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Chandigarh: करनाल की बेटी ने देश के लिए जीते मेडल, अब तैयार कर रही खिलाड़ियों की फौज
Sun, 08 Jan 2023 02:28 PM IST
निवेदिता वर्मा
वेद शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, नयागांव (मोहाली)
वेद शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, नयागांव (मोहाली)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 08 Jan 2023 02:28 PM IST
सार
शिबा ने पांच बार एशियाई खेलों में हिस्सा लिया। वर्ष 2002 में एशियाई खिलाड़ियों में उन्हें शीर्ष पांचवां स्थान मिला था। वह 2006 में ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थीं।
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शिबा मग्गो
- फोटो : फाइल
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विस्तार
जब मैंने खेलना शुरू किया था तब इतनी सुविधाएं नहीं थीं। खिलाड़ियों के पास ज्यादा विकल्प भी नहीं थे मगर आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। सुविधाएं भी हैं और विकल्प भी। दुनिया भर में हमारे खिलाड़ी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। यह कहना है कि एमटीएनएल में स्पोर्ट्स अफसर शिबा मग्गो का। वह बास्केटबॉल में भारतीय टीम का नेतृत्व कर चुकीं हैं। पति धर्मवीर सिंह भी खिलाड़ी हैं और ध्यानचंद अवार्ड जीत चुके हैं।
शिबा मग्गो शुरुआती मूलरूप से करनाल की रहने वाली हैं। शुरुआती पढ़ाई वहीं हुई। इसके बाद वह चंडीगढ़ आ गईं और सेक्टर-18 के स्कूल में पढ़ाई की। उच्च शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) चंडीगढ़ से प्राप्त की। वर्ष 1989 में शिबा ने बास्केटबॉल खेलना शुरू किया और 1991 में भारतीय टीम में उनका चयन हो गया। छह साल तक टीम बाहर नहीं गई। 1997 में पहली बार भारतीय टीम के साथ विदेश दौरे पर गईं। वर्ष 2009 तक भारतीय बास्केटबॉल टीम के लिए खेला। इस दौरान उन्होंने टीम का नेतृत्व भी किया। इसके बाद वर्ष 2010 से 2019 तक भारतीय बास्केटबॉल टीम की कोच रहीं। 2008 में शिबा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास कर रेफरी के लिए खुद को क्वालिफाई कर लिया था। बास्केटबॉल में रेफरी के लिए योग्यता प्राप्त करने वाली वह पहली भारतीय महिला थीं। शिबा ने बताया कि पिता बलवंत राय और माता चंचल मग्गो ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया।
शिबा ने पांच बार एशियाई खेलों में हिस्सा लिया। वर्ष 2002 में एशियाई खिलाड़ियों में उन्हें शीर्ष पांचवां स्थान मिला था। वह 2006 में ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थीं। शिबा प्रमाणित रेफरी भी हैं। वर्ष 2020 में पूर्ण रूप से एमटीएनएल में स्पोर्ट्स अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहीं हैं। शिबा के दो जुड़वां बच्चे एकम सिंह और एकनूर कौर हैं।
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एकेडमी खोलकर खिलाड़ी तैयार करना है
शिबा मग्गो कहती हैं कि वह माता-पिता के सहयोग से इस खेल में आगे बढ़ पाईं। अब वह चाहती हैं कि आज के समय में किसी भी बच्चे को कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए वह जल्द ही मोहाली में एक बास्केटबॉल एकेडमी खोलेंगी और वहां पर बच्चों को खेलों के लिए तैयार करेंगी। यह उनका बचपन का सपना था। इसे जल्द पूरा करने की कोशिश है।
शिबा मग्गो की उपलब्धियां
वर्ष 1989 से 2010 तक कुल 20 सीनियर नेशनल गेम्स खेले
वर्ष 1991 में युवा वर्ग में एक स्वर्ण पदक जीता
वर्ष 1993 में एक स्वर्ण पदक और 1994 के यूथ नेशनल में एक रजत पदक और 1991 में कांस्य पदक जीता
वर्ष 1997 से 2002 तक सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में भारतीय रेलवे के लिए खेलते हुए छह स्वर्ण पदक जीते
वर्ष 2003 से 2011 तक दिल्ली के लिए खेलते हुए सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और आठ रजत पदक जीते
छह फेडरेशन कप में तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदक जीते।
अखिल भारतीय विश्वविद्यालय स्तर पर दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता।
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शिबा मग्गो शुरुआती मूलरूप से करनाल की रहने वाली हैं। शुरुआती पढ़ाई वहीं हुई। इसके बाद वह चंडीगढ़ आ गईं और सेक्टर-18 के स्कूल में पढ़ाई की। उच्च शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) चंडीगढ़ से प्राप्त की। वर्ष 1989 में शिबा ने बास्केटबॉल खेलना शुरू किया और 1991 में भारतीय टीम में उनका चयन हो गया। छह साल तक टीम बाहर नहीं गई। 1997 में पहली बार भारतीय टीम के साथ विदेश दौरे पर गईं। वर्ष 2009 तक भारतीय बास्केटबॉल टीम के लिए खेला। इस दौरान उन्होंने टीम का नेतृत्व भी किया। इसके बाद वर्ष 2010 से 2019 तक भारतीय बास्केटबॉल टीम की कोच रहीं। 2008 में शिबा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास कर रेफरी के लिए खुद को क्वालिफाई कर लिया था। बास्केटबॉल में रेफरी के लिए योग्यता प्राप्त करने वाली वह पहली भारतीय महिला थीं। शिबा ने बताया कि पिता बलवंत राय और माता चंचल मग्गो ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया।
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शिबा ने पांच बार एशियाई खेलों में हिस्सा लिया। वर्ष 2002 में एशियाई खिलाड़ियों में उन्हें शीर्ष पांचवां स्थान मिला था। वह 2006 में ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थीं। शिबा प्रमाणित रेफरी भी हैं। वर्ष 2020 में पूर्ण रूप से एमटीएनएल में स्पोर्ट्स अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहीं हैं। शिबा के दो जुड़वां बच्चे एकम सिंह और एकनूर कौर हैं।
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एकेडमी खोलकर खिलाड़ी तैयार करना है
शिबा मग्गो कहती हैं कि वह माता-पिता के सहयोग से इस खेल में आगे बढ़ पाईं। अब वह चाहती हैं कि आज के समय में किसी भी बच्चे को कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए वह जल्द ही मोहाली में एक बास्केटबॉल एकेडमी खोलेंगी और वहां पर बच्चों को खेलों के लिए तैयार करेंगी। यह उनका बचपन का सपना था। इसे जल्द पूरा करने की कोशिश है।
शिबा मग्गो की उपलब्धियां
वर्ष 1989 से 2010 तक कुल 20 सीनियर नेशनल गेम्स खेले
वर्ष 1991 में युवा वर्ग में एक स्वर्ण पदक जीता
वर्ष 1993 में एक स्वर्ण पदक और 1994 के यूथ नेशनल में एक रजत पदक और 1991 में कांस्य पदक जीता
वर्ष 1997 से 2002 तक सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में भारतीय रेलवे के लिए खेलते हुए छह स्वर्ण पदक जीते
वर्ष 2003 से 2011 तक दिल्ली के लिए खेलते हुए सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और आठ रजत पदक जीते
छह फेडरेशन कप में तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदक जीते।
अखिल भारतीय विश्वविद्यालय स्तर पर दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता।