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Chandigarh News: वकील पर कार्रवाई से हाईकोर्ट सख्त, तोड़फोड़ मामले की जांच सीबीआई को

Mon, 05 Oct 2026 10:19 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 10:19 PM IST
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High Court takes a stern view regarding action against the lawyer; hands over the vandalism case investigation to the CBI.
निखिल सराफ के माजरी स्थित परिसर में कार्रवाई के पीछे प्रथम दृष्टया दुर्भावना के संकेत, अदालत ने जताया चुप कराने की कोशिश का संदेह
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब में कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता निखिल सराफ के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया कार्रवाई के पीछे दुर्भावना और उन्हें चुप कराने की कोशिश जैसी परिस्थितियां दिखाई देने पर मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप उठाने के तुरंत बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होना संदेह पैदा करता है।
जनहित याचिका के बाद तेज हुई कार्रवाई
मामला मोहाली जिले के माजरी क्षेत्र में स्थित निखिल सराफ के परिवार द्वारा संचालित परिसर से जुड़ा है। सराफ ने पंजाब सरकार के अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों पर कथित भ्रष्टाचार, तबादलों और नियुक्तियों में लेनदेन तथा सरकारी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप के आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्रों के आधार पर स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी।
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याचिका दायर होने के बाद उनके माजरी स्थित परिसर में कथित अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई। सराफ की ओर से अदालत में दलील दी गई कि भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाने के बाद विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की। उन्होंने इसे दबाव बनाने और आवाज उठाने से रोकने की कोशिश बताया।
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सरकार ने बताया नियमों के तहत कार्रवाई
सरकारी पक्ष ने कार्रवाई को जनहित याचिका से जोड़ने पर आपत्ति जताई। सरकार के अनुसार, परिसर को लेकर नवंबर 2024 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और दो सितंबर 2026 को आदेश पारित किया गया था। उसका कहना था कि कार्रवाई पहले जारी नोटिस और निर्धारित नियमों के तहत की गई।

ईडी ने भी उठाए थे भ्रष्टाचार के आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट में दाखिल विस्तृत जवाब में पंजाब में कथित तौर पर तबादला और तैनाती के बदले धन लेने की व्यवस्था तथा सरकारी प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया था। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम रूप से न्यायिक पुष्टि होना बाकी है। हाईकोर्ट ने अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई के मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।
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