हरियाणा: सिर्फ दावों से मजबूत नहीं बनेंगे उद्योग, नीतियों संग ‘बूस्टअप’ की दरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा सरकार उद्योगों को मजबूती देने का दावा तो करती है, मगर इसके लिए औद्योगिक इकाइयों को ‘बूस्टअप’(प्रोत्साहन) देने में पीछे है। नई औद्योगिक नीतियां बनाने और उसे लागू करवाने में सरकार कुछ साल से व्यस्त जरूर है, मगर इन नीतियों का लाभ उद्योगों को कितनी आर्थिक मजबूती दे रहा है, इसकी समीक्षा भी होनी चाहिए। बड़े व छोटे उद्योग आज भी सरकार से बडे़ आर्थिक राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं।
शुक्रवार को मनोहर सरकार द्वारा पेश किए गए बजट ने भी उद्यमियों को खासा मायूस किया। उद्यमियों को आस थी कि केंद्र स्तर पर न सही, मगर राज्य सरकार अपने स्तर पर उद्यमियों को करों में कुछ राहत देते हुए बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा करेगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। सूबे में करीब 1.20 लाख सूक्ष्म और लघु उद्योग व 2415 मध्यम व बड़े उद्योग हैं। यह उद्योग हर साल हरियाणा से 98570.24 करोड़ से अधिक का एक्सपोर्ट करते हैं।
संघर्ष के दौर से गुजर रही एमएसएमई
हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व चेयरमैन एवं बड़े मिक्सी उद्यमी बाबू राजेंद्र नाथ बताते हैं कि माइक्रो इंडस्ट्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार उपलब्ध करवाने में अपना बड़ा योगदान देती है। सेक्टर की इंडस्ट्री का मजबूत होना जरूरी है। उस लिहाज से आज तक हक नहीं मिला है।
सरकार माइक्रो इंडस्टी को एमएसएमई की व्यवस्था से अलग करते हुए माइक्रो इंडस्ट्री के विकास के लिए अलग से बजट का प्रावधान करे। उद्यमी गुरुदत्त छिब्बर, राकेश गुप्ता, सुभाष चंद्र व अश्विनी गोयल बताते हैं कि राज्य में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग संघर्ष के दौर से गुजर रहे हैं। ये उद्योग जहां जीएसटी की पेंचीदिगीयों से लेकर बैंक लोन लेने तक कई तरह की उलझनों में फंसे हुए हैं, वहीं वे इकाइयां जो विदेशों में माल एक्सपोर्ट करती हैं, वे भी सरकार के कम एक्सपोर्ट इंसेंटिव के चलते मायूस हैं।
उनके अनुसार 30 से अधिक तरह के उद्योग हैं, जो लाखों लोगों को रोजगार भी देते हैं। उनके अनुसार ऐसे उद्योग आज के दौर में सरकार के बड़े आर्थिक राहत पैकेज के चलते ही मजबूत हो सकते हैं। मगर इस प्रदेश सरकार के इस बजट ने भी सूबे के उद्यमियों को मायूस किया है।
‘कल’ तो ठीक, मगर ‘आज’ की चिंता बहुत जरूरी
आर्थिक मामलों के जानकार प्रोफेस जेएस नैन बताते हैं कि बजट में उद्योग सेक्टर के लिए सरकार ने उपलब्धियों के साथ-साथ भावी योजनाओं का रोडमैप पेश किया है। यह कल की बात है। उद्योगों खासकर एमएसएमई (माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज) आज सरकार की ओर देख रही है। एमएमएमई उद्यमियों को बड़ी आर्थिक मदद चाहिए, क्योंकि मौजूदा औद्योगिक परिवेश में इन छोटे उद्योेगों को प्रतिस्पर्धा के इस दौर में खासा संघर्ष करना पड़ रहा है। इसलिए इन उद्योगों को आर्थिक मजबूती देना जरूरी है, ताकि इनसे जुड़ा रोजगार भी सुरक्षित रह सके।
चार साल: बस नीतियां ही बनी, नहीं हुई बड़ी घोषणा
वर्ष 2020-21 के बजट में वित्तमंत्री एवं सीएम मनोहर लाल ने उद्योग एवं वाणिज्य के लिए 349.30 करोड़ का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कारोबारी सुगमता रैंकिंग में हरियाणा देश में तीसरे व उत्तर भारत में पहले स्थान पर है। सीएम बोले, गत वर्ष हमने कृषि व्यवसाय और खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स एंड रिटेल, फार्मास्यूटिकल और एमएसएमई के लिए पांच क्षेत्र विशिष्ट नीतियां शुरू की। हम डाटा केंद्र नीति व विद्युत वाहन नीति बनाने पर काम कर रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों की कमी के बावजूद हमारा निर्यात बढ़ा है। इसमें भी हम पांचवें स्थान पर है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का अनुमानित बजट 349.30 करोड़ रखा गया है।
वर्ष 2019-20 के बजट में तत्कालीन वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि सरकार ने ऐतिहासिक नई उद्योग प्रोत्साहन नीति-2015 लागू की है। इसमें हम मेक इन इंडिया, डिजिटल हरियाणा व स्किल इंडिया अभियानों को प्रमोट करेंगे। कारोबारी सुगमता रैकिंग में हम बेहतर है। मिनी कलस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया है। कोई बड़ी घोषणा नहीं। उद्योग विभाग का अनुमानित बजट था 406.75 करोड़।
वर्ष 2018-19 के बजट में वित्तमंत्री ने बताया कि हमने औद्योगिक प्रोत्साहन के लिए सिंगल रूफ मैकेनिज्म की स्थापना की। प्रदेश के उद्योगों का निर्यात बढ़ा है। नई औद्योगिक नीतियां बनाई हैं। निवेश बढ़े इस ओर भी काम कर रहे हैं। मगर कोई बड़ी घोषणा नहीं। उद्योग विभाग का बजट था 399.86 करोड़
वर्ष 2017-18 के बजट में वित्तमंत्री ने बताया कि गत वर्ष 6.19 लाख करोड़ के निवेश के 407 समझौते हस्ताक्षर किए गए। इनमें से 86013 करोड़ के निवेश के समझौते क्रियान्वयनाधीन है। इससे 1.60 लाख रोजगार सृजन की संभावना है। दो साल में 12725 लघु, 266 मध्यम व बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं। 16780 करोड़ के निवेश के साथ 1.70 लाख लोगों को रोजगार मिला है। लेकिन इस साल भी कोई बड़ी घोषणा नहीं। उद्योग विभाग का अनुमानित बजट था 366.99 करोड़।