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जांच रिपोर्टः बीट ऑफिसर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर अपना काम करते तो नहीं लगती पीजी में आग
Wed, 18 Mar 2020 12:44 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 18 Mar 2020 12:44 PM IST
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चंडीगढ़ में सेक्टर-32 के पीजी में 22 फरवरी को आग लगने से तीन लड़कियों की मौत बीट ऑफिसर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर की लापरवाही का नतीजा है। अगर यह अपना काम सही से करते तो पीजी में आग नहीं लगती। यह खुलासा इस अग्निकांड की जांच रिपोर्ट में हुआ है। साथ ही कहा गया है कि मकान मालिक और संचालक इसके लिए जिम्मेदार हैं।
सेक्टर-32 स्थित एक पेइंग गेस्ट (पीजी) में आग लगने से तीन लड़कियों की मौत के मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीसी मनदीप सिंह बराड़ को सौंप दी है। रिपोर्ट में आग लगने का कारण शॉर्ट-सर्किट बताया गया है। मकान में प्लास्टिक से पार्टिशन किया गया था, जिसकी वजह से आग तेजी से भड़की और पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मकान मालिक और पीजी संचालक ने नियमों को पूरा किया होता तो किसी तरह की जान का नुकसान नहीं होता। इसके अलावा स्थानीय बीट ऑफिसर ने चेकिंग नहीं की। मकान में कई तरह के अवैध निर्माण किए गए थे, जिसकी बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने कभी जांच नहीं की। अगर ये सभी अपना काम सही से करते तो किसी की जान नहीं जाती।
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सेक्टर-32 स्थित एक पेइंग गेस्ट (पीजी) में आग लगने से तीन लड़कियों की मौत के मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीसी मनदीप सिंह बराड़ को सौंप दी है। रिपोर्ट में आग लगने का कारण शॉर्ट-सर्किट बताया गया है। मकान में प्लास्टिक से पार्टिशन किया गया था, जिसकी वजह से आग तेजी से भड़की और पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि मकान मालिक और पीजी संचालक ने नियमों को पूरा किया होता तो किसी तरह की जान का नुकसान नहीं होता। इसके अलावा स्थानीय बीट ऑफिसर ने चेकिंग नहीं की। मकान में कई तरह के अवैध निर्माण किए गए थे, जिसकी बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने कभी जांच नहीं की। अगर ये सभी अपना काम सही से करते तो किसी की जान नहीं जाती।
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पीजी का बोर्ड लगाने का सुझाव भी दिया
इस अग्निकांड की जांच एसडीएम साउथ एसके जैन की अगुवाई वाली टीम ने किया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कई सुझाव भी दिए हैं। कहा गया है कि सभी मकानों के लिए फायर सेफ्टी क्लीयरेंस अनिवार्य किया जाना चाहिए, जिसे प्रशासन ने बीते दिनों अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा किसी भी पीजी में लकड़ी या प्लास्टिक की दीवार नहीं होनी चाहिए।
कंक्रीट की दीवार बनाई जा सकती है। पीजी में रहने वालों की संख्या, मकान की जगह से अनुसार तय होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि हर पीजी के बाहर एक नोटिस बोर्ड लगा होना चाहिए, जिसमें पीजी संचालक और सभी तरह की जानकारियां लिखी होनी चाहिए। उस पर एक हेल्पलाइन नंबर भी लिखा होना चाहिए।
कंक्रीट की दीवार बनाई जा सकती है। पीजी में रहने वालों की संख्या, मकान की जगह से अनुसार तय होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि हर पीजी के बाहर एक नोटिस बोर्ड लगा होना चाहिए, जिसमें पीजी संचालक और सभी तरह की जानकारियां लिखी होनी चाहिए। उस पर एक हेल्पलाइन नंबर भी लिखा होना चाहिए।