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जीवन में मन को समझाना मुश्किल: कथा व्यास
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चंडीगढ़। जीवन में मन को समझाना बहुत ही मुश्किल है। जो व्यक्ति मन पर नियंत्रण पा लेता है उसे फिर किसी भी प्रकार का डर भय नहीं रहता। आप कथा में जो भी भाव लेकर आते है वह वही कृपा लेकर जाते हैं। यह प्रवचन सेक्टर-32 के प्राचीन श्री हनुमान मंदिर में कथा व्यास डॉ. संत स्वामी राम तीर्थ महाराज ने भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को दिया।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अभिवादनशील बनना चाहिए। अभिवादनशील मनुष्य की चार चीजें आयु, विद्या, यश और बल बढ़ता है। मंदिर के प्रधान संजीव कुमार ने बताया कि प्रवचन सुनने के लिए ट्राई सिटी के भक्त रोजाना मंदिर में पहुंच रहे हैं।
सेक्टर-40 के श्री राधा कृष्ण मंदिर में कथा व्यासा उद्धव कौदंड प्रवचन कर रहे हैं। कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत को जीवन जीने की एक अद्भुत शैली बताया। उन्होंने कहा कि यह महापुराण वैष्णवों का मुकुटमणि है। भगवान् श्रीकृष्ण का शब्दमय विग्रह, आध्यात्मिक रस की अलौकिक प्यास, असंतुष्ट जीवन को शांति प्रदान करने वाला दिव्य अमृत रस है। कथा के दौरान उन्होंने वामन भगवान के चरित्र का उल्लेख किया।
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कथा में बताया कि बालक ध्रुव जिन्हें पिता का स्नेह नहीं मिला, उन्होंने माता की प्रेरणा से वन में जाकर कठोर तपस्या की। उनकी निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान श्रीहरि विष्णु प्रकट हुए और उन्हें अमर ध्रुवपद प्रदान किया। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और सच्ची भक्ति से ईश्वर अवश्य प्रसन्न होते हैं। मंदिर सभा के प्रधान बीपी अरोड़ा और महासचिव विनय कपूर मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अभिवादनशील बनना चाहिए। अभिवादनशील मनुष्य की चार चीजें आयु, विद्या, यश और बल बढ़ता है। मंदिर के प्रधान संजीव कुमार ने बताया कि प्रवचन सुनने के लिए ट्राई सिटी के भक्त रोजाना मंदिर में पहुंच रहे हैं।
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सेक्टर-40 के श्री राधा कृष्ण मंदिर में कथा व्यासा उद्धव कौदंड प्रवचन कर रहे हैं। कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत को जीवन जीने की एक अद्भुत शैली बताया। उन्होंने कहा कि यह महापुराण वैष्णवों का मुकुटमणि है। भगवान् श्रीकृष्ण का शब्दमय विग्रह, आध्यात्मिक रस की अलौकिक प्यास, असंतुष्ट जीवन को शांति प्रदान करने वाला दिव्य अमृत रस है। कथा के दौरान उन्होंने वामन भगवान के चरित्र का उल्लेख किया।
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कथा में बताया कि बालक ध्रुव जिन्हें पिता का स्नेह नहीं मिला, उन्होंने माता की प्रेरणा से वन में जाकर कठोर तपस्या की। उनकी निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान श्रीहरि विष्णु प्रकट हुए और उन्हें अमर ध्रुवपद प्रदान किया। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और सच्ची भक्ति से ईश्वर अवश्य प्रसन्न होते हैं। मंदिर सभा के प्रधान बीपी अरोड़ा और महासचिव विनय कपूर मौजूद रहे।