{"_id":"574829e94f1c1b7562692413","slug":"interview-radiologist-interview-chandigarh-recruitment-recruitment-national-health-mission","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंटरव्यूः सैलरी सबसे ज्यादा, फिर भी नहीं आए रेडियोलाजिस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंटरव्यूः सैलरी सबसे ज्यादा, फिर भी नहीं आए रेडियोलाजिस्ट
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 27 May 2016 04:35 PM IST
विज्ञापन
स्वास्थ्य केंद्रों से रिलीव हो चुके कई एमबीबीएस डॉक्टरों को दोबारा वहीं सेवाएं देने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत चंडीगढ़ में 24 मई को गाइनेकोलाजिस्ट, पीडीएट्रिशन, रेडियोलॉजिस्ट और ईएमओ के पदों के लिए इंटरव्यू आयोजित किए गए। पीडिएट्रिशन और रेडियोलाजिस्ट के लिए दो साल के भीतर चौथी बार विज्ञापन निकाले गए, लेकिन दोनों पद के लिए चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग को डाक्टर नहीं मिल रहे हैं। मंगलवार को हुए इंटरव्यू में पीडिएट्रिशन के लिए सात पदों के लिए इंटरव्यू थे, लेकिन आए सिर्फ दो। जबकि रेडियोलॉजिस्ट के लिए एक भी डाक्टर का सलेक्शन नहीं हुआ। एक डाक्टर आए थे, लेकिन उनका मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया में रजिस्ट्रेशन नहीं था, इसलिए उन्हें वापस भेज दिया गया। हालांकि उनसे कहा गया है कि यदि उनका रजिस्ट्रेशन हो जाता है तो वे आकर ज्वाइन कर सकते हैं।
इसलिए नहीं कर रहे ज्वाइन
इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एनएचएम जो सैलरी आफर कर रहा है, उस पर कोई भी डाक्टर ज्वाइन नहीं करना चाहता। प्राइवेट हास्पिटल इससे दोगुनी सैलरी में उन्हें आफर देते हैं। पीडिएट्रिशन के लिए एनएचएम 62 हजार रुपये सैलरी दे रहा है, जबकि रेडियोलाजिस्ट के लिए 75 हजार, जबकि प्राइवेट में रेडियोलाजिस्ट को सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये तक सैलरी मिलती है। पीडिएट्रिशन को 80 से हजार। सरकारी अस्पतालों में काम का बोझ ज्यादा है,जबकि प्राइवेट में एक सीमा तय है। दूसरी तरफ सभी पोस्ट कांट्रैक्ट पर हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सामने क्या है समस्या
दरअसल चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग भी इसमें ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। ये सभी पोस्टें एनएचएम के तहत भरी जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग भी समझता है कि इतनी सैलरी में डाक्टरों का ज्वाइन करना मुश्किल है। विभाग की ओर से कई बार डाक्टरों की सैलरी बढ़ाने की सिफारिश की गई है, लेकिन उनकी सिफारिशे मंजूर नहीं की गई है। रेडियोलाजिस्ट की सिफारिश मानी गई, लेकिन वह मौजूदा स्थिति के लिए उपयुक्त नहीं है। पीडिएट्रिशन की सैलरी की सिफारिश इस बार की गई है, लेकिन अब तक मंजूरी के आदेश नहीं आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि सिफारिश मंजूर होती है तो डाक्टरों को बढ़ी हुई सैलरी के अनुसार नियुक्त किया जाएगा।
विज्ञापन
क्या आ रही हैं दिक्कते
रेडियोलॉजिस्ट नहीं आने से शहर के अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। मशीनें रखी-रखी खराब हो गईं, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाए। जब तक रेडियोलॉजिस्ट नहीं होंगे तब तक मशीनों का इस्तेमाल नहीं हो सकता। प्रेग्नेंट महिलाओं को प्राइवेट हास्पिटल में जाकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। इससे कभी भी कोई हादसा हो सकता है। इसी तरह से पीडिएट्रिशन नहीं होने से कई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
