{"_id":"604d23fc8ebc3e5926537e63","slug":"indian-farmers-are-struggling-to-make-their-model-chandigarh-news-pkl40704753","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि को बचाने के लिए ऐसा करें अर्थशास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि को बचाने के लिए ऐसा करें अर्थशास्त्री
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। हमारे अर्थशास्त्रियों को फेल विदेशी कृषि मॉडलों को अपनाने की बजाय अपने देश के अनुरूप नया मॉडल बनाना चाहिए। हमारे देश की कृषि अर्थव्यवस्था दूसरे देशों से अलग है। हमारी अलग समस्याएं हैं, हमें उन्हें ध्यान में रखकर काम करना चाहिए। आज भारतीय किसान अपने नए मॉडल के लिए संघर्ष कर रहा है। वह अपनी फसल के लिए तय दाम की मांग कर रहा है। ये बातें पंजाब कला भवन में आयोजित किरती किसान फोरम की ओर से आयोजित किसान संघर्ष चर्चा में कृषि विशेषज्ञ डॉ. देविदंर शर्मा ने कहीं।
किरती किसान फोरम की ओर से किसान आंदोलन भविष्य और संभावनाओं पर शनिवार को चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, सेना के अफसर और कानून के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान ब्रिगेडियर इंदर मोहन सिंह ने बताया कि सरकार को ग्रामीण क्षेत्र में खेती के साथ किसानों के लिए छोटे उद्योग शुरू करवाने की जरूरत है। इसके साथ ही किसान को खेती के साथ उससे जुड़े कारोबार करने चाहिएं, तभी वह सफल हो पाएगा।
कविता से बयां किया किसानी संघर्ष
सेवानिवृत्त आईएएस एसआर लधार ने किसान प्रदर्शन को कवि दुष्यंत कुमार की कविता के साथ जोड़कर बयां कि या। उन्होंने कहा कि हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए, आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि यह बुनियाद हिलनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
किरती किसान फोरम की ओर से किसान आंदोलन भविष्य और संभावनाओं पर शनिवार को चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, सेना के अफसर और कानून के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान ब्रिगेडियर इंदर मोहन सिंह ने बताया कि सरकार को ग्रामीण क्षेत्र में खेती के साथ किसानों के लिए छोटे उद्योग शुरू करवाने की जरूरत है। इसके साथ ही किसान को खेती के साथ उससे जुड़े कारोबार करने चाहिएं, तभी वह सफल हो पाएगा।
विज्ञापन
कविता से बयां किया किसानी संघर्ष
सेवानिवृत्त आईएएस एसआर लधार ने किसान प्रदर्शन को कवि दुष्यंत कुमार की कविता के साथ जोड़कर बयां कि या। उन्होंने कहा कि हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए, आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि यह बुनियाद हिलनी चाहिए।
विज्ञापन