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चुनौती : हरियाणा के लिए आसान नहीं इस बार बिजली संकट से पार पाना, केवल 15 दिन का कोयला बचा

Thu, 14 Apr 2022 05:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 14 Apr 2022 05:02 AM IST
सार

प्रदेश में कोयले का 15 दिन का स्टॉक ही बचा, रोजाना 15 रैक की जरूरत, मिल रहे दस। अडानी और टाटा कंपनी से शुरू नहीं हो पाई बिजली आपूर्ति। 

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It is not easy for Haryana to overcome the power crisis this time
demo pic... - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हरियाणा सरकार के लिए इस बार बिजली संकट से पार पाना आसान नहीं है। एक तो अडानी और टाटा कंपनियों से करार होने के बावजूद बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। दूसरा विदेशी कोयले के रेट बढ़ने से नई दरों को लेकर पेंच फंसा हुआ है और प्रदेश में कोयले का संकट भी गहराने लगा है। हरियाणा सरकार के पास मात्र 15 दिन का कोयला स्टॉक ही शेष है। अगर आगामी कुछ दिनों में कोयले की आपूर्ति नहीं बढ़ी तो बिजली संकट और बढ़ सकता है। 

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इस समय प्रदेश में रोजाना 8 हजार मेगावाट बिजली की मांग चल रही है। इसे पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने अपने सभी पावर प्लांटों को चला दिया है। इनमें पानीपत की तीनों इकाई, यमुनानगर की दोनों और खेदड़ की एक यूनिट को चलाया गया। इन प्लांटों को सुचारू रूप से चलाने के लिए रोजाना 15 रैक कोयले की जरूरत है। जबकि हरियाणा को मिल 10 रैक ही रहे हैं। ऐसे में पहले स्टॉक कोयले का इस्तेमाल किया जा रहा है। यही स्थिति रही तो प्रदेश में मात्र 15 दिन का कोयला स्टॉक ही शेष है। स्थिति को देखते हुए हरियाणा सरकार ने केंद्रीय बिजली मंत्री को कोयला आपूर्ति बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है।
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गुजरात की तर्ज पर हरियाणा से नई दरें चाह रही कंपनी
अडानी की कंपनी गुजरात की तर्ज पर हरियाणा से नई बिजली दरें चाह रही है। कंपनी ने सरकार को 3.40 रुपये की बजाए 6.25 रुपये प्रति यूनिट की नई दरों का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पावर परचेज एग्रीमेंट के तहत यह संभव नहीं है। कंपनी का तर्क है कि विदेशी कोयला महंगा होने के चलते उनको हजारों करोड़ का घाटा हुआ है। इसलिए वह अब प्लांट नहीं चला सकती। इसलिए विदेशी कोयले की बढ़ी दरों के लिए सरकार अतिरिक्त चार्ज दे, इसके बाद ही बिजली सप्लाई शुरू हो पाएगी। कंपनी का तर्क है कि गुजरात सरकार ने भी नई दरें लागू की हैं। फिलहाल हरियाणा सरकार कंपनी के साथ कम से कम रेट के लिए मोल भाव कर रही है। गौर हो कि अडानी से 1424 मेगावाट और टाटा की कंपनी से 500 मेगावाट बिजली का करार है। 
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इस समय ये चल रहीं यूनिट
पानीपत थर्मल प्लांट
यूनिट 6 -210 मेगावाट
यूनिट 7- 250
यूनिट 8 -250

दीनबंधु छोटूराम यमुनानगर प्लांट
यूनिट 1-300
यूनिट 2- 300

राजीव गांधी थर्मल प्लांट खेदड़ हिसार
यूनिट 1- 600
डब्ल्यूवाईसी हाईडल 62.4 मेगावाट
सोलर पावर प्लांट पानीपत  : 10 मेगावाट
शेष बिजली केंद्रीय पुल से 12 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदी जा रही है।

10 प्रतिशत तक विदेशी कोयला खरीदेगी सरकार 
कोयले की कमी को लेकर हरियाणा सरकार इस बार कुल खपत का 10 प्रतिशत तक विदेशी कोयला खरीदने की तैयारी में है। पहले यह चार प्रतिशत था, लेकिन केंद्रीय मंत्रालय के निर्देशों के बाद इसे अधिक किया गया है। यह घरेलू कोयले से महंगा होता है, लेकिन इसकी गुणवत्ता अच्छी होती है। इसके लिए प्रदेश सरकार टेंडर निकालने जा रही है ताकि गर्मी के पीक सीजन में प्रदेश को कोयले की कमी का सामना न करना पड़े। 


केंद्रीय मंत्रालय को कोयले की अधिक आपूर्ति के लिए पत्र लिखा है। हरियाणा सरकार हर लिहाज से तैयारी कर रही है, जहां तक अडानी और टाटा कंपनी से बिजली सुचारू कराने की बात है, इसको लेकर मोलभाव चल रहा है। जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। 
- पीके दास, एसीएस, बिजली विभाग

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