कहां कितनी पोस्टें
पोस्ट कितनी पोस्ट कितने आए
गाइनेकोलॉजिस्ट 11 09
पीडिएट्रिशन 07 02
रेडियोलाजिस्ट 03 00
ईएमओ 03 03
एलएमओ 05 05
सैलरी बढ़ाने की सिफारिश भेजी गई हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि जल्द ही इस पर मुहर लग जाएगी। अल्ट्रासाउंड की नई मशीनें आ गई हैं। उन्हें जल्द से जल्द स्थापित करवाया जाएगा। यदि रेडियोलॉजिस्ट नहीं आते हैं तो जीएमएसएच 16 के रेडियोलॉजिस्ट की कुछ सेवाएं ली जाएंगी। नए रेडियोग्राफर के पांच नए पदों की मंजूरी मिल चुकी है। मैं इतना कह सकती हूं कि अल्ट्रासाउंड जल्द से जल्द शुरू कर दिए जाएंगे।
- डा. वनीता गुप्ता, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज
विज्ञापन
इसलिए नहीं कर रहे ज्वाइन
इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एनएचएम जो सैलरी आफर कर रहा है, उस पर कोई भी डाक्टर ज्वाइन नहीं करना चाहता। प्राइवेट हास्पिटल इससे दोगुनी सैलरी में उन्हें आफर देते हैं। पीडिएट्रिशन के लिए एनएचएम 62 हजार रुपये सैलरी दे रहा है, जबकि रेडियोलाजिस्ट के लिए 75 हजार, जबकि प्राइवेट में रेडियोलाजिस्ट को सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये तक सैलरी मिलती है। पीडिएट्रिशन को 80 से हजार। सरकारी अस्पतालों में काम का बोझ ज्यादा है,जबकि प्राइवेट में एक सीमा तय है। दूसरी तरफ सभी पोस्ट कांट्रैक्ट पर हैं।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के सामने क्या है समस्या
दरअसल चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग भी इसमें ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। ये सभी पोस्टें एनएचएम के तहत भरी जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग भी समझता है कि इतनी सैलरी में डाक्टरों का ज्वाइन करना मुश्किल है। विभाग की ओर से कई बार डाक्टरों की सैलरी बढ़ाने की सिफारिश की गई है, लेकिन उनकी सिफारिशे मंजूर नहीं की गई है। रेडियोलाजिस्ट की सिफारिश मानी गई, लेकिन वह मौजूदा स्थिति के लिए उपयुक्त नहीं है। पीडिएट्रिशन की सैलरी की सिफारिश इस बार की गई है, लेकिन अब तक मंजूरी के आदेश नहीं आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि सिफारिश मंजूर होती है तो डाक्टरों को बढ़ी हुई सैलरी के अनुसार नियुक्त किया जाएगा।
विज्ञापन
क्या आ रही हैं दिक्कते
रेडियोलॉजिस्ट नहीं आने से शहर के अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। मशीनें रखी-रखी खराब हो गईं, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाए। जब तक रेडियोलॉजिस्ट नहीं होंगे तब तक मशीनों का इस्तेमाल नहीं हो सकता। प्रेग्नेंट महिलाओं को प्राइवेट हास्पिटल में जाकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। इससे कभी भी कोई हादसा हो सकता है। इसी तरह से पीडिएट्रिशन नहीं होने से कई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
कहां कितनी पोस्टें
पोस्ट कितनी पोस्ट कितने आए
गाइनेकोलॉजिस्ट 11 09
पीडिएट्रिशन 07 02
रेडियोलाजिस्ट 03 00
ईएमओ 03 03
एलएमओ 05 05
सैलरी बढ़ाने की सिफारिश भेजी गई हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि जल्द ही इस पर मुहर लग जाएगी। अल्ट्रासाउंड की नई मशीनें आ गई हैं। उन्हें जल्द से जल्द स्थापित करवाया जाएगा। यदि रेडियोलॉजिस्ट नहीं आते हैं तो जीएमएसएच 16 के रेडियोलॉजिस्ट की कुछ सेवाएं ली जाएंगी। नए रेडियोग्राफर के पांच नए पदों की मंजूरी मिल चुकी है। मैं इतना कह सकती हूं कि अल्ट्रासाउंड जल्द से जल्द शुरू कर दिए जाएंगे।
- डा. वनीता गुप्ता, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज