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गुरदासपुरः भीख मांग कर गुजारा कर रही फौजी की बेटी की अब मिलेगी मासिक पेंशन, एरियर भी मिला
Mon, 31 Aug 2020 10:31 AM IST
खुशबू गोयल
मनन सैनी, गुरदासपुर(पंजाब)
मनन सैनी, गुरदासपुर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 31 Aug 2020 10:31 AM IST
सार
- सेना की 21 सब एरिया के वेटर्न सहायता केंद्र के प्रयासों से शकुंतला देवी को मिला हक
- साल 1978 में पिता की हो गई थी मौत, 12 साल पहले पति भी हो गया था लापता
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पेंशन के कागजात दिखाती शकुंतला देवी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भीख मांग कर गुजारा करने वाली एक फौजी की बेटी को सेना की ओर से मासिक पेंशन के साथ-साथ करीब सात लाख रुपये का एरियर दिया गया है। यह सेना की 21 सब एरिया के वेटर्न सहायता केंद्र के प्रयासों से संभव हुआ है। पंजाब के गुरदासपुर में स्थित दीनानगर के वार्ड 9 स्थित हरिजन कालोनी की 55 वर्षीय महिला शकुंतला देवी के सिख रेजीमेंट में तैनात पिता सिपाही सेवा राम का 12 मार्च 1978 में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया था।
मां ने 2008 में बेटी की शादी की। शादी के कुछ दिन बाद ही उसका पति भी लापता हो गया। इसके बाद शकुंतला देवी अपने मायके में रहने लगी। कुछ समय बाद मां और फिर दो भाइयों की भी मौत हो गई। आमदनी का कोई साधन न होने पर वह और उसका भाई भीख मांग कर अपना गुजारा करने लगे। सेना के नियमों के अनुसार, किसी सैनिक की मौत होने के बाद उसकी पत्नी के बाद अविवाहित अथवा विधवा बेटी को पेंशन की सुविधा मिलती है।
इसके लिए उसने कई बार गुरदासपुर में जिला रक्षा सेवाएं भलाई विभाग में पिता के आश्रित होने की पेंशन की सुविधा हासिल करने के लिए गुहार लगाई, लेकिन पति के लापता होने व कोई मृत प्रमाणपत्र न होने के कारण वहां से कोई जवाब नहीं मिला।
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मां ने 2008 में बेटी की शादी की। शादी के कुछ दिन बाद ही उसका पति भी लापता हो गया। इसके बाद शकुंतला देवी अपने मायके में रहने लगी। कुछ समय बाद मां और फिर दो भाइयों की भी मौत हो गई। आमदनी का कोई साधन न होने पर वह और उसका भाई भीख मांग कर अपना गुजारा करने लगे। सेना के नियमों के अनुसार, किसी सैनिक की मौत होने के बाद उसकी पत्नी के बाद अविवाहित अथवा विधवा बेटी को पेंशन की सुविधा मिलती है।
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इसके लिए उसने कई बार गुरदासपुर में जिला रक्षा सेवाएं भलाई विभाग में पिता के आश्रित होने की पेंशन की सुविधा हासिल करने के लिए गुहार लगाई, लेकिन पति के लापता होने व कोई मृत प्रमाणपत्र न होने के कारण वहां से कोई जवाब नहीं मिला।
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वेटर्न सहायता केंद्र के इंचार्ज कर्नल एमएस राणा से मांगी मदद
2018 में शकुंतला देवी पठानकोट में सेना के 21 सब एरिया के वेटर्न सहायता केंद्र के इंचार्ज कर्नल एमएस राणा के पास मदद के लिए पहुंची। कर्नल राणा ने पाया कि पति के मृत प्रमाणपत्र के आधार पर उसे पिता की फैमिली पेंशन का लाभ मिल सकता है। इसके लिए उन्होंने उसे अदालत में भेजा और जनवरी 2019 में अदालत ने 12 वर्ष से गुम उसके पति की गुमशुदगी के आधार पर प्रीज्यूम डेड सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
दीनानगर काउंसिल ने अदालत के आदेश के बावजूद एक साल तक सर्टिफिकेट जारी नहीं किया तो कर्नल राणा ने फिर उसकी मदद की और उसके केस को तैयार करके पेंशन की स्वीकृति के लिए यूनिट सेंटर रामगढ़ भेजा। कर्नल राणा की मेहनत और शकुंतला देवी की वर्षों की दौड़धूप रंग लाई और करीब 21 हजार रुपए मासिक फैमिली पेंशन स्वीकृत होने के साथ उसे करीब सात लाख रुपए पिछला एरियर जारी हो पाया है।
कर्नल राणा ने शकुंतला देवी को अपने कार्यालय में जब पेंशन और एरियर के कागजात सौंपे तो उसकी आंखों से आंसू बह निकले। भरे गले से शंकुतला ने कहा कि वह 21 सब एरिया और कर्नल राणा की जीवन भर ऋणी रहेगी। शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने बताया कि 21 सब एरिया में जब से वेटर्न सहायता केंद्र स्थापित किया गया है तब से कई पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों, वीर नारियों और शहीद परिवारों को उनका बनता हक दिलाने में उल्लेखनीय कार्य किया है।
दीनानगर काउंसिल ने अदालत के आदेश के बावजूद एक साल तक सर्टिफिकेट जारी नहीं किया तो कर्नल राणा ने फिर उसकी मदद की और उसके केस को तैयार करके पेंशन की स्वीकृति के लिए यूनिट सेंटर रामगढ़ भेजा। कर्नल राणा की मेहनत और शकुंतला देवी की वर्षों की दौड़धूप रंग लाई और करीब 21 हजार रुपए मासिक फैमिली पेंशन स्वीकृत होने के साथ उसे करीब सात लाख रुपए पिछला एरियर जारी हो पाया है।
कर्नल राणा ने शकुंतला देवी को अपने कार्यालय में जब पेंशन और एरियर के कागजात सौंपे तो उसकी आंखों से आंसू बह निकले। भरे गले से शंकुतला ने कहा कि वह 21 सब एरिया और कर्नल राणा की जीवन भर ऋणी रहेगी। शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने बताया कि 21 सब एरिया में जब से वेटर्न सहायता केंद्र स्थापित किया गया है तब से कई पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों, वीर नारियों और शहीद परिवारों को उनका बनता हक दिलाने में उल्लेखनीय कार्य किया है।