विशेषज्ञ ने चेताया- वायु प्रदूषण पर आज नहीं सोचा तो चंडीगढ़ को दिल्ली बनते देर नहीं लगेगी
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विश्व का पहला इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फार ब्लू स्काइज सोमवार को मनाया गया। इसका मकसद लोगों को वायु प्रदूषण के प्रति जागरूक बनाना है। पूरे देश में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या का रूप लेती जा रही है। चंडीगढ़ की स्थिति तो फिलहाल ठीक है लेकिन जल्द इसे नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनी तो कुछ सालों में हालात दिल्ली जैसे बन सकते हैं।
इस खास मौके पर पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के इन्वायरमेंट विंग के एडिशनल प्रोफेसर रविंद्र खैवाल से चंडीगढ़ से संबंधित कुछ सवालों के जवाब पूछे गए। वह पंजाब में चलाए जा रहे नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के नोडल फैकल्टी भी हैं।
चंडीगढ़ में वायु प्रदूषण की स्थिति कैसी है?
शहर के कुछ स्थानों में वायु प्रदूषण का स्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। हमने एक स्टडी में पाया है कि मानसून सीजन में तो चंडीगढ़ की हवा शुद्ध रहती है, मगर अक्तूबर के आसपास वायु प्रदूषण बढ़ने लगता है। दिसंबर और जनवरी में वायु प्रदूषण खतरनाक सूचकांक के पास पहुंच जाता है। इसके लिए यदि आज गंभीर नहीं होंगे तो आने वाले कुछ सालों में स्थिति दिल्ली जैसी बन सकती है।
अक्तूबर के आसपास हालात क्यों बिगड़ते हैं
दरअसल, उस समय मौसम में बदलाव आने लगते हैं। ठंड के साथ नमी बढ़ती है। वायुमंडलीय सतह पृथ्वी के करीब आती है। इसके साथ ही पंजाब व हरियाणा में किसान पराली जलाने लगते हैं। इस वजह से अक्तूबर के जाते ही वायु प्रदूषण खराब स्थिति में पहुंचने लगता है।
अक्तूबर में हवा खराब न हो, इसके लिए क्या करना चाहिए
यह काम सिर्फ सरकारों या प्रशासन के करने से नहीं होगा। इसमें लोगों की भागीदारी अत्यंत जरूरी है। यूटी प्रशासन को भी नीति बनाने के दौरान पंजाब व हरियाणा को भी शामिल करना होगा, क्योंकि सिर्फ चंडीगढ़ में प्रदूषण कम करने से कुछ फायदा नहीं होगा। क्योंकि चंडीगढ़ में प्रदूषण में हरियाणा व पंजाब का भी योगदान है।
एक आम व्यक्ति इसमें क्या भागीदारी निभा सकता है
अच्छा सवाल है। चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है, जहां साइकिल से यात्रा की जा सकती है। अच्छे साइकिल ट्रैक बने हैं और यहां की पुलिस भी साइक्लिंग के लिए गंभीर है। मार्केट या रोजमर्रा के काम के लिए साइकिल का इस्तेमाल करें। लाइट पर जब खड़े हों तो अपने व्हीकल का इंजन बंद कर दें। सर्दियों के वक्त कूड़ा न जलाएं। प्रदूषण बढ़ने पर अपने घर के आसपास पानी का छिड़काव करें। प्रशासन को पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बैटरी या इलेक्ट्रिक संचालित बनाना होगा। साथ ही टूटी सड़कों का जल्द से जल्द निर्माण करना चाहिए।