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जाट आंदोलन: मृतक के आश्रितों को घर के पास मिलेगी पक्की नौकरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 25 Mar 2017 12:45 PM IST
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- फोटो : File Photo
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हरियाणा सरकार ने आंदोलनकारी जाटों के साथ हुए समझौते को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण बेदी की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति की शुक्रवार को यहां पहली बैठक हरियाणा निवास में हुई।
लगभग तीन घंटे चली बैठक में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुए समझौते को लागू करने पर गहन मंथन किया गया। बेदी के अलावा बैठक में रोहतक रेंज के आईजी नवदीप सिंह विर्क, आंदोलनकारियों के प्रतिनिधि एडवोकेट एसएस खरब और एडिशनल एडवोकेट जनरल कुलदीप तिवारी शामिल रहे। आंदोलन में मारे गए जाटों के आश्रितों को रोजगार देने के लिए आईएएस अधिकारी बृजेंद्र सिंह को कमेटी के साथ नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, वह मुख्य सचिव कार्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे। पहली बैठक में निर्णय लिया गया कि आंदोलन में मारे गए लोगों के आश्रितों को घर के आसपास पक्की नौकरी दी जाएगी।
राज्य मंत्री बेदी ने बताया कि बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालय और सरकारी कार्यालयों में खाली पदों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बाद विज्ञापन निकालकर आवेदन मांगे जाएंगे। साक्षात्कार की प्रक्रिया भी रहेगी। हालांकि इसमें विशेष राहत देते हुए प्रक्रिया पूरी कर नौकरी दी जाएगी। जिन पीड़ितों अथवा घायलों के परिजनों को मुआवजा नहीं मिला है, वे अपने आवेदन संबंधित जिलों के डीसी के पास तुरंत करें। कमेटी की अगली बैठक पांच अप्रैल को हरियाणा निवास चंडीगढ़ में ही शाम चार बजे होगी। जाट आंदोलनकारी फिलहाल इस बात से भी संतुष्ट हैं कि केंद्र में जाटों को आरक्षण देने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है।
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लगभग तीन घंटे चली बैठक में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुए समझौते को लागू करने पर गहन मंथन किया गया। बेदी के अलावा बैठक में रोहतक रेंज के आईजी नवदीप सिंह विर्क, आंदोलनकारियों के प्रतिनिधि एडवोकेट एसएस खरब और एडिशनल एडवोकेट जनरल कुलदीप तिवारी शामिल रहे। आंदोलन में मारे गए जाटों के आश्रितों को रोजगार देने के लिए आईएएस अधिकारी बृजेंद्र सिंह को कमेटी के साथ नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, वह मुख्य सचिव कार्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे। पहली बैठक में निर्णय लिया गया कि आंदोलन में मारे गए लोगों के आश्रितों को घर के आसपास पक्की नौकरी दी जाएगी।
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राज्य मंत्री बेदी ने बताया कि बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालय और सरकारी कार्यालयों में खाली पदों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बाद विज्ञापन निकालकर आवेदन मांगे जाएंगे। साक्षात्कार की प्रक्रिया भी रहेगी। हालांकि इसमें विशेष राहत देते हुए प्रक्रिया पूरी कर नौकरी दी जाएगी। जिन पीड़ितों अथवा घायलों के परिजनों को मुआवजा नहीं मिला है, वे अपने आवेदन संबंधित जिलों के डीसी के पास तुरंत करें। कमेटी की अगली बैठक पांच अप्रैल को हरियाणा निवास चंडीगढ़ में ही शाम चार बजे होगी। जाट आंदोलनकारी फिलहाल इस बात से भी संतुष्ट हैं कि केंद्र में जाटों को आरक्षण देने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है।
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