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जम्मू सेक्स स्कैंडल में सजा हुई, BSF के पूर्व डीआईजी समेत 5 को 10-10 साल की कैद
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 06 Jun 2018 04:02 PM IST
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जम्मू सेक्स स्कैंडल के आरोपी
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बहुचर्चित जम्मू सेक्स स्कैंडल केस में 12 साल बाद फैसला आया और बीएसएफ के पूर्व डीआईजी समेत 5 को सजा सुनाई गई है। साथ ही पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी और पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर को एक-एक लाख का जुर्माना लगाया गया है। तीन अन्य को 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
मामले में 30 मई को सीबीआई की विशेष अदालत ने बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर समेत पांच को दोषी करार दिया था। अन्य दोषियों में शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद, शब्बीर अहमद लान्गू शामिल हैं। दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद सभी को पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया।
अदालत ने उक्त पांचों को रणबीर पैनल कोड (आरपीसी) की धारा 376 के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और बिजनेसमैन मेहराजुद्दीन मलिक के खिलाफ आरोप साबित न कर पाने पर उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। वहीं, मामले में दो आरोपियों सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
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मामले में 30 मई को सीबीआई की विशेष अदालत ने बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर समेत पांच को दोषी करार दिया था। अन्य दोषियों में शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद, शब्बीर अहमद लान्गू शामिल हैं। दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद सभी को पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया।
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अदालत ने उक्त पांचों को रणबीर पैनल कोड (आरपीसी) की धारा 376 के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और बिजनेसमैन मेहराजुद्दीन मलिक के खिलाफ आरोप साबित न कर पाने पर उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। वहीं, मामले में दो आरोपियों सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
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अप्रैल 2006 में सामने आया था मामला
जसवंत सिंह गिल
अप्रैल 2006 में मामला उस समय चर्चा में आया, जब जम्मू-कश्मीर में एक पोर्न एमएमएस फैला था। सबीना नामक महिला पर हाई प्रोफाइल लोगों को देह व्यापार के लिए लड़कियां सप्लाई करने का आरोप था। इस काम में उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला पर भी आरोप लगा था। हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच 2006 में सीबीआई को सौंप दी गई थी।
साथ ही केस चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री गुलाम अहमद हसन मीर, स्वतंत्र विधायक रहे रमन मट्टू, बीएसएफ डीआईजी केसी पाड़ी, पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी, तत्कालीन डीएसपी श्रीनगर मोहम्मद मीर युसूफ, इकबाल खांडे, होटल मालिक रियाज अहमद कावा, हिलाल अहमद शाह, अबसार अहमद डार व एजाज अहमद भट्ट समेत सबीना और उसका पति अब्दुल हामिद बुल्ला आरोपी बनाए गए थे।
