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पाक में भारतीयों को थाने में हाजिरी देना जरूरी, जासूस की नज़रों से जाता है देखा
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Thu, 15 Jun 2017 09:25 AM IST
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पाकिस्तान जाने वाले भारतीय मुसाफिरों को सुबह-शाम थाने में हाजिरी देना लाजिमी कर दिया गया है। भारतीय नागरिकों को स्पष्ट आदेश दिए जा रहे हैं कि शहर छोड़ने से पहले उन्हें नजदीकी थाने में सूचना देनी होगी। ऐसा न करने पर भारतीय नागरिकों को पनाह देने वालों के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज कर रही है। यही वजह है कि पाकिस्तान जाने वाले भारतीय मुसाफिरों की परेशानी बढ़ गई है।
लाहौर से लौटे दिल्ली के अब्दुल गफ्फार ने बताया कि पाक में प्रत्येक भारतीय को जासूस की नजर से देखा जाता है। पाक पहुंचते ही वहां के खुफिया तंत्र से जुड़े लोग उनका पल-पल पीछा करते हैं। मुसाफिरों की जासूसी की जाती है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही पाकिस्तान में प्रत्येक भारतीय नागरिक की निगरानी की जा रही है। भारतीय मुसाफिरों को चेकिंग के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
इस मामले में इंडो-पाक ह्यूमन राइट एसोसिएशन के संरक्षक सुरिंदर कोछड़ का कहना है कि दोनों मुल्कों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों का असर दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही और व्यापार पर भी पड़ता है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से दोनों मुल्कों के बीच रिश्तों में तल्खी और बढ़ी है, व्यापार भी प्रभावित हुआ है।
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लाहौर से लौटे दिल्ली के अब्दुल गफ्फार ने बताया कि पाक में प्रत्येक भारतीय को जासूस की नजर से देखा जाता है। पाक पहुंचते ही वहां के खुफिया तंत्र से जुड़े लोग उनका पल-पल पीछा करते हैं। मुसाफिरों की जासूसी की जाती है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही पाकिस्तान में प्रत्येक भारतीय नागरिक की निगरानी की जा रही है। भारतीय मुसाफिरों को चेकिंग के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
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इस मामले में इंडो-पाक ह्यूमन राइट एसोसिएशन के संरक्षक सुरिंदर कोछड़ का कहना है कि दोनों मुल्कों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों का असर दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही और व्यापार पर भी पड़ता है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से दोनों मुल्कों के बीच रिश्तों में तल्खी और बढ़ी है, व्यापार भी प्रभावित हुआ है।
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समझौता एक्सप्रेस में घटे मुसाफिर
समझौता एक्सप्रेस
- फोटो : File Photo
इंडो-पाक चेंबर ऑफ कामर्स के महासचिव राजेश सेतिया कहते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच बिगड़ते रिश्तों का असर दोनों मुल्कों के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस पर पड़ रहा है।
पिछले दो महीने में समझौता एक्सप्रेस में मुसाफिरों की कमी का आलम यह है कि गिनती कम होते-होते 34 तक पहुंच चुकी है। सीमा पर चल रही गोलियों ने दोनों मुल्कों के कारोबार को छलनी कर दिया है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि दोनों मुल्कों के बीच महज पत्थर, सीमेंट और जड़ी-बूटी का ही व्यापार जारी है।
पिछले दो महीने में समझौता एक्सप्रेस में मुसाफिरों की कमी का आलम यह है कि गिनती कम होते-होते 34 तक पहुंच चुकी है। सीमा पर चल रही गोलियों ने दोनों मुल्कों के कारोबार को छलनी कर दिया है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि दोनों मुल्कों के बीच महज पत्थर, सीमेंट और जड़ी-बूटी का ही व्यापार जारी है।