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Chandigarh: सरहद पार से घुसपैठ रोकेंगे एआई से लैस स्वदेशी ड्रोन, इजराइल पर निर्भरता भी होगी खत्म

Fri, 25 Aug 2023 08:36 AM IST
निवेदिता वर्मा शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 25 Aug 2023 08:36 AM IST
सार

सैन्य सूत्रों के मुताबिक, ये ड्रोन आधुनिक हथियारों के साथ अब पहाड़ी और जटिल क्षेत्रों की निगरानी में काफी मददगार साबित होंगे। सरहद पर पाक और चीन ड्रोन का उपयोग जासूसी के लिए भी कर रहे हैं।

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Indian Army will take help of Artificial Intelligence to stop infiltration from across border
ड्रोन। - फोटो : फाइल

विस्तार

सीमा पार से घुसपैठ रोकने के लिए अब भारतीय सेना आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद लेगी। एआई से लैस स्वदेशी ड्रोन सरहद की निगहबानी करेंगे। खास बात यह है कि इससे इजराइल पर भारतीय सेना की निर्भरता भी खत्म होगी क्योंकि अब तक पाक-चीन सीमा पर इजरायल निर्मित ड्रोन का ही इस्तेमाल हो रहा है। एआई तकनीक वाले अत्याधुनिक ड्रोन डीआरडीओ के सहयोग से बनाए जा रहे हैं।
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चंडीगढ़ स्थित डीआरडीओ की प्रयोगशाला में पहले ही आधुनिक तकनीक से लैस रुस्तम यूएवी का निर्माण हो चुका है, जिसका इस्तेमाल सेना कर रही है। ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से लगातार नशा और अवैध हथियारों की तस्करी हो रही है। इससे निपटने के लिए सेना ने अब नई तकनीक अपनाने की तैयारी कर ली है। 
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जीरकपुर स्थित इंजीनियर ब्रिगेड के एक उच्च सैन्य अधिकारी ने बताया कि सेना डीआरडीओ की मदद से एआई तकनीक अपना रही है, जिसकी मदद से सरहद पर निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। भारत-पाकिस्तान और चीन सीमा पर एआई तकनीक से लैस आधुनिक ड्रोन भारतीय सेना के ‘कवच’ बनेंगे। इन ड्रोन के जरिए न केवल सीमा पार से हो रही आतंकी घुसपैठ पर निगरानी रखी जा सकेगी बल्कि घुसपैठियों को मुंहतोड़ जवाब भी दिया जाएगा।


सैन्य सूत्रों के मुताबिक, ये ड्रोन आधुनिक हथियारों के साथ अब पहाड़ी और जटिल क्षेत्रों की निगरानी में काफी मददगार साबित होंगे। सरहद पर पाक और चीन ड्रोन का उपयोग जासूसी के लिए भी कर रहे हैं। दोनों देशों द्वारा सैन्य प्रतिष्ठानों सहित अन्य बुनियादी ढांचे और संवेदनशील जानकारियां एकत्रित करने की नाकाम कोशिश की जाती है। वहीं, एआई के जरिए भारतीय सेना सीमा पार हो रही गतिविधियों का सटीक विश्लेषण कर रही है, जिससे निगरानी तंत्र मजबूत हो रहा है।

डीआरडीओ और स्वदेशी कंपनियां बना रहीं हैं ड्रोन
सेना के उच्चाधिकारियों के मुताबिक, सीमा पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए डीआरडीओ और स्वदेशी कंपनियां आधुनिक ड्रोन का निर्माण कर रहीं हैं। डीआरडीओ द्वारा ड्रोन के खतरे से निपटने की तकनीक भी विकसित की जा रही है। सुरक्षा बलों द्वारा ड्रोन का उपयोग निगरानी, टोही और आक्रामक अभियानों के साथ-साथ दूरदराज के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रसद सहायता पहुंचाने के लिए भी किया जा रहा है।
 
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