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सूख रही सुखना को ट्यूबवेल से भरा, अब बढ़ा जलस्तर ही बन गया मुसीबत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 25 Feb 2017 09:14 AM IST
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- फोटो : File Photo
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गिरते जलस्तर को झेल रही सुखना में ट्यूबवेल के माध्यम से पानी देकर जलस्तर बढ़ाया गया तो अब पानी का बढ़ना ही सुखना के लिए मुसीबत बन गया। यह बात म्युनिसिपल कारपोरेशन (एमसी) ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में कही।
एमसी ने हाईकोर्ट को सुखना लेक पर लाइट की व्यवस्था और कुत्तों की समस्या को लेकर जानकारी दी। इसके साथ डस्टबिन लगाकर लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करने के बारे में भी जानकारी दी। इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि लेक में जलस्तर बेहतर हुआ है और वर्तमान में वीड निकालने का काम जारी है। हालांकि, इसके विपरीत डी सिल्टिंग पर प्रशासन ने हाथ खड़े करते हुए कहा कि अभी यह संभव नहीं है कि लेक को डी सिल्ट किया जाए। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बीते कुछ समय में लेक का जलस्तर बढ़ा है और बढ़े जलस्तर की स्थिति में डी सिल्टिंग नहीं हो सकती।
ऐसे में अब सुखना को अपने एक दुख से निजात मिल रही है और जलस्तर बढ़ने के साथ ही वीड निकाली जा रही है, लेकिन दूसरी ओर पहला सुख ही मुसीबत बन गया है क्योंकि पानी बढ़ना डी सिल्टिंग न होने का कारण बन गया है। हाईकोर्ट ने स्थिति को समझते हुए कहा कि इस प्रकार टेंपरेरी इंतजाम करने से कुछ नहीं होगा। यदि लेक को डी सिल्ट करना है तो इसके लिए लंबी योजना बनानी होगी, जो हर परिस्थिति के अनुकूल हो। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर प्रशासन और एमसी को इस बारे में पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।
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एमसी ने हाईकोर्ट को सुखना लेक पर लाइट की व्यवस्था और कुत्तों की समस्या को लेकर जानकारी दी। इसके साथ डस्टबिन लगाकर लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करने के बारे में भी जानकारी दी। इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि लेक में जलस्तर बेहतर हुआ है और वर्तमान में वीड निकालने का काम जारी है। हालांकि, इसके विपरीत डी सिल्टिंग पर प्रशासन ने हाथ खड़े करते हुए कहा कि अभी यह संभव नहीं है कि लेक को डी सिल्ट किया जाए। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बीते कुछ समय में लेक का जलस्तर बढ़ा है और बढ़े जलस्तर की स्थिति में डी सिल्टिंग नहीं हो सकती।
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ऐसे में अब सुखना को अपने एक दुख से निजात मिल रही है और जलस्तर बढ़ने के साथ ही वीड निकाली जा रही है, लेकिन दूसरी ओर पहला सुख ही मुसीबत बन गया है क्योंकि पानी बढ़ना डी सिल्टिंग न होने का कारण बन गया है। हाईकोर्ट ने स्थिति को समझते हुए कहा कि इस प्रकार टेंपरेरी इंतजाम करने से कुछ नहीं होगा। यदि लेक को डी सिल्ट करना है तो इसके लिए लंबी योजना बनानी होगी, जो हर परिस्थिति के अनुकूल हो। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर प्रशासन और एमसी को इस बारे में पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।
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