वार्ड ब्वाय से ई-बिजनेस, खड़ा किया 740 करोड़ का एंपायर
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हर कहानी से पहले चंद पंक्तियां होती हैं कि इस कहानी की घटनाएं और पात्र काल्पनिक हैं...लेकिन इस कहानी से पहले यह पंक्तियां लिखने की जरूरत कतई नहीं है। यह कहानी एक ऐसे शख्स की है, जो अब शख्सियत बन चुका है।
राहुल नरवेकर, जो कभी वार्ड ब्वाय थे और हालात ने उन्हें डोर-टु-डोर सेल्समैन तक का काम करवाया, लेकिन आज राहुल फैशन एंड यू डॉट कॉम, इंडियन रूट्स डॉट कॉम के सीईओ हैं। उनका ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल इंडियन रूट्स डॉट कॉम छह मिलियन लोगों की पसंद बन चुका है।
यह वही पोर्टल है, जिसका वेलुएशन सिर्फ 18 महीने में 18 करोड़ से 740 करोड़ रुपये का हो गया है। जिंदगी में काफी संघर्ष देख चुके राहुल के पांव हमेशा जमीन पर रहे और लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने आसमान छू लिया।
पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में स्टार्टअप जलसा में युवा उद्यमियों की तलाश में पहुंचे राहुल ने बताया कि उनका संघर्ष बचपन से ही शुरू हो गया था। पिता की फैक्ट्री में ताला लगा तो वार्ड ब्वाय की नौकरी करनी पड़ी, फिर एक दुकान में डिलीवरी ब्वाय का काम मिला। जिंदगी में बदलाव आया रॉनी स्क्रूवाला के दफ्तर में काम करने के बाद।
2009 में ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया
1995 में केबल एडवरटाइजिंग एजेंसी बनाई और 1999 में पांच दोस्तों के साथ मिलकर आईवीआरएस टेक्नोलॉजी पर आधारित म्यूजिक चैनल लॉन्च किया। कंपनी ने दो करोड़ का रेवेन्यू जनरेट कर लिया, लेकिन जिंदगी ने इम्तिहान लेने बंद नहीं किए थे।
एक बड़ा इम्तिहान और सामने आया। कंपनी के साझेदारों में आपसी सामंजस्य नहीं बना और उन्हें कंपनी छोड़नी पड़ी। राहुल ने फिर मेहनत की और 2009 में ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया।
राहुल लाए फैशन एंड यू डॉट कॉम। इस पोर्टल पर यूएस की कंपनी सिकोया कैपिटल ने आठ मिलियन डॉलर इनवेस्ट किए। राहुल का अगला कदम था इंडियन रूट्स डॉट कॉम।
इसमें 18 महीने में 18 करोड़ रुपये से 740 करोड़ रुपये की वेल्यूएशन हासिल की। यह वही पोर्टल है, जिस पर प्रणवी कपूर का मुगलकालीन डिजाइनर शॉल 19 लाख रुपये में बिका।
‘रिस्क नहीं चाहते युवा’
राहुल ने कहा कि उनकी कोशिश है कि बेहतरीन आइडिया रखने वाले स्टार्टअप के लिए निवेश करें। हालांकि राहुल ने निराशा जताई कि जलसा में आए युवाओं में वह ललक दिखाई नहीं दी। राहुल ने कहा कि यहां युवा चाहते हैं कि कोई रिस्क न हो और उनको लाभ हो, जबकि बिना रिस्क न निवेश संभव है, न लाभ।