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'पहले देश के लिए पाक में नर्क में रहकर जिंदगी काटी, अब अपने हो गए पराए'

Wed, 03 May 2017 03:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 03 May 2017 03:21 PM IST
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indians protest at chandigarh against govt, who was prisoned in pakistan jail
पाकिस्तानी कैदियों का विरोध प्रदर्शन
नर्क में रहकर जिंदगी काटी और इस उम्मीद से खुद को बचाए रखा कि घर वापसी पर सम्मानित नजरों से देखा जाएगा। हुआ इसका उल्टा। भारत की सेवा में दुख सहे, अब यहीं पहचान नहीं मिल रही। ऐसी व्यथा लेकर कुछ लोग मंगलवार को गवर्नर से मदद की गुहार लगाने पहुंचे। ये लोग अखिल भारतीय भ्रष्टाचार निमूर्लन संघर्ष समिति के बैनर तले चंडीगढ़ पहुंचे थे।
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पीड़ितों में कुछ ऐसे थे, जो खुद पाकिस्तान की जेलों में रहकर आए हैं और कुछ ऐसे जिनका अपना कभी जेल से जिंदा लौटा ही नहीं। हालांकि सभी लोगों को गवर्नर हाउस से पहले सेक्टर-8 व 9 की डिवाइडिंग रोड पर रोक दिया गया और एक प्रतिनिधिमंडल को ज्ञापन के साथ पुलिस आगे लेकर गई। इस प्रदर्शन के दौरान करीब 15 मिनट तक सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया।
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हमें भी सैनिकों की तरह मदद दे सरकार
फिरोजपुर से आए गुरबक्श राम ने बताया कि वह इंडियन जासूस था और पाकिस्तान में पकड़े जाने के बाद 19 साल तक जेल में रहा। सजा काटकर वापस आया तो भारत सरकार हमें अपना मानने को तैयार नहीं है। वहीं उपेंद्र नाथ ने बताया कि उसने भी आठ साल पाकिस्तान में जेल काटी और एक  समझौते के तहत छोड़े गए कैदियों में भारत आया।
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अब सरकार अपने पूर्व जासूसों को मानने के लिए तैयार ही नहीं है। जबकि हमने भी एक सैनिक की तरह काम किया और हमें भी सरकार से वैसे ही मदद मिलनी चाहिए जो एक सैनिक को मिलती है। इस दौरान कुलभूषण जैसे पाकिस्तान में बंद अन्य कैदियों को रिहा करने की मांग रखी गई।


देवर को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ रही भाभी
24 साल पाकिस्तान की जेल में सजा काटने वाले पूर्व एजेंट गुरदासपुर निवासी कृपाल सिंह की पिछले साल जेल में मौत हो गई थी। अब उसकी भाभी कमलेश ने इंसाफ के लिए लड़ाई शुरू की हुई है। कमलेश ने कहा कि उसका देवर तो जिंदा लौट नहीं सका, लेकिन कम से कम उसे शहीद मानते हुए सरकार को मदद करनी चाहिए।
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