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सदर बाजार के 14 वेंडरों पर आया यह फैसला
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चंडीगढ़। नगर निगम आयुक्त केके यादव ने सेक्टर-19 स्थित सदर बाजार में वर्षों से बैठे 14 वेंडरों को 15 फरवरी तक हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। हालांकि आयुक्त ने पिछले साल भी यही आदेश जारी किए थे, लेकिन निगम वेंडरों को नहीं हटा सका था।
अधिकारियों का कहना है कि शहर से जब वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया गया था तब इन वेंडरों को भी नोटिस जारी किया गया था। उसके बाद वेंडर अदालत चले गए। चूंकि उच्चतम न्यायालय ने भी इन वेंडरों को अवैध माना और इनके खिलाफ निर्णय दिया। उसके बाद नगर निगम ने जून 2020 में नोटिस जारी कर वेंडरों को हटाने को कहा था। वर्तमान सुपरिंटेंडेंट व तत्कालीन इंस्पेक्टर सुनील दत्त ने मौके पर पहुंचकर कुछ वेंडरों को हटा पाए थे कि राजनीतिक दबाव के कारण वेंडरों को हटाने का काम रोकना पड़ा। हालांकि निगम ने वेंडरों को न हटा पाने के लिए कोरोना महामारी का बहाना बना दिया। अब 15 फरवरी तक निगम इन वेंडरों को हटा पता है या नहीं, अधिकारियों के सामने यह बड़ी चुनौती है।
बाजार में आग लगने के बाद बैठाए थे अस्थायी वेंडर
काफी साल पहले बाजार में आग लग गई थी। तब कई बूथ जलकर नष्ट हो गए थे। तब इन दुकानदारों को अस्थायी जगह देकर प्रशासन ने यहां बैठाया था। उसके बाद बूथों का निर्माण हुआ, जो लोग वास्तविक में हादसे में प्रभावित हुए थे, उन्हें तो बूथ मिल गए लेकिन जो लोग रह गए वह अपने अधिकार के लिए कोर्ट चले गए। सालों से चल रहे केस का फैसला आने के बाद निगम ने आगे की कार्रवाई की।
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अधिकारियों का कहना है कि शहर से जब वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया गया था तब इन वेंडरों को भी नोटिस जारी किया गया था। उसके बाद वेंडर अदालत चले गए। चूंकि उच्चतम न्यायालय ने भी इन वेंडरों को अवैध माना और इनके खिलाफ निर्णय दिया। उसके बाद नगर निगम ने जून 2020 में नोटिस जारी कर वेंडरों को हटाने को कहा था। वर्तमान सुपरिंटेंडेंट व तत्कालीन इंस्पेक्टर सुनील दत्त ने मौके पर पहुंचकर कुछ वेंडरों को हटा पाए थे कि राजनीतिक दबाव के कारण वेंडरों को हटाने का काम रोकना पड़ा। हालांकि निगम ने वेंडरों को न हटा पाने के लिए कोरोना महामारी का बहाना बना दिया। अब 15 फरवरी तक निगम इन वेंडरों को हटा पता है या नहीं, अधिकारियों के सामने यह बड़ी चुनौती है।
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बाजार में आग लगने के बाद बैठाए थे अस्थायी वेंडर
काफी साल पहले बाजार में आग लग गई थी। तब कई बूथ जलकर नष्ट हो गए थे। तब इन दुकानदारों को अस्थायी जगह देकर प्रशासन ने यहां बैठाया था। उसके बाद बूथों का निर्माण हुआ, जो लोग वास्तविक में हादसे में प्रभावित हुए थे, उन्हें तो बूथ मिल गए लेकिन जो लोग रह गए वह अपने अधिकार के लिए कोर्ट चले गए। सालों से चल रहे केस का फैसला आने के बाद निगम ने आगे की कार्रवाई की।
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