मोदी की पहली हाईस्पीड ट्रेन तैयार, स्पीड 160 KM
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पीएम नरेंद्र मोदी की हाई स्पीड ट्रेन का सपना रेल कोच फैक्टरी कपूरथला के माहिर इंजीनियरों ने पूरा कर दिया। हाई स्पीड ट्रेन रेल कोच फैक्टरी कपूरथला से 17 डिब्बों सहित वीरवार को रवाना की गई।
रेडिका ने हाई स्पीड ट्रेन को भारतीय रेलवे बोर्ड को सौंप दिया है। हाई स्पीड ट्रेन 160 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। रेल यात्रियों को तेज रफ्तार रेलगाड़ी गंतव्य तक जल्द पहुंचाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को देश में तेज रफ्तार रेलगाड़ी चलाने का जो वादा किया था, उसको पूरा रेडिका के माहिर इंजीनियरों ने किया। यह हाई स्पीड ट्रेनें देश में चार रूटों पर चलाई जाएंगी, उसके बाद देश के अन्य क्षेत्रों में भी हाई स्पीड ट्रेनें चलाई जाएंगी।
रेल कोच फैक्टरी के सीनियर पीआरओ वरिंदर विज ने कहा कि आरसीएफ के इंजीनियर की खोज और डेवलपमेंट स्टेंडर्ड ऑर्गनाइजेशन ने इस संबंधी कुछ बदलाव इन कोचों में किए हैं। कोचों में धुआं और अग्निरोधक यंत्र लगाए गए हैं। इसमें आटोमेटिक दरवाजे लगाए गए हैं। सुविधाजनक सीटों का प्रबंध और एलईडी की फिटिंग भी चेयरकार में सुविधा के लिए दी गई है।
यह है खास ट्रेन की खासियत
उन्होंने बताया कि इन कोचों की कीमत लगभग ढाई करोड़ के लगभग आंकी गई है। तेज गति के कोचों में आरसीएफ में शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ 160 किमी. की गति वाले डिब्बे जब रेलवे लाइन पर दौड़ेगी तो अन्य गाड़ियों की गति को पीछे छोड़ेगी।
उन्होंने बताया कि रेल कोच फैक्टरी द्वारा जो कोच बनाए गए हैं उनकी क्षमता 200 किमी. प्रति घंटा की है, लेकिन यह 160 किमी. प्रति घंटा की स्पीड पर चलाई जाएगी। नॉन एसी एलएचवी कोच का भी व्यापक स्तर पर निर्माण कार्य शुरू किया है, जो मेल एक्सप्रेस ट्रेन में प्रयोग किए जा रहे हैं।
160 किलोमीटर की गति से चलने वाली शताब्दी रेलगाड़ी के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण रैक निर्माण कार्य आरसीएफ में प्रगति पर है। यह कोच टीवी, फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम संचालित कंपार्टमेंट डोर और यात्री सूचना प्रणाली से सुसज्जित होंगे। रेल कोच फैक्टरी कपूरथला में 200 किमी. प्रति घंटा से चलने वाली गाड़ियों के लिए कोच का डिजाइन बनाने का कार्य यहां तेजी से चल रहा है।
इन कोचों में ड्राईवर द्वारा संचालित आटोमेटिक प्लग डोर आधुनिक इलक्ट्रो पैनोमेटिक ब्रेकिंग सिस्टम शामिल हैं। निसंदेह भारतीय रेलवे की छवि को बनाने में इस निर्माण की विशेष भूमिका होगी। साफ सफाई के नेशनल मिशन के अनुरूप एलएचवी कोचिस में भी बायो-टायलट लगाने का कार्य आरसीएफ में शुरू कर दिया गया है।