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Chandigarh News: बीमा कंपनी ने नहीं दिया क्लेम, अब देने होंगे 2.5 लाख
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चंडीगढ़।
जिला उपभोक्ता आयोग ने हमले में घुटने पर गोली लगने के बाद हुई गन शॉट सर्जरी के बाद बीमा कंपनी को पॉलिसी के बावजूद कैशलेस सुविधा का लाभ न देने के मामले में सुनवाई करते हुए मणिपाल सिगना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही बरतने का दोषी करार दिया है।
आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को हर्जाना के रूप में प्रतिवर्ष 9 प्रतिशत ब्याज दर के साथ 2.50 लाख रुपये हर्जाना के रूप में देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार व केस में खर्च हुए राशि के रूप में 10 हजार रुपये देने की बात कही है।
क्या था मामला
सेक्टर-27 डी निवासी तुषार भारद्वाज ने आयोग को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अक्तूबर 2015 में अपना और पत्नी का मणिपाल सिगना की प्रो हेल्थ-प्रोटेक्ट फैमिली फ्लोटर नामक पॉलिसी ली थी। इसके साथ 2.5 लाख की पॉलिसी को हर साल रिन्यू करवाते रहे। 24 फरवरी 2020 को शिकायतकर्ता को एक हमले में पैर पर गोली लगी थी, जिसके चलते उन्हें गन शॉट इंजरी आई और उन्हें फोर्टिस में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के लिए, जब उन्होंने इंश्योरेंस पॉलिसी से कैशलेस सुविधा की मांग की तो उन्हें बिना कारण बताए मना कर दिया गया। पूरा बिल भर वह 4 मार्च को डिस्चार्ज हुए। इसके बाद फिर से 15 मार्च 2020 को भर्ती हुए और इस बार भी कैशलेस सुविधा का लाभ नहीं दिया गया। नवंबर 2020 तक क्लेम का कुछ नहीं बना और बाद में कंपनी ने कहा कि क्लेम इसलिए रद्द हुआ क्योंकि क्लेम देरी से दायर हुआ।
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लॉकडाउन के चलते नहीं ले सके क्लेम
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन और पैर में फ्रैक्चर होने के चलते उन्हें आराम की सलाह दी गई थी। ऐसे में वह समय पर क्लेम नहीं दे पाए। इलाज के लिए उन्हें पहले जीएमसीएच-32 और फिर फोर्टिस ले जाया गया था। इस दौरान शिकायतकर्ता के इलाज पर कुल 4.28 लाख रुपये खर्च आया था मगर पॉलिसी सिर्फ 2.50 लाख रुपये की थी। मोहाली फेज-11 में 24 फरवरी 2020 को हुए एक हमले के दौरान शिकायतकर्ता के घुटने में गोली लगी थी।
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जिला उपभोक्ता आयोग ने हमले में घुटने पर गोली लगने के बाद हुई गन शॉट सर्जरी के बाद बीमा कंपनी को पॉलिसी के बावजूद कैशलेस सुविधा का लाभ न देने के मामले में सुनवाई करते हुए मणिपाल सिगना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही बरतने का दोषी करार दिया है।
आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को हर्जाना के रूप में प्रतिवर्ष 9 प्रतिशत ब्याज दर के साथ 2.50 लाख रुपये हर्जाना के रूप में देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार व केस में खर्च हुए राशि के रूप में 10 हजार रुपये देने की बात कही है।
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क्या था मामला
सेक्टर-27 डी निवासी तुषार भारद्वाज ने आयोग को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अक्तूबर 2015 में अपना और पत्नी का मणिपाल सिगना की प्रो हेल्थ-प्रोटेक्ट फैमिली फ्लोटर नामक पॉलिसी ली थी। इसके साथ 2.5 लाख की पॉलिसी को हर साल रिन्यू करवाते रहे। 24 फरवरी 2020 को शिकायतकर्ता को एक हमले में पैर पर गोली लगी थी, जिसके चलते उन्हें गन शॉट इंजरी आई और उन्हें फोर्टिस में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के लिए, जब उन्होंने इंश्योरेंस पॉलिसी से कैशलेस सुविधा की मांग की तो उन्हें बिना कारण बताए मना कर दिया गया। पूरा बिल भर वह 4 मार्च को डिस्चार्ज हुए। इसके बाद फिर से 15 मार्च 2020 को भर्ती हुए और इस बार भी कैशलेस सुविधा का लाभ नहीं दिया गया। नवंबर 2020 तक क्लेम का कुछ नहीं बना और बाद में कंपनी ने कहा कि क्लेम इसलिए रद्द हुआ क्योंकि क्लेम देरी से दायर हुआ।
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लॉकडाउन के चलते नहीं ले सके क्लेम
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन और पैर में फ्रैक्चर होने के चलते उन्हें आराम की सलाह दी गई थी। ऐसे में वह समय पर क्लेम नहीं दे पाए। इलाज के लिए उन्हें पहले जीएमसीएच-32 और फिर फोर्टिस ले जाया गया था। इस दौरान शिकायतकर्ता के इलाज पर कुल 4.28 लाख रुपये खर्च आया था मगर पॉलिसी सिर्फ 2.50 लाख रुपये की थी। मोहाली फेज-11 में 24 फरवरी 2020 को हुए एक हमले के दौरान शिकायतकर्ता के घुटने में गोली लगी थी।