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लेह-लद्दाख में सरहद पर कैसे रहते हैं जवान, सुनेंगे तो गर्व होगा उनपर
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
Updated Tue, 08 Nov 2016 09:11 AM IST
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लेह लद्दाख में भारतीय सेना के जवानो की लाइफ
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पीओके और चीन बार्डर पर दुर्गम बर्फीली चोटियों पर जवान सरहद की निगहबानी कैसे करते हैं, बताया चीफ एयर मार्शल ने। एयरफोर्स की वेस्टर्न कमांड के चीफ एयर मार्शल एसबी देव ने लेह व लद्दाख के विपरीत माहौल में ड्यूटी देने वाले एयरफोर्स के जवानों व पॉयलट्स के अनुभव ‘अमर उजाला’ से सांझे किए।
उन्होंने कहा कि मैदानी इलाकों में दुश्मन से निपटने के लिए इंडियन एयरफोर्स हमेशा तैयार रहती है, लेकिन यदि सरहद की निगहबानी लेह व लद्दाख जैसे इलाकों में हो तो चुनौतियां और परिस्थितियां पूरी तरह से जिंदगानी के खिलाफ होती हैं। उसके बावजूद इंडियन एयरफोर्स के जवान और पॉयलट्स इस बर्फीले इलाके में सरहद की रक्षा के लिए डटे हुए हैं।
ये पूरा इलाका पीओके और चीन बार्डर से घिरा हुआ है, इसलिए यहां भी सबसे ज्यादा बार्डर टेंशन रहती है। इन दुर्गम बर्फीली चोटियों पर एयरफोर्स के इन्हीं जवानों व पॉयलट्स की जान जोखिम में डालकर अपनी सरहदों की रक्षा करने संबंधी कार्यप्रणाली को इंडियन एयरफोर्स के अफसर खूब सराहते हैं। सीनियर अफसरों का कहना है कि ऐसे जांबाजों पर इंडियन एयरफोर्स को हमेशा नाज था, है और रहेगा।
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उन्होंने कहा कि मैदानी इलाकों में दुश्मन से निपटने के लिए इंडियन एयरफोर्स हमेशा तैयार रहती है, लेकिन यदि सरहद की निगहबानी लेह व लद्दाख जैसे इलाकों में हो तो चुनौतियां और परिस्थितियां पूरी तरह से जिंदगानी के खिलाफ होती हैं। उसके बावजूद इंडियन एयरफोर्स के जवान और पॉयलट्स इस बर्फीले इलाके में सरहद की रक्षा के लिए डटे हुए हैं।
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ये पूरा इलाका पीओके और चीन बार्डर से घिरा हुआ है, इसलिए यहां भी सबसे ज्यादा बार्डर टेंशन रहती है। इन दुर्गम बर्फीली चोटियों पर एयरफोर्स के इन्हीं जवानों व पॉयलट्स की जान जोखिम में डालकर अपनी सरहदों की रक्षा करने संबंधी कार्यप्रणाली को इंडियन एयरफोर्स के अफसर खूब सराहते हैं। सीनियर अफसरों का कहना है कि ऐसे जांबाजों पर इंडियन एयरफोर्स को हमेशा नाज था, है और रहेगा।
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बर्फीली चोटियां में अचानक गायब हो जाते हैं एयरक्राफ्ट
लेह लद्दाख में भारतीय सेना के जवानो की लाइफ
लेह व लद्दाख में बार्डर एरिया की निगरानी करने वाले इंडियन एयरक्राफ्ट कब अचानक गायब हो जाएं, कब उनका सिगनल कंट्रोल रूम से कट जाएं, इसकी प्रबल संभावनाएं बनी रहती हैं। एयर मार्शल एसबी देव बताते हैं कि पहले तो वहां के क्लाइमेट में एयरक्राफ्ट की उड़ान ही बहुत मुश्किल होती है।
कब बर्फबारी हो जाए, कब बर्फीले तूफान आ जाएं, कुछ नहीं मालूम। एक बार एयरक्राफ्ट उड़ान भरकर सरहद की निगेहबानी के लिए जाता है, तो हमेशा उसके सकुशल लौटने की टेंशन बनी रहती है।
इसी तरह कई बार गंभीर हादसे हो जाते हैं और ऐसे ही हादसों में अभी तक चौदह पॉयलट्स अपनी जान भी गवा चुके हैं। लेकिन फिर भी एयरफोर्स के जांबाज अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए इस खतरनाक मौसम से लड़कर दुश्मनों से देश की रक्षा करते हैं।
कब बर्फबारी हो जाए, कब बर्फीले तूफान आ जाएं, कुछ नहीं मालूम। एक बार एयरक्राफ्ट उड़ान भरकर सरहद की निगेहबानी के लिए जाता है, तो हमेशा उसके सकुशल लौटने की टेंशन बनी रहती है।
इसी तरह कई बार गंभीर हादसे हो जाते हैं और ऐसे ही हादसों में अभी तक चौदह पॉयलट्स अपनी जान भी गवा चुके हैं। लेकिन फिर भी एयरफोर्स के जांबाज अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए इस खतरनाक मौसम से लड़कर दुश्मनों से देश की रक्षा करते हैं।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट हस्तीकर ने दी मौत को मात
लेह लद्दाख में भारतीय सेना के जवानो की लाइफ
मौसम से लड़ते हुए यहां कई जांबाज शहीद हो जाते हैं। लेकिन एयरफोर्स के फ्लाइट लेफ्टिनेंट हस्तीकर ने यहां बर्फीली चोटियों के इस मौसम को मात दी है। एयर मार्शल एसबी देव बताते हैं कि वे भी मौसम की वजह से हुए हादसे का शिकार हो गए थे, बमुश्किल उन्हे ढूंढकर अस्पताल तक पहुंचाया गया, करीबन चार साल तक वे कौमा में रहे।
लेकिन उसके बाद भी वे जीवित रहे और इंडियन एयरफोर्स ने अपने इस जांबाज फ्लाइट लेफ्टिनेंट को सेवारत रखा हुआ है, आज वे दिल्ली में एयरफोर्स के म्यूजियम में कार्यरत हैं। उनके अनुसार ऐसी विपरित प्राकृतिक परिस्थितियों में काम करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन फिर भी जांबाज सरहद की रक्षा के लिए डटे हुए हैं।
लेकिन उसके बाद भी वे जीवित रहे और इंडियन एयरफोर्स ने अपने इस जांबाज फ्लाइट लेफ्टिनेंट को सेवारत रखा हुआ है, आज वे दिल्ली में एयरफोर्स के म्यूजियम में कार्यरत हैं। उनके अनुसार ऐसी विपरित प्राकृतिक परिस्थितियों में काम करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन फिर भी जांबाज सरहद की रक्षा के लिए डटे हुए हैं।