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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस: मोहाली-पंचकूला की होनहार बेटियां कर रही परिवार का नाम रोशन, पढ़िए सफलता की कहानी

Wed, 11 Oct 2023 02:50 PM IST
निवेदिता वर्मा शिवानी हंस/आदेश चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली/पंचकूला
शिवानी हंस/आदेश चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली/पंचकूला Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 11 Oct 2023 02:50 PM IST
सार

समय के साथ समाज में काफी हद तक बदलाव आ गया है मगर अभी भी बहुत बदलाव होना बाकी है। हमारी बेटियां अभी भी बहुत सारी दुर्घटना, प्रताड़ना, दुष्कर्म आदि का शिकार हो रही हैं। हमें यह सब देख-सुनकर घबराना नहीं है बल्कि हमने बेटियों को इतना सक्षम बनाना है कि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ सकें और अपने परिवार के साथ-साथ देश का भी नाम रोशन कर सकें।

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International Girl Child Day celebrated on october 11
जसलीन और नवीशा - फोटो : फाइल

विस्तार

आज अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस है। बेटियों के महत्व को समझाने के लिए हर साल 11 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का एक और मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करना भी है।

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समय के साथ समाज में काफी हद तक बदलाव आ गया है मगर अभी भी बहुत बदलाव होना बाकी है। हमारी बेटियां अभी भी बहुत सारी दुर्घटना, प्रताड़ना, दुष्कर्म आदि का शिकार हो रही हैं। हमें यह सब देख-सुनकर घबराना नहीं है बल्कि हमने बेटियों को इतना सक्षम बनाना है कि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ सकें और अपने परिवार के साथ-साथ देश का भी नाम रोशन कर सकें। ऐसी बहुत-सी बेटियां हैं जिन्होंने न सिर्फ चांद तक का सफर तय किया बल्कि हर क्षेत्र में कहीं पुरुषों से आगे रहकर काबिलियत का प्रदर्शन किया है।  

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पांच साल की उम्र से ला दी पदकों की बाढ़
मोहाली के अंसल सेक्टर-114 की रहने वाली 11 वर्षीय हर्षिता खोसला पांच साल की उम्र से जिम्नास्ट कर रही है। वह अब तक कई जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक अपने नाम कर चुकी है। हर्षिता के पिता निजी बैंक में सहायक उपाध्यक्ष और मां प्रीति खोसला अध्यापिका और छह वर्षीय छोटी बहन हिनाया खोसला भी जिम्नास्ट कर रही है। मां प्रीति खोसला बताती हैं कि हर्षिता की दादी ने कहा कि बच्ची में काफी लचीलापन है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे जिम्नास्ट करना चाहिए फिर उन्होंने सेक्टर-78 स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम में बात की तभी से कोच मनदीप कौशल और प्रभजोत बाजवा से हर्षिता ट्रनिंग ले रही हैं। यहीं से वह जिम्नास्ट की एक अच्छी खिलाड़ी बनकर उभरी। पहले मुकाबले में वह रजत पदक लेकर आई थी। इसके बाद जब भी उसने किसी मुकाबले में हिस्सा लिया तो वह पहले तीन स्थान पर ही रही। हर्षिता का सपना है कि वह देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले और अपने परिवार का नाम रोशन करे।

बाल कलाकार ने जीता लोगों का दिल
सात वर्षीय जसलीन राणा पंजाबी फिल्मों में चाइल्ड एक्ट्रेस के तौर पर काम कर रही है। उसकी क्यूटनेस ने दर्शकों के साथ कलाकारों का भी दिल जीता। यही कारण है कि इतनी छोटी उम्र में उसके भोलेपन और प्रतिभा ने उसे स्टार बना दिया। हाल ही में उसकी ‘जूनियर’ रिलीज हुई थी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और की सारी फिल्में जल्द आने वाली हैं। इसमें ‘फुल मून’ और ‘फत्तो दे यार बड़े ने’ आदि शामिल हैं। जसलीन राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से है। फिलहाल अपने परिवार के साथ कुराली में रह रही है। पिता जसवीर राणा लैब चलाते हैं, मां पूनम राणा गृहणी हैं और भाई सौजन्य राणा बारहवीं का छात्र है। जसलीन बड़ी होकर कलाकर बनना चाहती है और परिवार का भी पूरा साथ है।

दस वर्ष में सीखी एबीसी, 14 साल में सीनियर नेशनल में दिखाया दम
पंचकूला सेक्टर-15 में रहने वाली नविशा भारद्वाज ने 14 साल की उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। तलवारबाजी जैसे खेल में वह प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुकी हैं। नविशा फिलहाल गुजरात के अहमदाबाद में स्थित संस्कार धाम स्पोर्ट्स अकादमी में एडवांस ट्रेनिंग ले रही हैं। फिलहाल वह नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटी हैं। करीब 4 साल पहले टीवी पर एक मैच देखने के बाद नविशा भारद्वाज ने अपने पिता राजीव कुमार से तलवारबाजी के बारे में पूछना शुरू किया। उस समय नविशा की उम्र महज 10 साल थी। राजीव कुमार फेंसिंग कोच हैं। जब उन्होंने नविशा को तलवारबाजी के बारे में बताना शुरू किया तो उसकी जिज्ञासा बढ़ती चली गई। राजीव कुमार भी लगातार मार्गदर्शन देते रहे और देखते ही देखते उसने तलवारबाजी में महारत हासिल कर ली। उसमें तलवारबाजी के प्रति जुनून इतना है कि महज 14 साल की उम्र होने के बावजूद उसने सीनियर नेशनल में भाग लिया। हालांकि वह पदक तो नहीं जीत पाई, मगर अपने से बड़े खिलाड़ियों के साथ भिड़ कर शहरवासियों का दिल जरूर जीत लिया। अब नविशा भारद्वाज का कहना है कि उसे ओलंपिक में जाकर देश का नाम रोशन करना है।

कोरोना काल में घर पर ही सीखी तकनीक
कोरोना काल के दौरान पूरे देश में लॉकडाउन था। उस समय खेल से संबंधित कोई भी गतिविधि नहीं चल रही थी। उसका खेल प्रभावित न हो इसके लिए उसने घर पर ही अभ्यास करने का फैसला लिया। उनके पिता राजीव कुमार ने इसमें नविशा की मदद की। डिफेंस और अटैक की तकनीक उसे सिखाई।

बड़ी हस्तियां कर चुकी सम्मानित
नविशा की उम्र भले ही कम हो मगर बड़ी-बड़ी हस्तियों को उसकी उपलब्धियां भा रही हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री के अलावा द ग्रेट खली भी उनको सम्मानित कर चुके हैं। इसके अलावा फेमस टीवी शो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल के मुख्य किरदारों में से एक चंदन कुमार ऊर्फ चंदू भी नविशा से मिलने के लिए कुछ दिन पहले ही सेक्टर-15 स्थित उनके घर पर आए थे। इसके अलावा कई प्रशासनिक अधिकारी भी उसे सम्मानित कर चुके हैं।

ये हैं उपलब्धियां
1. महाराष्ट्र के नासिक में 2018 में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता के अंडर-10 आयुवर्ग के मुकाबले में गोल्ड मेडल हासिल किया।
2. मार्च 2023 में केरल में आयोजित चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया।
3. जनवरी 2023 में केरला के अर्नाकुलम में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में ब्रांच मेडल हासिल किया।
4. जनवरी 2022 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल किया।

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