{"_id":"579c4c574f1c1b8b3b21e456","slug":"jat-reservation-jat-protest-haryana-jat-reservation-punjab-haryana-highcourt-haryana-govt","type":"story","status":"publish","title_hn":"जाट आरक्षणः सरकार ने हाईकोर्ट में रखा पक्ष, दी बड़ी दलील, जानिए क्या?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जाट आरक्षणः सरकार ने हाईकोर्ट में रखा पक्ष, दी बड़ी दलील, जानिए क्या?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 30 Jul 2016 06:46 PM IST
विज्ञापन
जाट आरक्षण को लेकर सोनीपत में महापंचायत
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जाटों को आरक्षण देने के मामले में हरियाणा सरकार ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए बड़ी दलील दी। इसके बाद मामले पर शुक्रवार को सुनवाई 3 अगस्त तक स्थगित कर दी गई। हाईकोर्ट ने इस मामले में जाटों को आरक्षण दिए जाने पर अंतरिम रोक लगा रखी है, जो फिलहाल जारी रहेगी। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा था कि आखिर किन विशेष परिस्थितियों में जाटों को आरक्षण का लाभ दिया गया है।
हरियाणा सरकार की ओर से हाईकोर्ट के सामने पक्ष रखते हुए कहा गया था कि जाटों को किसी प्रशासनिक आदेश के माध्यम से नहीं बल्कि कानून बनाकर आरक्षण दिया गया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पूर्व के आदेशों के माध्यम से हरियाणा सरकार ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में भौगोलिक क्षेत्र और सांस्कृतिक विभिन्नता है। ऐसे में आरक्षण का खाका पूरे देश में एक जैसा हो यह जरूरी नहीं है।
सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी इस बात को मान चुका है कि यदि किसी समुदाय विशेष को आरक्षण की जरूरत सरकार महसूस करती है तो ऐसी स्थिति में आरक्षण दिया जा सकता है। आरक्षण की अधिकतम सीमा के 50 प्रतिशत होने पर भी हरियाणा सरकार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि तमिलनाडु में 69 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है और इस व्यवस्था को कमिशन के माध्यम से लागू किया गया है।
विज्ञापन
हालांकि, इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जा चुका है, लेकिन इसमें सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है। सरकार ने कहा कि हरियाणा सरकार ने भी पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए कानून बनाया और कमिशन का गठन किया। इसके बाद आरक्षण का लाभ दिया गया है, ऐसे में 50 प्रतिशत की सीमा लांघी जा सकती है।
विज्ञापन
हरियाणा सरकार की ओर से हाईकोर्ट के सामने पक्ष रखते हुए कहा गया था कि जाटों को किसी प्रशासनिक आदेश के माध्यम से नहीं बल्कि कानून बनाकर आरक्षण दिया गया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पूर्व के आदेशों के माध्यम से हरियाणा सरकार ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में भौगोलिक क्षेत्र और सांस्कृतिक विभिन्नता है। ऐसे में आरक्षण का खाका पूरे देश में एक जैसा हो यह जरूरी नहीं है।
विज्ञापन
सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी इस बात को मान चुका है कि यदि किसी समुदाय विशेष को आरक्षण की जरूरत सरकार महसूस करती है तो ऐसी स्थिति में आरक्षण दिया जा सकता है। आरक्षण की अधिकतम सीमा के 50 प्रतिशत होने पर भी हरियाणा सरकार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि तमिलनाडु में 69 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है और इस व्यवस्था को कमिशन के माध्यम से लागू किया गया है।
विज्ञापन
हालांकि, इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जा चुका है, लेकिन इसमें सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है। सरकार ने कहा कि हरियाणा सरकार ने भी पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए कानून बनाया और कमिशन का गठन किया। इसके बाद आरक्षण का लाभ दिया गया है, ऐसे में 50 प्रतिशत की सीमा लांघी जा सकती है।