फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Inauguration of Justice Service Center in Budail Jail tomorrow

बुड़ैल जेल में महिला कैदियों के लिए नई सुविधा.. जानने को पढ़ें

Tue, 09 Feb 2021 01:11 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 01:11 AM IST
विज्ञापन
Inauguration of Justice Service Center in Budail Jail tomorrow
चंडीगढ़। बुड़ैल जेल में बंद महिला कैदियों को सुविधाएं देने के लिए बुधवार को न्याय सेवा केंद्र का उद्घाटन होने जा रहा है। इस केंद्र का उद्घाटन पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के सह कार्यकारी अध्यक्ष जसवंत सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सीजेएम कम सचिव अशोक कुमार मान और सदस्य सचिव महावीर सिंह करेंगे।
विज्ञापन

दरअसल, पिछले सप्ताह कानूनी सेवा प्राधिकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण और जेल विभाग की विशेषज्ञ पांच महिला अधिकारियों की टीम ने बुड़ैल जेल में एक अभियान चलाया था। इस अभियान में बुडै़ल जेल में बंद 46 महिला कैदियों से बातचीत की गई। 46 में से 36 कैदियों का ट्रायल चल रहा है, जबकि 10 दोषी हैं। जेल में 1 से 2 साल के तीन बच्चे भी हैं। सोमवार को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से महिला कैदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की रिपोर्ट जारी की है।
विज्ञापन

न्यायमूर्ति जसवंत सिंह ने कहा कि जेल को पुरुषों की जरूरतों के अनुसार बनाया गया है। महिला कैदियों को संख्या कम होने के कारण न्यूनतम निवेश प्राप्त होता है। इससे महिला कैदियों को कम सुविधाएं प्राप्त होती हैं। न्याय केंद्र के तहत महिलाओं को कानूनी सहायता, शैक्षिक कार्यक्रम और बाल संरक्षण सेवाएं प्रदान की जाएंगी। सोमवार से शुक्रवार 9 से 12 बजे तक महिला कैदी यह सेवा प्राप्त कर सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पांच सदस्यीय टीम ने किया था दौरा
टीम में लीगल एड काउंसिल की वकील जैस्मीन चौहान, वसुंधरा दलाल, आनंद सुनीता कपूर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. नीना चौधरी और डॉ. अंशुल शर्मा शामिल रहीं। उन्होंने बताया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं अपने दिल की बात कम साझा करती हैं। इस अभियान का यही उद्देश्य है कि महिला कैदियों को क्या समस्या है और उन्हें कैसे सुलझाया जा सकता है।

अभियान में सामने आईं यह समस्याएं
कुछ महिला कैदियों ने बताया कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हैं। किताबें और अखबार पढ़ना चाहती हैं। 40 में से 10 महिलाएं ग्रेजुएट हैं और दो से तीन महिलाओं ने एमबीए किया हुआ है। उन्होंने बताया कि वह अपने मामले को लेकर अपडेट नहीं हैं। कानूनी सहायक वकील जेल का दौरा नहीं करते हैं। स्वास्थ्य से संबंधित समस्या होने पर उन्हें पुरुष कैदियों के वार्ड में जाना पड़ता है। जेल में कोई भी लेक्चर होने पर महिला कैदी उसे अटेंड नहीं कर पातीं। क्योंकि वह पुरुष वार्ड में आयोजित किए जाते हैं। 18 महिलाएं ऐसी हैं, जिनके बच्चे बाहर हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर भी महिला कैदी चिंतित हैं। इस न्याय केंद्र के तहत कैदियों के बच्चों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उदाहरण के लिए एक महिला कैदी मणिपुर से है। उसे हिंदी समझने में समस्या है। उसे अपने मामले की कोई जानकारी नहीं है। इसके लिए लीगल एड की तरफ से उन्हें कानूनी सहायता दी गई है। इसके साथ ही जमानत के लिए उनका आवेदन भी भर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed