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पांच साल में इस शख्स ने बनाया ऐसा बगीचा...दूर-दूर से देखने आते हैं लोग

Mon, 09 Nov 2020 05:54 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 09 Nov 2020 05:54 PM IST
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A person transformed his house into a garden in Chandigarh
हाउस न. 1116 में बना गार्डन। - फोटो : अमर उजाला

चंडीगढ़ के सेक्टर-29 निवासी नरेश कोहली की जिंदगी उनके बगीचे ने बदल दी है। जब से उनके बगीचे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं, तब से हर किसी की चाह उनके बगीचे को देखने की रहती है। जो भी नरेश के बगीचे को देखता है, उसकी तारीफ किए बिना नहीं रहता। नरेश ने भी इस बगीचे को संवारने में कड़ी मेहनत की है। पांच साल से वह इस बगीचे में अपना पसीना बहा रहे हैं।

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खास बात यह है कि उन्होंने अपने बगीचे में ज्यादातर पौधे वेस्ट मैटेरियल से तैयार गमलों में लगाए हैं। नरेश कोहली का कहना है कि उन्होंने अपना बगीचा रॉक गार्डन के निर्माता नेकचंद से प्रभावित होकर बनाया है। जिस तरह से रॉक गार्डन को बनाने में वेस्ट मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है, उसी तरह से उन्होंने अपने बगीचे को संवारने की कोशिश की है। अब उनके बगीचे की खुशबू को महसूस करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
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यूटी के पेंटिंग एंड स्टेशनरी डिपार्टमेंट में कार्यरत नरेश कोहली ने बताया कि उन्होंने गमलों के लिए प्लास्टिक की प्लेट्स, पंखे की जाली, बच्चों की साइकिल, मिनरल वाटर की बोतल, चम्मच, टायर व जूतों का इस्तेमाल किया है।

वेस्ट मैटेरियल को गमलों में तब्दील करने के लिए उन्होंने न तो किसी यूट्यूब वीडियो को देखा और न ही कहीं से इसे सीखा। हालांकि वह अक्सर रॉक गार्डन व सेक्टर-37 स्थित कला सागर जाते रहे हैं। वहां से उन्हें कई सारे आइडिया मिले और उसे अपने तरीके से बगीचे में लागू किए।


गमलों के साथ किचन गार्डन भी बनाया
कोहली के पास 70 से ज्यादा गमले होंगे। इसके अलावा उन्होंने एक किचन गार्डन बनाया हुआ है। इसमें वह मौसमी सब्जियां उगाते हैं। इस समय उनके किचन गार्डन में मूली, शलजम, गाजर, चुकंदर, पत्ता गोभी, धनिया, ब्रोकली व अन्य सब्जियां उगी हुई हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सभी सब्जियां आर्गेनिक हैं क्योंकि वह कोई भी पेस्टीसाइड का इस्तेमाल नहीं करते हैं। आसपास के लोगों को भी वह अक्सर अपने किचन गार्डन की सब्जियां देते हैं।


पेड़-पौधों की देखभाल से मिलती है सकारात्मक ऊर्जा
नरेश कोहली ने बताया कि वह अपने गार्डन में रोजाना दो घंटे का समय गुजारते हैं। ऑफिस से लौटने के बाद वह अपना वक्त बगीचे में ही बिताते हैं। छुट्टी वाले दिन उनका सारा समय पेड़ पौधों की कटाई छंटाई में बीतता है।

उन्होंने बताया कि जब वह पौधों के पास रहते हैं तो उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मन शांत होता है और एक सुकून मिलता है। उनके बगीचे को देखने के लिए अब तक नेकचंद के बेटे अनूप सैनी व कला सागर के विजय गोयल आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि कई लोग उनसे उनका गार्डन देखने के लिए बोल चुके हैं, लेकिन कोरोना की वजह से वह ज्यादा लोगों को आने नहीं देते।

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