{"_id":"1f58b27167ba3d13a0122255f01c0e2f","slug":"jaitley-election-campaign-ignore-sidhu-group","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेटली की मुश्किलें बढ़ाएगी ये नजरअंदाजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेटली की मुश्किलें बढ़ाएगी ये नजरअंदाजी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 31 Mar 2014 02:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमृतसर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने कड़े मुकाबले में फंसे भाजपा के राष्ट्रीय नेता अरुण जेटली के लिए आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
विज्ञापन
एक ओर जहां कैप्टन अमरिंदर भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू को टिकट न मिलने बारे सहानुभूति भरी बयानबाजी कर स्थानीय लोगों में भाजपा के प्रति गुस्सा भरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भाजपा आलाकमान ने जेटली के चुनाव प्रचार में नवजोत सिद्धू के स्थानीय समर्थक नेताओं को नजरअंदाज कर दिया है।
विज्ञापन
हालत यह है कि सिद्धू गुट के ज्यादातर नेता अपने घरों में ही बैठे हैं। पार्टी की ओर से उन्हें चुनाव अभियान बारे कोई सूचना तक नहीं दी जा रही।
नवजोत सिद्धू का टिकट काटे जाने के बाद भाजपा आलाकमान ने उनकी जगह अरुण जेटली को दिल्ली से लाकर चुनाव में उतारा है। बाहरी प्रत्याशी होने के कारण जेटली को पार्टी की स्थानीय इकाई से जिस सहयोग की अपेक्षा है,
विज्ञापन
वह उन्हें नहीं मिल रहा। सूत्रों के मुताबिक, जेटली को प्रदेश नेतृत्व पर काबिज गुट के चंद नेताओं ने हाईजैक कर लिया है। पार्टी के आम वर्कर जेटली तक पहुंच ही नहीं पा रहे। देहाती जिला प्रधान राम शरण तक को जेटली से नहीं मिलने दिया गया। जेटली ने भी अपनी ओर से सिद्धू गुट के लोगों की सार नहीं ली।
सिद्धू गुट के प्रमुख नेताओं में पूर्व जिला प्रधान आनंद शर्मा, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन संजीव खन्ना, उपप्रधान जुगल किशोर गुमटाला, सोमदेव शर्मा का शहर में काफी प्रभाव है। लेकिन इनमें से कोई नेता भी अभी तक चुनाव प्रचार को नहीं निकला है।
इन्हें कोई जिम्मेदारी सौंपना तो दूर, जेटली के चुनाव कार्यक्रम की सूचना तक नहीं दी जा रही है। सिर्फ पूर्व मेयर श्वेत मलिक ही जेटली के साथ चल रहे हैं।
सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर प्रचार तो कर रही हैं, लेकिन काफी सीमित समय ही दे रही है। वहीं, सिद्धू ने खुद भी अमृतसर में चुनाव प्रचार न करके वर्करों को मैसेज दे दिया है। तीन बार अमृतसर से जीतने वाले सिद्धू के समर्थकों को चुनाव में पूरी तरह नजरंदाज करना जेटली की राह मुश्किल कर सकता है।
भाजपा ने अब तक नहीं की कोई रैली
अमृतसर में अरुण जेटली पूरी तरह अकालियों केसहारे दिखाई दे रहे हैं। जेटली के पक्ष में अब तक दो चुनावी रैलियां हुई हैं, दोनों ही अकालियों ने की हैं। पहली अटारी और दूसरी रविवार को मजीठा हलके में हुई। सारी शहरी सीटों पर काबिज भाजपा के नेता अब तक कोई रैली नहीं कर सके हैं।