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पंजाब में बढ़ी तस्करी: बीएसएफ को चकमा दे रहे तस्कर, सरहद पर लगे लेजर वॉल और लेजर सेंसर भी हो रहे नाकाम
Thu, 24 Aug 2023 02:01 PM IST
निवेदिता वर्मा
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 24 Aug 2023 02:01 PM IST
सार
पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर 40 से ज्यादा लेजर वॉल लगाई गईं। पंजाब के 554 किलोमीटर लंबी सीमा के बीच करीब 16 किलोमीटर का ऐसा इलाका है, जो रावी दरिया और सरकंडों से ढका हुआ है। इस पूरे इलाके में फेंसिंग नहीं लगाई जा सकती, न ही बीएसएफ के जवान उक्त इलाके में गश्त कर पाते।
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पंजाब
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
भारत सरकार ने पाकिस्तान से सटे दरियाई और सरकंडे वाली तथा कमजोर फेंसिंग वाली जगह से घुसपैठ-तस्करी रोकने के लिए लेजर वॉल, लेजर सेंसर तथा विशेष तरह के गन लगाए, लेकिन पाकिस्तानी तस्करों ने इसका तोड़ खोज लिया। 22 अगस्त की रात रमदास क्षेत्र से 41 किलो हेरोइन और 18 अगस्त को फिरोजपुर से 29 किलो हेरोइन का पकड़ा जाना यही साबित करता है।
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गौर हो कि 2017 में उरी हमले के बाद पठानकोट एयरबेस पर पाक समर्थित आतंकियों के हमले के बाद तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देश पाकिस्तान से सटे दरियाई क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पंजाब सीमा पर लेजर वाल, लेजर सेंसर और खास प्रकार की गन लगाने का फैसला किया। इससे पहले भारत सरकार ने अपने माहिरों को तुर्किए, बुल्गारिया में सर्वे करने भेजा, जिनकी सीमा पर इस तरह के उक्त उच्च तकनीक उपकरण लगे हैं।
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पंजाब, जम्मू में सीमा पर लगी 40 से ज्यादा लेजर वॉल
इसके बाद यह तकनीक पंजाब में रावी दरिया की सीमा के साथ-साथ राजस्थान, जम्मू एवं कश्मीर तथा बांग्लादेश की सीमा पर भी लगाई गई। अकेले पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर 40 से ज्यादा लेजर वॉल लगाई गईं। पंजाब के 554 किलोमीटर लंबी सीमा के बीच करीब 16 किलोमीटर का ऐसा इलाका है, जो रावी दरिया और सरकंडों से ढका हुआ है। इस पूरे इलाके में फेंसिंग नहीं लगाई जा सकती, न ही बीएसएफ के जवान उक्त इलाके में गश्त कर पाते।
यह भी पढ़ें: Ludhiana: पूर्व कांग्रेसी मंत्री भारत भूषण आशु के घर ED की रेड, दफ्तर में भी टीम ने दी दबिश
सतलुज-रावी में पानी बढ़ने का उठाते हैं फायदा
यही कारण है कि पाकिस्तान के तस्कर ऐसे मौसम की इंतजार में रहते हैं, जब रावी और सतलुज में पानी का स्तर बढ़ता है, तो वे इसका फायदा उठाते हैं। क्योंकि पिछले दिनों में भारी बारिश और रावी दरिया में उज्ज दरिया से पानी छोड़े जाने के चलते पानी के रास्ते हेरोइन की कई खेप भेजे जाने की अधिकारियों को उम्मीद है। फिरोजपुर के बाद अमृतसर के रमदास के क्षेत्र से भारी मात्रा में हेरोइन मिलने के बाद बीएसएफ के साथ-साथ काउंटर इंटेलिजेंस और एसटीएफ पूरी तरह से चौकस हो चुका है।
बीएसएफ के सेवामुक्त डीआईजी राजेश शर्मा ने बताया कि सेंसर के अलावा भी पानी के अंदर बहुत कुछ डाला जाता है, ताकि तस्करी करने वाले उसमें फंसकर अपने इरादों में कामयाब न हो पाएं। मगर जब दरिया में पानी का स्तर बहुत बढ़ जाता है और बहाव बहुत तेज हो जाता है तो कई बार पानी के अंदर डाले गए यंत्र बह जाते हैं और पाकिस्तानी तस्कर इसका फायदा उठाने के लिए अपनी जिंदगी तक को दांव पर लगा देते हैं।
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गौर हो कि 2017 में उरी हमले के बाद पठानकोट एयरबेस पर पाक समर्थित आतंकियों के हमले के बाद तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देश पाकिस्तान से सटे दरियाई क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पंजाब सीमा पर लेजर वाल, लेजर सेंसर और खास प्रकार की गन लगाने का फैसला किया। इससे पहले भारत सरकार ने अपने माहिरों को तुर्किए, बुल्गारिया में सर्वे करने भेजा, जिनकी सीमा पर इस तरह के उक्त उच्च तकनीक उपकरण लगे हैं।
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पंजाब, जम्मू में सीमा पर लगी 40 से ज्यादा लेजर वॉल
इसके बाद यह तकनीक पंजाब में रावी दरिया की सीमा के साथ-साथ राजस्थान, जम्मू एवं कश्मीर तथा बांग्लादेश की सीमा पर भी लगाई गई। अकेले पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर 40 से ज्यादा लेजर वॉल लगाई गईं। पंजाब के 554 किलोमीटर लंबी सीमा के बीच करीब 16 किलोमीटर का ऐसा इलाका है, जो रावी दरिया और सरकंडों से ढका हुआ है। इस पूरे इलाके में फेंसिंग नहीं लगाई जा सकती, न ही बीएसएफ के जवान उक्त इलाके में गश्त कर पाते।
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सतलुज-रावी में पानी बढ़ने का उठाते हैं फायदा
यही कारण है कि पाकिस्तान के तस्कर ऐसे मौसम की इंतजार में रहते हैं, जब रावी और सतलुज में पानी का स्तर बढ़ता है, तो वे इसका फायदा उठाते हैं। क्योंकि पिछले दिनों में भारी बारिश और रावी दरिया में उज्ज दरिया से पानी छोड़े जाने के चलते पानी के रास्ते हेरोइन की कई खेप भेजे जाने की अधिकारियों को उम्मीद है। फिरोजपुर के बाद अमृतसर के रमदास के क्षेत्र से भारी मात्रा में हेरोइन मिलने के बाद बीएसएफ के साथ-साथ काउंटर इंटेलिजेंस और एसटीएफ पूरी तरह से चौकस हो चुका है।
बीएसएफ के सेवामुक्त डीआईजी राजेश शर्मा ने बताया कि सेंसर के अलावा भी पानी के अंदर बहुत कुछ डाला जाता है, ताकि तस्करी करने वाले उसमें फंसकर अपने इरादों में कामयाब न हो पाएं। मगर जब दरिया में पानी का स्तर बहुत बढ़ जाता है और बहाव बहुत तेज हो जाता है तो कई बार पानी के अंदर डाले गए यंत्र बह जाते हैं और पाकिस्तानी तस्कर इसका फायदा उठाने के लिए अपनी जिंदगी तक को दांव पर लगा देते हैं।