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Hindi News ›   Chandigarh ›   Issue of Chandigarh electricity department Privatisation raised in Loksabha 

संसद में सवाल : 365 करोड़ के लाभ में चंडीगढ़ बिजली विभाग, फिर भी निजीकरण क्यों, सरकार का जवाब- बेहतर सुविधा मिलेगी 

Fri, 26 Mar 2021 11:21 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 26 Mar 2021 11:21 AM IST
सार

  • लोकसभा में गूंजा चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा 
  • श्री आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने किया सवाल 
  • सरकार का जवाब, 2020-21 में चंडीगढ़ बिजली विभाग का लाभ है 365.11 करोड़ 

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Issue of Chandigarh electricity department Privatisation raised in Loksabha 
सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा उठाया। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा गुरुवार को लोकसभा में गूंजा। श्री आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के सवाल पर सरकार ने जवाब दिया कि साल 2020-21 में चंडीगढ़ बिजली विभाग का लाभ 365.11 करोड़ है। फिर सरकार इसे निजी कंपनी को क्यों सौंप रही है। इस पर ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह ने लिखित में जवाब दिया कि निजी कंपनी शहरवासियों को बेहतर सुविधा देगी। यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से लिया गया है। 

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निजीकरण का कारण सरकार ने उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देना बताया है। इसके अलावा सरकार ने चंडीगढ़ बिजली विभाग के पिछले तीन साल के राजस्व व पारेषण (ट्रांसमिशन) और वितरण लॉस के बारे में भी जानकारी दी है। इन सवालों के जवाब बीते दिनों केंद्र सरकार ने यूटी प्रशासन से मांगे थे।

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पिछले तीन साल में विभाग का लाभ हुआ चार गुना ज्यादा

संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार बिजली विभाग अधिशेष (सरप्लस) में है। पिछले तीन साल में लाभ करीब चार गुना हो गया है। साल 2018-19 में सभी तरह के खर्चों, कर्ज आदि को निकालने के बाद विभाग को 83.87 करोड़ का लाभ हुआ, जो 2019-20 में 254.73 करोड़ रुपये हो गया। यह लाभ वर्तमान वित्तीय वर्ष 2020-21 में बढ़कर 365.11 करोड़ का हो गया है। 

यूटी पावरमैन यूनियन के गोपाल दत्त जोशी ने बताया कि बीते साल प्रशासन ने एफपीपीसीए चार्जेस वसूल किए थे, जिसकी वजह से विभाग को काफी राजस्व प्राप्त हुआ। इसके अलावा पुरानी रिकवरी करने की वजह से भी लाभ बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने विभाग को हानि में दिखाने के लिए काफी कुछ किया है, बावजूद इसके विभाग ने अच्छा राजस्व प्राप्त किया है।

वर्ष                  टीएंडडी लॉस
                          लक्ष्य                               प्राप्ति
2017-18        12.75 प्रतिशत                9.51 प्रतिशत
2018-19        12.25 प्रतिशत                13.5 प्रतिशत
2019-20        9.40 प्रतिशत                11.91 प्रतिशत


दौड़ में अडानी समेत सात कंपनियां
बिजली विभाग को खरीदने के लिए जिन सात कंपनियों ने बोली जमा कराई है, उनमें अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी, एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड शामिल हैं।  सरकार की ओर से जिस भी कंपनी को नियुक्त किया जाएगा, उसके पास शहर में बिजली वितरण और रिटेल सप्लाई की जिम्मेदारी होगी।

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