सीबीआई ने मुख्य केस में बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर, बिजनेसमैन मेहराजुद्दीन मलिक, शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद, शब्बीर अहमद लान्गू, सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला को आरोपी बनाया था।
साथ ही केस चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री गुलाम अहमद हसन मीर, स्वतंत्र विधायक रहे रमन मट्टू, बीएसएफ डीआईजी केसी पाड़ी, पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी, तत्कालीन डीएसपी श्रीनगर मोहम्मद मीर युसूफ, इकबाल खांडे, होटल मालिक रियाज अहमद कावा, हिलाल अहमद शाह, अबसार अहमद डार व एजाज अहमद भट्ट समेत सबीना और उसका पति अब्दुल हामिद बुल्ला आरोपी बनाए गए थे।
सीबीआई ने मुख्य केस में बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर, बिजनेसमैन मेहराजुद्दीन मलिक, शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद, शब्बीर अहमद लान्गू, सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला को आरोपी बनाया था।
अनैतिक व्यापार निवारण और आईटी एक्ट के तहत आरोप नहीं हुए साबित
जम्मू सेक्स स्कैंडल के आरोपी
सीबीआई ने जुलाई 2006 में केसी पाड़ी, अनिल सेठी, मोहम्मद अशरफ मीर, मेहराजुद्दीन मलिक, शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद और शब्बीर अहमद लान्गू के खिलाफ आरपीसी की धारा 376, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 3, 4, 5 और आईटी एक्ट 67 के तहत केस दर्ज किया था। अदालत ने पांचों दोषियों को केवल आरपीसी की धारा 376 के दोषी पाया। अन्य धाराओं के तहत अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका।
ये लोग हो चुके हैं सप्लीमेंटरी केसों में बरी
- पूर्व मंत्री रमन मट्टू
- पूर्व मुख्य सचिव मोहम्मद इकबाल खांडे
- जम्मू-कश्मीर के पूर्व एसपी मोहम्मद युसूफ मीर
- इम्पीरियल होटल में वेश्यावृत्ति कराने का आरोपी उसका मालिक रियाज अहमद कावा
- पुलिस अधिकारी अबसार अहमद डार
- हिलाल अहमद शाह और गुलाम अहमद मीर
ये लोग हो चुके हैं सप्लीमेंटरी केसों में बरी
- पूर्व मंत्री रमन मट्टू
- पूर्व मुख्य सचिव मोहम्मद इकबाल खांडे
- जम्मू-कश्मीर के पूर्व एसपी मोहम्मद युसूफ मीर
- इम्पीरियल होटल में वेश्यावृत्ति कराने का आरोपी उसका मालिक रियाज अहमद कावा
- पुलिस अधिकारी अबसार अहमद डार
- हिलाल अहमद शाह और गुलाम अहमद मीर
एक पीड़िता की गवाही ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
इलाहाबाद हाईकोर्ट
साल 2006 में सामने आए जेएंडके सेक्स स्कैंडल की जांच के दौरान सीबीआई को केस में चार पीड़िताएं मिलीं। केस में कई हाईप्रोफाइल लोग जुड़े हुए थे। इस वजह से ट्रायल के दौरान सभी पीड़िताओं को जान का खतरा था। शायद इसी का नतीजा था कि पूरी सुरक्षा देने के बावजूद तीन पीड़िताएं ट्रायल के दौरान मुकर गई थीं, लेकिन एक नाबालिग ने सभी दोषियों के खिलाफ खुलकर गवाही दी।
उसी नाबालिग पीड़िता की गवाही ही बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर (एनकाउंटर स्पेशलिस्ट), शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद और शब्बीर अहमद लान्गू को दोषी करार देने में अहम साबित हुई। हालांकि, तत्कालीन एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और व्यापारी मेहराजुद्दीन मलिक को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जिस समय एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी को गिरफ्तार किया गया था, उस समय उनका नाम हाईकोर्ट जज के लिए प्रस्तावित किया गया था।
