फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   India self-reliant in construction of temporary bridge for army Defense Research and Development Organization

कामयाबी: अब देश में ही बनेंगे सेना के लिए अस्थायी पुलों के पुर्जे, पहले रूस और चेकोस्लोवाकिया से करते थे आयात

Thu, 31 Aug 2023 10:16 AM IST
शाहरुख खान शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 31 Aug 2023 10:16 AM IST
सार

अब देश में ही सेना के लिए अस्थायी पुलों के पुर्जे बनेंगे। पहले रूस और चेकोस्लोवाकिया से आयात करते थे। लेकिन अब डीआरडीओ के सहयोग से देश में ही एलएंडटी कंपनी इनका निर्माण कर रही है। जीरकपुर में टेस्टिंग हो रही है। सेना की चंडीगढ़ शाखा में उत्पाद पहुंच गए हैं। 

विज्ञापन
India self-reliant in construction of temporary bridge for army Defense Research and Development Organization
एएसबीएस तकनीक से बना पुल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से डिजाइन और विकसित शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम (एसएसबीएस) से सेना की विदेश पर निर्भरता खत्म हो गई है। 
विज्ञापन


कुछ ही घंटों में 300 मीटर तक लंबा और चार मीटर चौड़ा पुल तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला सामान अब देश में ही बनने लगा है। पहले इसके स्पेयर पार्ट्स रूस और चेकोस्लोवाकिया से आयात किए जाते थे, लेकिन अब डीआरडीओ के सहयोग से देश में ही एलएंडटी कंपनी इनका निर्माण कर रही है। 

खास बात यह है कि भारतीय सेना इन उत्पादों को एमएसएमई के तहत खरीदने की तैयारी कर रही है, ताकि मध्यम और लघु उद्योगों की आर्थिकी भी सुदृढ़ रहे। शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम डीआरडीओ इंजीनियरिंग लैब के रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट विंग ने तैयार किया है। 
विज्ञापन


जीरकपुर स्थित खड़का सैपर्स इंजीनियर ब्रिगेड में प्रशिक्षण के लिए सेना स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल कर रही है। ब्रिगेड के कर्नल धीरज पोहड़ ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के तहत अब सेना कई चीजों के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रही है। ड्रोन से लेकर शॉट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम तक भारत में बनने लगे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या है एसएसबीएस, कैसे करता है काम
डीआरडीओ की प्रमुख इंजीनियरिंग प्रयोगशाला, अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियरिंग) पुणे ने एलएंडटी लिमिटेड के सहयोग से इस प्रणाली को डिजाइन और विकसित किया है। इनका प्रयोग सेना युद्ध के दौरान आर्मर टैंकों समेत अन्य सैन्य वाहनों की आवाजाही के लिए करती है।

साथ ही आपदाग्रस्त इलाकों में भी सेना द्वारा इस तरह के पुल बनाए जाते हैं। इस प्रणाली से सैनिकों की त्वरित आवाजाही में मदद के साथ संसाधनों की गतिशीलता बढ़ी है। डीआरडीओ के पास मिलिट्री ब्रिजिंग सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण कॉम्बैट इंजीनियरिंग सिस्टम विकसित करने का व्यापक अनुभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed