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Chandigarh News: सेक्टर-53 और 54 में पिछले 30 साल में कुछ दुकानों से बन गई पूरी फर्नीचर मार्केट

Tue, 14 Jan 2025 02:13 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2025 02:13 AM IST
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In the last 30 years, a few shops in Sector 53 and 54 have become a complete furniture market
चंडीगढ़। सेक्टर-53 और 54 में पिछले तीन दशकों में शुरू हुई कुछ दुकानों की मौजूदगी आज एक पूरी फर्नीचर मार्केट का रूप ले चुकी है। यह विस्तार प्रशासन की आंखों के सामने हुआ, लेकिन किसी ने इसे रोकने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए। बीते 10 वर्षों में दुकानों का आकार दोगुना हो गया है और हर साल अवैध कब्जे बढ़ते रहे। सैटेलाइट तस्वीरें भी इस बात की गवाह हैं कि कैसे साल-दर-साल फर्नीचर मार्केट में अतिक्रमण बढ़ता गया लेकिन इस पर अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार सोते रहे।
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तीन दशक पहले सेक्टर-53 और 54 के क्षेत्र में कुछ दुकानदारों ने फर्नीचर का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे इन दुकानों की संख्या बढ़ने लगी और आसपास के इलाकों में अवैध कब्जे भी बढ़ते गए। फर्नीचर कारोबार के चलते यह क्षेत्र ग्राहकों के लिए लोकप्रिय होता गया और इसका परिणाम यह हुआ कि यहां एक पूरी मार्केट खड़ी हो गई। बीते 10 वर्षों में न केवल दुकानों की संख्या बढ़ी, बल्कि उनके आकार में भी दोगुनी बढ़ोतरी हो गई। जानकारों का कहना है कि मार्केट धीरे-धीरे फैलती रही। वर्ष 2012 के बाद सबसे ज्यादा अतिक्रमण हुआ। फ्रंट साइड से दुकानों में ज्यादा बदलाव भले न दिखाई देता हो, लेकिन दुकानों के पीछे से लगातार अतिक्रमण किया जाता रहा। जो दुकानें कभी 20 गुणा 30 फीट की थी, आज तो 20 गुणा 150 फीट व उससे ज्यादा की दो गई हैं। सेक्टर-53 और 54 दोनों तरफ से अतिक्रमण का खेल चलता रहा। ये सब मिलीभगत से होता रहा। सरकारी जमीन पर लगातार कब्जा रहा लेकिन अधिकारी व कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। डीसी निशांत कुमार यादव ने कहा कि मार्केट के दुकानदारों को 15 दिन का समय दिया गया है। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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पहले भी कई बार जारी हुए नोटिस
प्रशासन ने कई बार इन दुकानों को तोड़ने के नोटिस जारी किए, लेकिन हर बार कार्रवाई रुक गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि, इस बार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की योजना बनाई है। अधिकारियों के अनुसार मार्केट को 15 दिनों के भीतर तोड़ा जाएगा। इसके लिए पुलिस बल और अन्य संसाधनों को तैयार किया जा रहा है। प्रशासन की सख्ती के बाद व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। दुकानदार अब प्रशासन से अपनी दुकानें बचाने की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से यहां व्यापार कर रहे हैं और उनकी आजीविका पूरी तरह से इस मार्केट पर निर्भर है। अगर मार्केट तोड़ी गई तो इसका असर न केवल उनकी आजीविका पर पड़ेगा, बल्कि प्रशासन को मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान होगा। मार्केट के सैंकड़ों घर चलते हैं, वो सभी बेरोजगार हो जाएंगे।
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सेक्टर-53, 54 और 55 का होना है विस्तार
वर्तमान में जिस भूमि पर व्यवसाय किया जा रहा है, वह 14 फरवरी 2002 को प्रशासन की ओर से अधिग्रहित कर ली गई थी। यह भूमि सार्वजनिक उद्देश्य के तहत सेक्टर-53, 54 और 55 के विकास के लिए अधिग्रहित की गई थी। प्रशासन की एक बैठक में पूर्व डीसी विनय प्रताप सिंह ने स्पष्ट कहा था कि यहां करीब 116 दुकानों ने पिछले कई वर्षों से करीब 1500 करोड़ से अधिक मूल्य की लगभग 10-12 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है।
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