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ड्रैगन को सबक सिखाने को भारत तैयार, वायुसेना की अभेद्य मोर्चाबंदी, इंतजार है ते बस आदेशों का
Fri, 19 Jun 2020 12:09 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 19 Jun 2020 12:09 PM IST
सार
- वेस्टर्न एयर कमांड के अंतर्गत एयरफोर्स तैयारी में जुटे
- अभ्यास कर रहे हैं लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर
- उत्तरी भारत के सभी वायुसेना स्टेशन हाईअलर्ट पर
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फाइल फोटो
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विस्तार
चीन के साथ चल रही तनातनी के बीच सेना के साथ-साथ वेस्टर्न एयर कमांड के तहत सभी एयरफोर्स स्टेशन भी हाईअलर्ट पर हैं। ड्रैगन से निपटने के लिए ग्लैडिएटर्स, फ्लाइंग टैंक (अपाचे 64-ई), फ्लाइंग लांसर (सुखोई 30 एमकेआई), होवेरिंग हॉक्स (मंडराते बाज़), कंडोर्स (गिद्ध), सियाचीन टाइगर्स, हिमालयन ड्रैगंस, कैमल, स्नो टाइगर, वोल्फ पैक (मिराज 2000) इत्यादि नामों से पहचाने जाने वाली इंडियन एयरफोर्स की विभिन्न स्क्वाड्रन तैयार है।
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वेस्टर्न एयर कमांड के अंतर्गत विभिन्न एयरफोर्स स्टेशनों में तैनात इन स्क्वाड्रन ने अपनी कमर कस ली है और यहां तैनात लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और मालवाहक विमानों ने एक्सरसाइज के साथ अपनी मूवमेंट भी शुरू कर दी है। दुश्मन से निपटने की रणनीतिक मोर्चाबंदी के लिहाज से यदि देखा जाए। तो उत्तरी क्षेत्र में एलओसी (पाक बॉर्डर) हो या एलएसी (चीन बॉर्डर) इन सरहदों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेवारी वेस्टर्न एयर कमांड के कंधों पर ही है।
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इसी को देखते हुए इंडियन एयरफोर्स ने इन क्षेत्रों में विभिन्न एयरपोर्ट स्टेशनों पर तैनात कई स्क्वाड्रन के माध्यम से अभेद्य मोर्चाबंदी तैयार कर रखी है।
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इसी को देखते हुए इंडियन एयरफोर्स ने इन क्षेत्रों में विभिन्न एयरपोर्ट स्टेशनों पर तैनात कई स्क्वाड्रन के माध्यम से अभेद्य मोर्चाबंदी तैयार कर रखी है।
इस तरह मजबूत है सरहद की किलेबंदी
वेस्टर्न एयर कमांड के अंतर्गत स्पेशल एयर ऑपरेशन सेंटर यानी स्काई लार्ड हिंडन एयरफोर्स स्टेशन में है।
उसके बाद अंबाला एयरफोर्स स्टेशन, चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन, पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन, आदमपुर एयरफ़ोर्स स्टेशन, श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन, सरसावा एयरफ़ोर्स स्टेशन, सिरसा एयरफोर्स स्टेशन, मोहनबाड़ी एयरपोर्ट स्टेशन, लेह एयरफोर्स स्टेशन, उधमपुर एयरफोर्स स्टेशन, श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन, हलवारा एयरफोर्स स्टेशन के साथ-साथ बरेली, आगरा और ग्वालियर एयरपोर्ट स्टेशन भी रणनीतिक दृष्टि से दुश्मनों से निपटने और सरहदों की सुरक्षा के लिए अपनी अहम भूमिका रखते हैं।
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इन एयरफ़ोर्स स्टेशनों पर अपाचे, चिनूक, मिराज-2000, सुखोई 30 एमकेआई, मिग 21 बायसन, जगुआर आईएस एंड आईबीएस, ध्रुव, एएन-32, मिग 29 यूपीजी, आईएल-76 एमडी, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस, बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर, एएलएच एमके 111, एमआई-17 (एमआईएल), एमआई 17वी5, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और मालवाहक जहाजों की विभिन्न स्क्वाड्रन तैनात हैं। जो दुश्मनों के दांत खट्टे करने में सक्षम भी हैं और तैयार भी।
उसके बाद अंबाला एयरफोर्स स्टेशन, चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन, पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन, आदमपुर एयरफ़ोर्स स्टेशन, श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन, सरसावा एयरफ़ोर्स स्टेशन, सिरसा एयरफोर्स स्टेशन, मोहनबाड़ी एयरपोर्ट स्टेशन, लेह एयरफोर्स स्टेशन, उधमपुर एयरफोर्स स्टेशन, श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन, हलवारा एयरफोर्स स्टेशन के साथ-साथ बरेली, आगरा और ग्वालियर एयरपोर्ट स्टेशन भी रणनीतिक दृष्टि से दुश्मनों से निपटने और सरहदों की सुरक्षा के लिए अपनी अहम भूमिका रखते हैं।
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बातचीत से ही निकलेगा हल, मगर ताकत का एहसास कराना जरूरी
रक्षा विशेषज्ञ ग्रुप कैप्टन सतीश भाटिया का कहना है कि चीन के साथ आज जिस तरह के हालात बने हुए हैं। उसका हल बातचीत से ही संभव हो सकता है। महामारी के दौर में भारत किसी भी प्रकार का युद्ध नहीं झेल सकता। पाकिस्तान की तरह चीन भी भरोसे लायक नहीं है। इसलिए सरकार को उस पर अब बहुत ज्यादा दबाव बनाना होगा।
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रक्षा विशेषज्ञ फ्लाइट लेफ्टिनेंट रेनू लांबा ने बताया कि इस विवाद का हल तो बातचीत से ही संभव लगता है। मगर चीन को अपनी ताकत का एहसास कराना जरूरी है। भारत सरकार को इकोनॉमिक बॉयकॉट की दिशा में भी सोचना चाहिए, ताकि चीन किसी भी तरह की गलतफहमी में न रहे।
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