फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   indian army surgical strike in pok, border villages people not ready to left house without animals

सर्जिकल स्ट्राइकः जानवरों के बिना गांव नहीं छोड़ना, चाहे जान देनी पड़े

Sun, 02 Oct 2016 09:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अबोहर(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, अबोहर(पंजाब) Updated Sun, 02 Oct 2016 09:03 AM IST
विज्ञापन
indian army surgical strike in pok, border villages people not ready to left house without animals
सर्जिकल स्ट्राइक के चलते हाईअलर्ट के बाद सुरक्षित ठिकानों की ओर जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
भारत पाक में तनाव के चलते बॉर्डर से सटे गांव खाली करने के आदेश जारी हुए हैं, लेकिन लोग अपने घर छोड़कर जाने को तैयार नहीं हैं। पंजाब के फाजिल्का जिले में 26 शरणार्थी कैंप बनाए गए हैं, लेकिन उनमें पालतू मवेशियों को रखने की व्यवस्था न होने के कारण सीमावर्ती गांव के किसान शिविरों में जाने को तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन


किसानों का कहना है कि मवेशियों के बिना उनकी आजीविका ठप हो जाएगी। इससे बेहतर तो वे सेना का साथ देते हुए देश के लिए अपनी जान देना पसंद करेंगे। गांव चूहड़ीवाला धन्ना के राहत शिविर इंचार्ज नायब तहसीलदार विपन कुमार ने इसे प्रमुख समस्या मानते हुए जिला उपायुक्त से बात करने का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन


चूहड़ीवाला धन्ना के राहत शिविर में अब तक गांव कोयलखेड़ा, रूपनगर, बारेकां और बकैनवाला के करीब 95 परिवारों के 600 लोग दाखिल हो चुके हैं। स्थिति यह है कि बिना पशुधन के शिविर में आए ये लोग सुबह होते ही गांवों में चले जाते हैं और दिनभर अपने पशुओं व फसलों की देखभाल करके रात के समय शिविर में आ जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

राहत कैंपों में मवेशियों को रखने की कोई व्यवस्था नहीं

indian army surgical strike in pok, border villages people not ready to left house without animals
इंडो पाक बॉर्डर पर हाईअलर्ट के चलते लोगों ने छोड़ा गांव - फोटो : अमर उजाला
गांव रूपनगर के सरपंच महेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार ने शरणार्थियों की कीमती मवेशियों के रखने का कोई प्रबंध नहीं किया है। वहीं किसान मवेशी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

शिविर में पहुंचे प्रवीण कुमार चाहर, महेन्द्र नंबरदार, देविन्द्र भोभिया तथा महावीर पंच ने बताया कि बिना पशुधन और घरेलू सामान के वे जीते-जी मर जाएंगे। इससे पहले 65, 71 और कारगिल युद्ध के समय भी वे पूरी तरह से उजड़ चुके हैं। कैंप इंचार्ज नायब तहसीलदार विपन कुमार ने बताया कि भले ही कैंप में मवेशियों के रखने का प्रबंध नहीं है और न ही सरकार ने पशुओं को संभालने के आदेश दिए हैं।

शिविरार्थियों परिवारों का एक सदस्य दिन के समय गांव में जाकर पशुओं की देखभाल करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक इंसानी नुकसान बचाने का प्रबंध किया है लेकिन समस्या को देखते हुए प्रशासन कोई व्यवस्था कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed