप लगाया कि पुलिस ने फर्जी मुकदमे दर्ज करके युवाओं को जेल तो भेज दिया, लेकिन अब सुबूत नहीं होने के कारण 90 दिन में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पा रही है। यही कारण है कि चार्जशीट में लगातार देरी की जा रही है।
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