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निस्वार्थ भाव से कोई आएगा तो समझौता करेंगे, वरना इनेलो अकेले लड़ेगा चुनाव : अभय चौटाला

Mon, 22 Jan 2024 01:00 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jan 2024 01:00 AM IST
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INLD General Secretary Interview
अभय चौटाला, इनेलो महासचिव
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बेटे कर्ण को लोकसभा चुनाव में उतारने की तैयारी कर रहे इनेलो महासचिव, भाजपा-जजपा सरकार में हुए घोटालों की जांच कराएंगे

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) का किसी दूसरे दल के साथ गठबंधन के मुद्दे पर रुख स्पष्ट है। पार्टी का कहना है कि गठबंधन से पहले यह तय होना जरूरी है कि कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा। यदि कोई सम्मानपूर्वक प्रदेश हित के लिए सुझाव लेकर आता है तो बात आगे बढ़ेगी, वरना इनेलो अकेले ही लोकसभा चुनाव में उतरेगा। इस बार पार्टी महासचिव अभय चौटाला अपने बेटे कर्ण को लोकसभा चुनाव में उतारने की तैयारी में हैं। हालांकि किस सीट से लड़ेंगे, इसके पत्ते उन्होंने अभी नहीं खोले हैं। चौधरी ओम प्रकाश चौटाला व भाजपा-जजपा गठबंधन समेत कई मुद्दों पर अभय सिंह चौटाला ने अपनी बेबाक राय रखी। पेश हैं उनसे बातचीत के मुख्य अंश...।
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तीन महीने बाद लोकसभा चुनाव हैं। इनेलो कितना तैयार है?

इनेलो ने लोकसभा चुनाव के लिए हलका वार प्रभारी नियुक्त किया है। वह लोगों से फीडबैक ले रहा है कि पार्टी का प्रत्याशी कैसा और कौन होना चाहिए। प्रभारी अपनी रिपोर्ट पार्टी को सौपेंगे। हम संगठन को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। पार्टी का प्रदेश में सदस्यता अभियान चल रहा है। 15 फरवरी तक पांच लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा हम समय-समय पर लोगों के बीच जा रहे हैं। 21 जनवरी को कैथल में यूथ सम्मेलन है। मौजूदा सरकार को लेकर युवाओं में काफी नाराजगी है। युवा बदलाव चाहते हैं। 11 फरवरी को अंबाला के बराड़ा में वाल्मीकि जयंती पर रैली करेंगे। 18 फरवरी को हिसार के बरवाला में किसान सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं।
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इनेलो चुनाव अकेले लड़ेगा या गठबंधन के साथ?

चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने फतेहाबाद रैली में विपक्ष के नेताओं से आग्रह किया था कि नॉन कांग्रेस और नॉन भाजपा तीसरा फ्रंट बनाएं, ताकि आने वाले समय में भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया जाए और कांग्रेस को सत्ता से दूर रखा जाए। लोग पहले कांग्रेस से नाराज थे। अब भाजपा से परेशान हैं। इंडिया गठबंधन में कांग्रेस ने मनमर्जी चलानी शुरू कर दी है। छोटे दलों पर नियंत्रण बनाने की कोशिश कर रही है। क्षेत्रीय दल किसी के मोहताज नहीं हैं। यदि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कोई भी निस्वार्थ व सम्मानजनक बात करेगा तो उससे बातचीत जरूर करेंगे।
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इंडिया गठबंधन ने क्या कभी आपसे संपर्क करने की कोशिश की?
कई दफा इस बारे में चर्चा हुई, लेकिन इनेलो ने स्पष्ट कर दिया है कि पहले यह तय होना चाहिए कि कितनी सीटों पर कौन-कौन चुनाव लड़ेगा। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आखिरी वक्त में इस पर विवाद हो जाए कि हम तो आपको इतनी सीटें ही दे सकते हैं। पहले सीटे तय होनी चाहिए। तभी बातें आगे बढ़ती हैं।



क्या बसपा से भी आपकी बातचीत चल रही है?

बातचीत तो सबसे चलती है। मैंने एक ही बात कही है कि हरियाणा हित की कोई बात करेगा तो बात आगे बढ़ेगी। फिलहाल अभी बसपा से कोई बातचीत नहीं हुई है। इनेलो अकेले ही चुनाव लड़ेगा।



चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में आप अपने बेटे को उतार सकते हैं।

बिल्कुल उतारेंगे। यह मेरा नहीं, बल्कि पार्टी का फैसला होगा। यदि पार्टी ने कहा तो जरूर कर्ण को चुनाव में उतारेंगे। अभी किसी के लिए कोई सीट नहीं देखी है।



चौधरी ओमप्रकाश चौटाला लोकसभा चुनाव में प्रचार करेंगे

चौटाला साहब हमारे से भी ज्यादा फिट हैं। वह आज भी 300-400 किलोमीटर का सफर रोज करते हैं। जब भी उन्हें अपने साथियों के सुख-दुख की खबर मिलती है तो वह जरूर जाते हैं। पिछले दिनों की देवगौड़ा साहब की तबियत खराब होने की खबर उन्हें मिली थी और वह उनसे मिलने बंगलूरू चले गए थे।



