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Jalandhar West By Election: वेस्ट में स्विंगर वोट तय करता है विधायक, एक पार्टी के साथ नहीं जुड़ा है वोटर

Thu, 11 Jul 2024 01:38 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 11 Jul 2024 01:38 PM IST
सार

जालंधर वेस्ट का हलके पहले साउथ के नाम से जाना जाता था जिसमें जमशेर गांव तक थे। इस सीट पर केपी परिवार का दबदबा रहा लेकिन 1997 के बाद से स्विंग वोटरों ने हरेक प्रत्याशी का गणित खराब किया।

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Jalandhar West By Election voting never goes in favor of one party
जालंधर वेस्ट विधानसभा उपचुनाव - फोटो : फाइल

विस्तार

जालंधर वेस्ट के उपचुनाव संपन्न हो गए हैं और सभी को 13 जुलाई का इंतजार है। जालंधर वेस्ट का इतिहास अलग ही रहा है। यहां पर मतदान कभी एक पार्टी के पक्ष में नहीं जाता बल्कि हर चुनावों में वोट स्विंग करता है। यही स्विंगर तय करता है कि उनके हलके का विधायक कौन होगा। 

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वेस्ट हलके के वोटरों ने दिग्गजों को भी पटखनी देकर अपना दबदबा हमेशा बनाकर रखा है। हालात यह हैं कि पिछले तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा, कांग्रेस व आप सीट को जीत चुकी है। इस सीट से पीपीसीसी के पूर्व प्रधान, पूर्व सांसद मोहिंदर केपी तक चुनाव हार चुके हैं। हर विधानसभा चुनावों में वोटर स्विंग होता है जो जीत-हार का फैसला करता है।
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जालंधर वेस्ट का हलके पहले साउथ के नाम से जाना जाता था जिसमें जमशेर गांव तक थे। इस सीट पर केपी परिवार का दबदबा रहा लेकिन 1997 के बाद से स्विंग वोटरों ने हरेक प्रत्याशी का गणित खराब किया। 1992 में साउथ सीट से दर्शन सिंह केपी जीते थे, लेकिन आतंकियों ने उनका कत्ल कर दिया तो उनके बेटे मोहिंदर केपी उपचुनाव जीत गए। 
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1997 में मोहिंदर केपी जालंधर साउथ सीट से हार गए और यहां से भाजपा के भगत चुन्नी लाल जीतकर आ गए। वहीं, 2002 में वोटरों ने फिर रूख पलटा और मोहिंदर सिंह केपी को जीता दिया और भगत चुन्नी लाल को हरा दिया। 2007 में परिसीमन में जालंधर साउथ का नाम वेस्ट कर दिया गया और कई गांव काटकर कैंट हलके में जोड़ दिए गए।

2007 में फिर से भगत चुन्नी लाल भाजपा की सीट पर जीत गए और उनको 50 फीसदी मत मिले जबकि उनके विरोधी मोहिंदर केपी को 39.5 मत हासिल हुए। 2012 में केपी खुद चुनाव नहीं लड़ सके क्योंकि वह सांसद थे और उनकी पत्नी सुमन केपी ने चुनाव लड़ा, जिसको लेकर कांग्रेस के भीतर परिवारवाद का रोष पनप गया। इसका फायदा चुन्नी लाल को हुआ और उनका मत प्रतिशत 51.3 फीसदी हो गया। वह आसानी से सीट जीत गए। 2017 में भाजपा प्रत्याशी मोहिंदर भगत व कांग्रेस से सुशील रिंकू मैदान में थे और 17 प्रतिशत वोट स्विंग हो गया। 2012 में 51.3 पर रहने वाली भाजपा 33.4 पर आ गयी जबकि कांग्रेस 50 फीसदी के करीब पहुंच गई।

2022 में आप की एंट्री हो गई और आप के शीतल अंगुराल की तरफ स्विंगर वोट आ गया। कांग्रेस का 19.6 फीसदी मत खिसक कर आप की तरफ गया और भाजपा का 4.5 फीसदी। इसका फायदा आप को हो गया। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में स्विंगर वोट कांग्रेस की तरफ आ गया, जिसमें चन्नी को जालंधर वेस्ट से फायदा मिला और वह जीत गए।

दरअसल, वेस्ट हलके में जातीय समीकरण भी काफी मायने रखते हैं जिसमें भगत बिरादरी के अलावा रविदासिया व वाल्मीकि समाज के लोग हैं। यही वजह रही कि मौजूदा आप उम्मीदवार मोहिंदर भगत के पिता भगत चुन्नी लाल तीन बार विधायक बनकर पंजाब में मंत्री व विधायक दल के नेता बन चुके हैं।

सरकार उसी की बनती है, जिसको वेस्ट विधायक बनाती है

1992 में बेअंत सिंह की सरकार बनी थी तो वेस्ट से कांग्रेस के दर्शन केपी जीते थे। 1997 में प्रकाश सिंह बादल की सरकार बनी तो वेस्ट से भाजपा अकाली दल के उम्मीदवार भगत चुन्नी लाल जीते थे। 2002 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी तो कांग्रेस से मोहिंदर केपी जालंधर वेस्ट से विधायक बने। 



2007 में अकाली दल की सरकार बनी तो भाजपा अकाली उम्मीदवार भगत चुन्नी लाल जीते थे। 2012 में फिर से अकाली सरकार बनी तो भाजपा अकाली दल के उम्मीदवार भगत चुन्नी लाल जीते थे। 2017 में कांग्रेस की कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी तो यहां से कांग्रेस के रिंकू जीते थे। 2022 में आप की सरकार बनी तो आप के विधायक शीतल अंगुराल जीते थे।

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