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Chandigarh News: सवा तीन महीने में हाईकोर्ट में 9,283 मुकदमे का बोझ घटा
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सितंबर में 21,644 मामलों का निपटारा, नए दर्ज मुकदमों से 3,773 ज्यादा मामलों में हुआ फैसला
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सुनवाई प्रक्रिया तेज, 85 स्वीकृत पदों के मुकाबले 64 न्यायाधीश कार्यरत
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या कम करने की दिशा में प्रगति हुई है। करीब छह महीने तक लंबित मामलों की संख्या में खास बदलाव नहीं होने के बाद सवा तीन महीने में 9,283 मुकदमे कम हुए हैं। एक जुलाई को हाईकोर्ट में 4,13,500 मामले लंबित थे, जो 12 अक्तूबर तक घटकर 4,04,217 रह गए। इस अवधि में लंबित मामलों में करीब 2.25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
सितंबर में हाईकोर्ट ने 21,644 मामलों का निपटारा किया, जबकि 17,871 नए मुकदमे दायर हुए। इस तरह नए मामलों की तुलना में 3,773 अधिक मुकदमों का फैसला हुआ। निपटारे की दर करीब 121 प्रतिशत रही। चालू वर्ष में यह दर बढ़कर 109 प्रतिशत हो गई है, जबकि पिछले वर्ष 103 प्रतिशत थी। 100 प्रतिशत से अधिक निपटारे की दर का मतलब है कि अदालत नए दर्ज मामलों से ज्यादा पुराने मुकदमों का निपटारा कर रही है।
महीने में तीन से अधिक बार हो रही सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने एक जून को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला था और सितंबर में मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली थी। जिन मामलों की सुनवाई पहले साल में करीब तीन बार होती थी, उन्हें अब महीने में तीन से अधिक बार सूचीबद्ध किया जा रहा है। सभी पक्षों के जवाब और जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर दो महीने के भीतर अंतिम फैसला देने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
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पुराने मामलों और वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता
हाईकोर्ट में रोजाना करीब छह हजार मामले सूचीबद्ध होते हैं। वर्ष 2000 तक के पुराने मामलों के साथ वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं के खिलाफ अपराध, दिव्यांगों, किशोरों और वंचित वर्गों से जुड़े मुकदमों को प्राथमिकता दी जा रही है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामले, निचली अदालतों में स्थगित कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट से भेजे गए रिमांड संबंधी मामलों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। वर्ष 1995 तक के मुकदमे तत्काल सुनवाई की सूची में हैं। 86 वर्ष या इससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के मामले भी तत्काल सूचीबद्ध किए जाते हैं।
न्यायाधीशों के 21 पद खाली
अगस्त में नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के बावजूद हाईकोर्ट में 85 स्वीकृत पदों के मुकाबले 64 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। सात नाम पदोन्नति के लिए विचाराधीन हैं। इसी वर्ष तीन न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने की भी संभावना है।
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मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सुनवाई प्रक्रिया तेज, 85 स्वीकृत पदों के मुकाबले 64 न्यायाधीश कार्यरत
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या कम करने की दिशा में प्रगति हुई है। करीब छह महीने तक लंबित मामलों की संख्या में खास बदलाव नहीं होने के बाद सवा तीन महीने में 9,283 मुकदमे कम हुए हैं। एक जुलाई को हाईकोर्ट में 4,13,500 मामले लंबित थे, जो 12 अक्तूबर तक घटकर 4,04,217 रह गए। इस अवधि में लंबित मामलों में करीब 2.25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
सितंबर में हाईकोर्ट ने 21,644 मामलों का निपटारा किया, जबकि 17,871 नए मुकदमे दायर हुए। इस तरह नए मामलों की तुलना में 3,773 अधिक मुकदमों का फैसला हुआ। निपटारे की दर करीब 121 प्रतिशत रही। चालू वर्ष में यह दर बढ़कर 109 प्रतिशत हो गई है, जबकि पिछले वर्ष 103 प्रतिशत थी। 100 प्रतिशत से अधिक निपटारे की दर का मतलब है कि अदालत नए दर्ज मामलों से ज्यादा पुराने मुकदमों का निपटारा कर रही है।
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महीने में तीन से अधिक बार हो रही सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने एक जून को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला था और सितंबर में मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली थी। जिन मामलों की सुनवाई पहले साल में करीब तीन बार होती थी, उन्हें अब महीने में तीन से अधिक बार सूचीबद्ध किया जा रहा है। सभी पक्षों के जवाब और जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर दो महीने के भीतर अंतिम फैसला देने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
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पुराने मामलों और वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता
हाईकोर्ट में रोजाना करीब छह हजार मामले सूचीबद्ध होते हैं। वर्ष 2000 तक के पुराने मामलों के साथ वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं के खिलाफ अपराध, दिव्यांगों, किशोरों और वंचित वर्गों से जुड़े मुकदमों को प्राथमिकता दी जा रही है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामले, निचली अदालतों में स्थगित कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट से भेजे गए रिमांड संबंधी मामलों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। वर्ष 1995 तक के मुकदमे तत्काल सुनवाई की सूची में हैं। 86 वर्ष या इससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के मामले भी तत्काल सूचीबद्ध किए जाते हैं।
न्यायाधीशों के 21 पद खाली
अगस्त में नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के बावजूद हाईकोर्ट में 85 स्वीकृत पदों के मुकाबले 64 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। सात नाम पदोन्नति के लिए विचाराधीन हैं। इसी वर्ष तीन न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने की भी संभावना है।