पिछले दिनों अपने राज्य की काफी यात्राएं की। क्या माहौल देखने को मिला?
लोग इस सरकार से खुश नहीं हैं। बुरा हाल है। सड़कें हैं नहीं। स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। युवा रोजगार के लिए बाहर जा रहे हैं। गांव के गांव खाली हो गए हैं। नौ लाख से ज्यादा लोगों के पीले राशन कार्ड काट दिए गए। छह लाख बुजुर्गों की पेंशन बंद कर दी। सीएम साहब जनसंवाद में जाते हैं और वहां पहले से बुजुर्गों को बैठा दिया जाता है। फिर कहते हैं कि सीएम साहब ने मौके पर ही पेंशन बना दी। सीएम ऐसी योजना क्यों नहीं बनाते, जिससे किसी की पेंशन बनने में दिक्कत ही न आए। चौधरी देवीलाल ने पेंशन के लिए कभी किसी की आय नहीं देखी, केवल उम्र देखी थी। कैसे बुढ़ापा पेंशन काटी जाए, इसके लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी दोषी हैं। हुड्डा ने विधानसभा में एक लाख 40 हजार की आय का कानून बनाया था। हमनें इसका विरोध किया और उस वक्त यह रुक गया, लेकिन भाजपा ने उसे लागू कर दिया। उसने एक लाख 40 हजार के बजाय एक लाख 80 हजार कर दिया।



भाजपा-जजपा गठबंधन पर आपकी क्या राय है। क्या यह दोस्ती लोकसभा चुनाव तक चलेगी?
लोग इस बार दोनों को नकार देंगे। चाहे गठबंधन के साथ लड़ें या अलग-अलग। सबको पता है कि यह लूट का गठबंधन था। इनके गठबंधन में तो कई घोटाले हुए हैं। शराब घोटाले की आज तक रिपोर्ट सामने नहीं आई। रजिस्ट्री घोटाला, दवा खरीद घोटाला और धान घोटाला किसी की जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती है। सब ठंडे बस्ते में डाल दी गईं। प्रदेश की जनता ने हमें मौका दिया तो हम इन घोटालों की जांच जरूर करवाएंगे और राज्य को लूटने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।


क्या भविष्य में जजपा के इनेलो विलय की संभावना है?

सवाल ही नहीं बनता।



देवीलाल की विरासत को लेकर अलग-अलग दावे होते हैं, उनकी विरासत कौन संभालेगा?
चौधरी देवीलाल के नाम पर वोट मांगना और उनकी नीतियों को आगे बढ़ाना दोनों में बहुत अंतर है। उनके नाम पर वोट तो मिल सकते हैं, लेकिन उनकी सोच को आगे बढ़ाना हर किसी के बस की बात नहीं है। विरासत को लेकर कोई भी दावे करे, मगर लोगों को पता है कि चौधरी देवीलाल की नीतियों को कौन आगे बढ़ा सकता है। इसीलिए लोग हमारे साथ हैं। ये लोग जो दस सीट जीत गए थे, भविष्य में कभी नहीं जीतेंगे। काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती। इन लोगों (जजपा) ने नूंह में चौधरी देवीलाल की एक प्रतिमा लगवाई थी। आप आज उसकी हालत देखो। बदतर हालत हो गई है उसकी। चौधरी देवीलाल के नाम पर जो पार्क बने हैं, उनकी हालत देखो। चौधरी देवीलाल के नाम पर केएमपी बना था, ये जिस दिन सत्ता में शामिल हुए थे, उन्हें यह बात रखनी चाहिए थी कि केएमपी का नाम बदलकर देवीलाल रखा जाए। मगर इन्होंने एक भी बार अपनी बात नहीं रखी। रणजीत सिंह चौटाला जो बिजली मंत्री हैं, खुद को देवीलाल का वारिस बताते हैं। जब ये कांग्रेस में थे तो देवीलाल के नाम पर बनी पानीपत थर्मल पावर प्लांट की एक यूनिट का नाम हुड्डा ने बदल दिया था। तब रणजीत चौटाला ने एक भी शब्द नहीं बोला। अब जब ये बिजली मंत्री है तब भी मैंने उनसे कहा था कि अब तो उसका नाम बदल दो, मगर नहीं बदला।



विधानसभा में अध्यक्ष के साथ आपकी बहस की काफी चर्चा रहती है।

मेरा ज्ञानचंद गुप्ता जी के साथ कोई व्यक्तिगत तकरार नहीं है। किसी सदस्य से भी कोई झगड़ा नहीं है। मैं अपनी बात तथ्यों के साथ विधानसभा में रखता हूं। यदि किसी सवाल पर सरकार कोई जानकारी छिपाती है तो सदस्य सवाल पूछेंगे ही। हर सवाल का मंत्री को जवाब देना चाहिए. लेकिन वह बोलते नहीं और अध्यक्ष जी उनके पक्ष में बोलकर उन्हें बचाने की कोशिश करते हैं। जबकि अध्यक्ष को विपक्ष को ज्यादा तवज्जो देनी चाहिए। हां जब कोई सीमाओं से बाहर जाकर बोले तो उसे जरूर समझाएं।
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