सीबीआई ने केस की जांच के दौरान नौ लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला को मास्टरमाइंड बताया था। हालांकि, केस के ट्रायल के दौरान दोनों की मौत हो गई। सीबीआई के अनुसार यह दोनों वेश्यावृत्ति के लिए दोषियों और आरोपियों को लड़कियां सप्लाई करते थे। इसके बाद सीबीआई ने उनकी निशानदेही पर एक-एक कर सभी आरोपियों/दोषियों को गिरफ्तार किया था। सिर्फ एक आरोपी एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी गिरफ्तारी से पहले फरार हो गया था। हालांकि, बाद में उसने सीजेएम कोर्ट श्रीनगर में सरेंडर कर दिया था।
उसी नाबालिग पीड़िता की गवाही ही बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर (एनकाउंटर स्पेशलिस्ट), शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद और शब्बीर अहमद लान्गू को दोषी करार देने में अहम साबित हुई। हालांकि, तत्कालीन एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और व्यापारी मेहराजुद्दीन मलिक को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जिस समय एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी को गिरफ्तार किया गया था, उस समय उनका नाम हाईकोर्ट जज के लिए प्रस्तावित किया गया था।
सीबीआई ने केस की जांच के दौरान नौ लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला को मास्टरमाइंड बताया था। हालांकि, केस के ट्रायल के दौरान दोनों की मौत हो गई। सीबीआई के अनुसार यह दोनों वेश्यावृत्ति के लिए दोषियों और आरोपियों को लड़कियां सप्लाई करते थे। इसके बाद सीबीआई ने उनकी निशानदेही पर एक-एक कर सभी आरोपियों/दोषियों को गिरफ्तार किया था। सिर्फ एक आरोपी एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी गिरफ्तारी से पहले फरार हो गया था। हालांकि, बाद में उसने सीजेएम कोर्ट श्रीनगर में सरेंडर कर दिया था।
पीड़िता को 200 से 300 रुपये मिलते थे
court
अदालत में दिए बयान में पीड़िता ने कहा था कि, वह एक राजमिस्त्री की बेटी है। उसकी मां घर पर ही एंब्रायड्री का काम करती थी। उसके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे। उनकी कोई नियमित कमाई नहीं थी, लेकिन दोनों की कमाई से घर का खर्च चल जाता था। पीड़िता के अनुसार उसे सबीना ने वेश्यावृति में धकेला था। इसके लिए वह उसे 200-300 रुपये ही देती थी। वहीं, कई बार तो वह उसे पैसे भी नहीं देती थी। पैसे मांगने पर वह उसे धमकाती थी कि अगर उसने पैसे मांगे तो वह उसके वीडियो वायरल कर देगी। उसकी मां कभी-कभी सबीना के घर पर काम भी करती थी। पीड़िता के बयान के अनुसार कई बार दोषियों ने उसके साथ दुराचार भी किया। दो दोषियों ने तो उसका वीडियो भी बनाया था। इसके बाद वह उसे वही वीडियो दिखाकर उसे वायरल करने के नाम पर उसे धमकाकर उससे दुराचार करते थे।
पीड़िता और गवाहों की पहचान छिपाने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल
मामले में पीड़िता नाबालिग थी और सभी आरोपी हाईप्रोफाइल। इसलिए केस में गवाही के दौरान इसका खास ध्यान रखा गया। केस की अधिकतर सुनवाई बंद कमरे में हुई। वहीं पीड़िता और सरकारी गवाहों के नाम उजागर न हो, इसके लिए तक सीबीआई ने चार्जशीट में उनके नाम की जगह कोड वर्ड का इस्तेमाल किया। पीड़िता की जान को खतरा देखते हुए उसे सीबीआई ने सुरक्षा मुहैया करवाई थी।
किसी के चेहरे पर निराशा तो किसी के खुशी के आंसू
सीबीआई अदालत की ओर से मामले में फैसला सुनाए जाते समय जब अदालत ने दोषियों को आईटी एक्ट और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 3, 4, 5 के तहत बरी किया तो उनके चेहरों पर सुकून था, लेकिन जैसे ही अदालत ने पांच को आरपीसी की धारा 376 के तहत दोषी करार दिया तो वह एकदम से सकते में आ गए। इसके बाद अदालत ने उन्हें कस्टडी में लेने के आदेश दिए तो उनके चेहरों पर निराशा छा गई। अदालत से बरी होने के बाद एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और मेहराजुद्दीन की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। दोनों परिचितों को गले लगकर अपनी खुशी को बांटते दिखे।
