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गजब रिकार्ड, 16 घंटे में किडनी के 26 ऑपरेशन

Tue, 27 May 2014 06:36 PM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर Updated Tue, 27 May 2014 06:36 PM IST
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Interview of Recordist Doctor Rajesh Aggarwal

रांची में पिता का छोटा सा करियाने का व्यापार। कभी सोचा नहीं था कि ऐसे मध्यवर्गीय परिवार से निकलकर राजेश अग्रवाल पूरे विश्व में अपने नाम का डंका बजा देंगे। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर किडनी रोगों में पीजी व विशेषज्ञता हासिल करने वाले राजेश अब तक अपनी जिंदगी में 43 हजार आपरेशन कर चुके हैं।

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हाल ही में 16 घंटे में किडनी के 26 आपरेशन कर डॉ. राजेश अग्रवाल ने अपना नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज करवाया है। डॉ. राजेश अग्रवाल जालंधर में किडनी अस्पताल चलाते हैं लेकिन उनका अधिकतर वक्त जम्मू-कश्मीर, नोएडा, पठानकोट व देश के अन्य हिस्सों में निकलता है। वे वहां पर आपरेशन करने के लिए खास तौर पर बुलाए जाते हैं।
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बचपन में राजेश ने ठानी थी कि वे चिकित्सक बनेंगे। 1978 में बीएचयू में उन्होंने एमबीबीएस में दाखिल लिया। वहीं से मास्टर इन सर्जरी की। इसके बाद वह पुडुचेरी में अस्पताल में चले गए। जहां पर दो-तीन साल तक रहे और बाद में लखनऊ में संजय गांधी पीजीआई में एमसीएच की और साथ ही डिप्लोमा इन यूरोलॉजी एंड सर्जरी किया।
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1997 में राजेश किडनी के सर्जन बन चुके थे। वे देश में ऐसे स्थान की तलाश में थे, जहां पर मेडिकल साइंसेज के तमाम उपकरण व सामान आसानी से उपलब्ध हो सके, इसलिए उन्होंने जालंधर का रुख कर लिया और जालंधर के किडनी अस्पताल में सर्जन के रूप में ज्वाइन कर लिया।

2007 में डॉ. राजेश ने जालंधर में अपना अस्पताल खोल लिया। एक दिन में 31 किडनी के आपरेशन कर चुके डॉ. राजेश अग्रवाल 1500 किडनी ट्रांसप्लांट के आपरेशन कर चुके हैं। इसकी सफलता रेट 99 फीसदी है।

मेहनत और लगन से पाई मंजिल
डॉ. राजेश का कहना है कि मेहनत व लगन से उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया है। डॉ. राजेश का कहना है मेरे परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि मैं डॉक्टर बन जाऊंगा, लेकिन स्कूल समय से ही मेरा मुख्य लक्ष्य था। यही कारण है कि कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अभी भी खाने पीने की परवाह किए बगैर मरीजों को प्राथमिकता दे रहा हूं, शायद यही मेरा सफलता का रहस्य है।


निष्काम सेवा के लिए भी माने जाते हैं राजेश
देश में बेशक किडनी का इलाज काफी महंगा है लेकिन राजेश अग्रवाल कई बार गरीबों का जेब से पैसा खर्च कर न केवल इलाज कर देते हैं बल्कि कई बार मुफ्त सर्जरी भी कर देते हैं। उनका तर्क है कि मरीज ढेर सारी आशाओं के साथ चिकित्सक के पास आता है, लेकिन हम अपने कर्तव्य का निर्वाह ढंग से नहीं करेंगे तो उसके पास निराशा रहेगी क्योंकि वह पहले ही बीमारी के कारण तनाव में होता है।

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