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Hindi News ›   Chandigarh ›   Jagdish Jhinda about Akal Takht and Avtar Singh Makkar

'मैं नहीं, मक्कड़ कर रहे अकाल तख्त की नाफरमानी'

Fri, 04 Jul 2014 09:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल Updated Fri, 04 Jul 2014 09:16 PM IST
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Jagdish Jhinda about Akal Takht and Avtar Singh Makkar

हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहॉक) के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि अकाल तख्त के आदेशों की नाफरमानी वे नहीं, बल्कि एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ कर रहे हैं।

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श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा भेजी गई 10 सदस्यीय कमेटी का उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर पूरा आदर एवं सत्कार किया। उनके साथ हुई बातचीत में जो तय हुआ था, उसके तहत छह जुलाई तक कोई बयानबाजी नहीं होनी थी।
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कमेटी ने कहा था कि वे अपनी रिपोर्ट अकाल तख्त साहब को सौंप देंगे। इसके बाद कोई वक्तव्य जारी किया जाएगा। लेकिन जब यह कमेटी उनके साथ कुरुक्षेत्र में मीटिंग कर रही थी, उसी समय एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कैथल में विरोध करके सिखों को बांटने का प्रयास किया। शुक्रवार को कुरुक्षेत्र में भी इस संबंध में विरोध किया गया, जो की अकाल तख्त साहब के आदेशों की नाफरमानी है।
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मैंने पेश होने के लिए समय मांगा है : झींडा

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‘अमर उजाला’ से दूरभाष पर उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त पर पेश होने संबंधी निर्देशों पर उन्होंने कोई नाफरमानी नहीं की है। उन्होंने समय मांगा था कि वे छह जुलाई तक व्यस्त हैं।

श्री अकाल तख्त की ओर से उनसे मिलने के लिए कमेटी भेजी थी, जिसका पूरा आदर और सत्कार किया गया। कमेटी सदस्यों को बताया गया कि यह हरियाणा के सिखों का संवैधानिक अधिकार है।

उन्होंने एसजीपीसी की ओर से सब कमेटी अथवा अन्य किसी प्रस्ताव की बात पर कहा कि एसजीपीसी अध्यक्ष स्वयं अब कुछ देने की स्थिति में नहीं हैं। हरियाणा के सिखों के संबंध में हरियाणा के सीएम ही फैसला ले सकते हैं।

इसके अलावा झींडा ने बताया कि छह जुलाई के सम्मेलन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। बसों के माध्यम से लोगों को पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं की ड्यूटियां लगाई जा रही हैं। वे शनिवार को कैथल में आयोजन स्थल का दौरा करेंगे।

विवेक से काम लें हरियाणा के सिख

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हरियाणा की अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाए जाने को लेकर उठ रही आवाज में श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से पूरी तरह हस्तक्षेप शुरू हो गया है।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने हरियाणा के सिखों से अपील की है कि हरियाणा के सिख हमारे बुजुर्गों की हजारों कुर्बानियां देकर बनाई गई शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को तोड़े जाने की साजिशों का किसी भी कीमत पर शिकार न हों। हरियाणा के सिखों को अपने विवेक से काम लेते हुए अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गठित किए जाने का समर्थन नहीं करना चाहिए।

विरोधी करते रहे हैं कमजोर करने की साजिश

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जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि सिखों की शक्ति को कमजोर करने के लिए विरोधियों की ओर से हमेशा ही साजिशें की जाती रही है। इसी के चलते पटना साहिब बोर्ड और हजूर साहिब बोर्ड का भी सिखों की शक्ति को कमजोर करने के लिए सिख विरोधी शक्तियां इस्तेमाल करती रही हैं।

अब हरियाणा में अलग से गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन करके यही शक्तियां सिखों की एकता के खिलाफ इसका उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि जो जायदाद हमारे बुजुर्गों में बनाई हो, उसको विभाजित नहीं करना चाहिए बल्कि इसमें वृद्धि करनी चाहिए। कुछ लोग सिख विरोधी शक्तियों के हाथों में खेल कर एसजीपीसी को आर्थिक और राजनीतिक रूप में कमजोर करने में लगे हुए है।

एसजीपीसी अध्यक्ष नहीं हैं मक्कड़ : सरना

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दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा कि खुद को एसजीपीसी का अध्यक्ष कहने वाले अवतार सिंह मक्कड़ एसजीपीसी के अध्यक्ष ही नहीं हैं। वह तो सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसजीपीसी के केयर टेकर नियुक्त किए गए हैं।

ऐसे में मक्कड़ को हरियाणा के सिखों की ओर से अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मामले में बोलने और हस्तक्षेप करने का कोई भी कानूनी अधिकार नहीं है।

हरियाणा के सिख पिछले दस साल से अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाए जाने की मांग करते आ रहे हैं। उनकी मांग सही है इसलिए उनकी इस लोकतांत्रिक मांग को स्वीकार होना चाहिए। मक्कड़ इस समय सिख कौम विरोधी भूमिका निभाते हुए सिखों में टकराव वाली स्थिति पैदा कर रहे है।

सिर्फ केयर टेकर हैं अवतार

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सरना ने कहा कि जिन लोगों के अपने घर शीशे के होते हैं, उनको कभी भी दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। मक्कड़ को भी समझ लेना चाहिए कि वह खुद एसजीपीसी में रह कर क्या करते आ रहे हैं जिस कारण मजबूर होकर हरियाणा के सिखों को अलग कमेटी का गठन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

वहीं मक्कड़ को किसी अन्य संस्था के अंदर दखलंदाजी करने करने का भी कोई अधिकार नहीं है। अगर अलग कमेटी बनाने का अधिकार दुनिया भर के अलग-अलग देशों में रहने वाले सिखों और अन्य राज्यों में रहने वाले सिखों को है तो फिर यह अधिकार हरियाणा के सिखों को क्यों नही है।

उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से भी अपील की है कि वह बादल और उनके साथियों की राजनीतिक चालों का शिकार न हो, बल्कि खुद अलग हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को स्वीकृति प्रदान करें। इसके लिए जल्दी ही सरबत खालसा बुलाया जाना चाहिए।

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