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जमींदारों के खिलाफ उठना मजदूरों का पड़ता है महंगा
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चंडीगढ़। सेक्टर 23 स्थित बाल भवन में टीएफटी की ओर से 15वें विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल के 12वें दिन शुक्रवार को डॉक्यूमेंटरी फिल्में, नुक्कड़ नाटक, रू-ब-रू, माइम वर्कशॉप लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। शाम को लेखिका मन्नू भंडारी और बलवंत ठाकुर के निर्देशन में नाटक ‘महाभोज’ उन खेतिहर मजदूरों के इर्द-गिर्द घूमता है, जो अपने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अपने जमींदार के क्रोध का खामियाजा भुगतते हैं। आगजनी की भीषण कार्रवाई में उनकी बस्तियों को जला दिया जाता है और 9 निर्दोष लोगों की जान चली जाती है। इसी बीच बीसू नामक एक उग्र युवक की हत्या कर दी जाती है और एक साहसिक आवाज का गला घोट दिया जाता है। बीसू की हत्या को सनसनीखेज बनाते हुए हर राजनीतिक दल इससे अधिक से अधिक लाभ अर्जित करने का प्रयास करता है क्योंकि चुनाव नजदीक है। मीडिया हर अनुपात में इस त्रासदी को बढ़ाता है।
हत्या के पीछे का षड्यंत्रकर्ता मुख्यमंत्री ‘डॉ. साहिब’ इस हत्या को अपने विरोधियों को चुप कराने और पार्टी के भीतर आंतरिक अशांति को दबाने के लिए एक हथियार के रूप में उपयोग करता है। बीसू की हत्या की नए सिरे से जांच के आदेश दिए जाते हैं। सत्ता की राजनीति अपना गंदा खेल एक बार फिर से खेलती है और सत्य एक हताहत बन जाता है। बीसू का एक दोस्त ‘बिंदा’ और न्याय के लिए लड़ रहे एक और शख्स को झूठा केस कर दर्ज करवाकर गिरफ्तार किया जाता है। नाटक मानव जाति के सत्ता हासिल करने के लिए घृणित वासना के साथ सभी बाधाओं के खिलाफ साहसपूर्वक खड़े होने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
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हत्या के पीछे का षड्यंत्रकर्ता मुख्यमंत्री ‘डॉ. साहिब’ इस हत्या को अपने विरोधियों को चुप कराने और पार्टी के भीतर आंतरिक अशांति को दबाने के लिए एक हथियार के रूप में उपयोग करता है। बीसू की हत्या की नए सिरे से जांच के आदेश दिए जाते हैं। सत्ता की राजनीति अपना गंदा खेल एक बार फिर से खेलती है और सत्य एक हताहत बन जाता है। बीसू का एक दोस्त ‘बिंदा’ और न्याय के लिए लड़ रहे एक और शख्स को झूठा केस कर दर्ज करवाकर गिरफ्तार किया जाता है। नाटक मानव जाति के सत्ता हासिल करने के लिए घृणित वासना के साथ सभी बाधाओं के खिलाफ साहसपूर्वक खड़े होने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
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