पीड़िता और गवाहों की पहचान छिपाने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल
मामले में पीड़िता नाबालिग थी और सभी आरोपी हाईप्रोफाइल। इसलिए केस में गवाही के दौरान इसका खास ध्यान रखा गया। केस की अधिकतर सुनवाई बंद कमरे में हुई। वहीं पीड़िता और सरकारी गवाहों के नाम उजागर न हो, इसके लिए तक सीबीआई ने चार्जशीट में उनके नाम की जगह कोड वर्ड का इस्तेमाल किया। पीड़िता की जान को खतरा देखते हुए उसे सीबीआई ने सुरक्षा मुहैया करवाई थी।
किसी के चेहरे पर निराशा तो किसी के खुशी के आंसू
सीबीआई अदालत की ओर से मामले में फैसला सुनाए जाते समय जब अदालत ने दोषियों को आईटी एक्ट और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 3, 4, 5 के तहत बरी किया तो उनके चेहरों पर सुकून था, लेकिन जैसे ही अदालत ने पांच को आरपीसी की धारा 376 के तहत दोषी करार दिया तो वह एकदम से सकते में आ गए। इसके बाद अदालत ने उन्हें कस्टडी में लेने के आदेश दिए तो उनके चेहरों पर निराशा छा गई। अदालत से बरी होने के बाद एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और मेहराजुद्दीन की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। दोनों परिचितों को गले लगकर अपनी खुशी को बांटते दिखे।
दोषी करार होने के बाद भी रौब नहीं हुआ कम
COURT
सीबीआई की विशेष अदालत की ओर से पूर्व डीआईजी बीएसएफ केसी पाड़ी और जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर को दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत ने पुलिस कस्टडी में लेने के आदेश दे दिए। सीबीआई कर्मियों ने उन्हें कस्टडी में लेना चाहा तो वह मोबाइल लेकर कॉल करने लगे। इस पर उन्हें रोका गया तो डीआईजी उन्हें अपने पद का रौब दिखाते रहे। वहीं, डीएसपी भी खुद को ‘एसपी हूं एसपी’ कहते हुए सीबीआई कर्मियों पर दबाव बनाने का प्रयास करने लगे। इस पर सीबीआई कर्मियों ने अदालत के फैसले के बाद उन्हें सिर्फ दोषी बताया और उन्हें कस्टडी में ले लिया।
डीएसपी और होटल मालिक हाल ही में हुए थे बरी
सीबीआई की विशेष अदालत ने सप्लीमेंटरी मामले में तत्कालीन डीएसपी श्रीनगर मोहम्मद मीर युसूफ को सबूतों अभाव में इसी साल फरवरी में बरी किया था। मीर पर मुख्य आरोपी सबीना और उसके पति द्वारा चलाए जा रहे सेक्स रैकेट की एक नाबालिग के यौन शोषण का आरोप लगा था। ट्रायल के दौरान पीड़िता के बयान से मुकरने के बाद अदालत ने मीर युसूफ को बरी कर दिया था। वहीं पिछले साल अदालत मामले में आरोपी होटल मालिक रियाज अहमद कावा को भी सबूतों के अभाव में बरी कर चुकी है। होटल मालिक रियाज पर होटल में देह व्यापार करने का आरोप था। सीबीआई ने उसके खिलाफ अनैतिक तस्करी अधिनियम की रोकथाम के धारा 3 के तहत केस दर्ज किया था।
डीएसपी और होटल मालिक हाल ही में हुए थे बरी
सीबीआई की विशेष अदालत ने सप्लीमेंटरी मामले में तत्कालीन डीएसपी श्रीनगर मोहम्मद मीर युसूफ को सबूतों अभाव में इसी साल फरवरी में बरी किया था। मीर पर मुख्य आरोपी सबीना और उसके पति द्वारा चलाए जा रहे सेक्स रैकेट की एक नाबालिग के यौन शोषण का आरोप लगा था। ट्रायल के दौरान पीड़िता के बयान से मुकरने के बाद अदालत ने मीर युसूफ को बरी कर दिया था। वहीं पिछले साल अदालत मामले में आरोपी होटल मालिक रियाज अहमद कावा को भी सबूतों के अभाव में बरी कर चुकी है। होटल मालिक रियाज पर होटल में देह व्यापार करने का आरोप था। सीबीआई ने उसके खिलाफ अनैतिक तस्करी अधिनियम की रोकथाम के धारा 3 के तहत केस दर्ज किया था।