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Chandigarh News: जीएमएसएच-16 में नवजात व प्रसूताओं को ठंड से बचाने के लिए घर से लाना होगा कंबल
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चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती प्रसूताओं और नवजातों को ठंड से बचाव के लिए कंबल तक नहीं दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि वार्ड में लगाए गए हीटर से ही उन्हें ठंड से राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। वार्ड में भर्ती प्रसूताएं घर से कंबल लाने को मजबूर हैं। वहीं, उन्हें इस बात की भी चिंता सता रही है कि वार्ड में लगातार जलने वाले हीटर से उन्हें और उनके नवजात को कोई नुकसान न हो जाए। लेकिन अस्पताल के आला अधिकारी और डॉक्टरों को इस बात की कोई चिंता नहीं है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वार्ड में ठंड से बचाव की पूरी व्यवस्था है। मांगने पर मरीजों को कंबल भी दिया जाता है।
बता दें कि अस्पताल के गायनी वार्ड में महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ती है। गर्मी के मौसम में जहां एक ही बेड पर दो प्रसूताओं और दो-दो नवजातों को रखा जाता है। वहीं, ठंड में अब उन्हें कंबल नहीं दिया जा रहा है। इसके बावजूद जरूरतमंद महिलाएं सरकारी सुविधा की उम्मीद में यहां इलाज कराने के लिए आने को मजबूर हैं।
हमें तो कंबल दिया ही नहीं
वार्ड में आने पर जब परिजनों ने कर्मचारियों से कंबल मांगा तो उन्होंने साफ मना कर दिया। ठंड से बचाव के लिए घर से कंबल मंगाना पड़ा है।
-दीपा, सेक्टर-26
कंबल घर से लेकर आना पड़ा
वार्ड में हीटर लगाकर ठंड से बचाव की व्यवस्था कर दी गई है। मांगने पर भी हमें कंबल नहीं दिया गया है। इसलिए घर से लेकर आना पड़ा।
-आंचल, मुल्लांपुर
हीटर इसलिए है खतरनाक
भारतीय बाल अकादमी की सदस्य डॉ. गुंजन बवेजा का कहना है कि कमरे को गर्म करने के लिए जब हम रूम हीटर चलाते हैं तो वो कमरे की ऑक्सीजन को खींच कर उसे जला देता है। इससे कमरा गर्म तो हाे जाता है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। गैस हीटर का इस्तेमाल करने से नींद में ही मौत का जोखिम बढ़ जाता है। दरअसल, गैस हीटर या अंगीठी से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस ज्यादा होने पर शरीर में खून की सप्लाई बंद कर सकती है। इससे कमरे में सोने वाले लोगों के दिमाग तक खून नहीं पहुंच पाएगा। ऐसे में ब्रेन हेमरेज हो सकता है। इससे अचानक मौत भी हो सकती है। हीटर हवा से नमी को अवशोषित करते हैं और कमरे में सूखापन बढ़ाते हैं, जिससे शिशुओं की नाक का मार्ग सूख सकता है और इस तरह ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। इसके अलावा ये खुजली और पपड़ीदार त्वचा का कारण बनते हैं।
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बता दें कि अस्पताल के गायनी वार्ड में महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ती है। गर्मी के मौसम में जहां एक ही बेड पर दो प्रसूताओं और दो-दो नवजातों को रखा जाता है। वहीं, ठंड में अब उन्हें कंबल नहीं दिया जा रहा है। इसके बावजूद जरूरतमंद महिलाएं सरकारी सुविधा की उम्मीद में यहां इलाज कराने के लिए आने को मजबूर हैं।
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हमें तो कंबल दिया ही नहीं
वार्ड में आने पर जब परिजनों ने कर्मचारियों से कंबल मांगा तो उन्होंने साफ मना कर दिया। ठंड से बचाव के लिए घर से कंबल मंगाना पड़ा है।
-दीपा, सेक्टर-26
कंबल घर से लेकर आना पड़ा
वार्ड में हीटर लगाकर ठंड से बचाव की व्यवस्था कर दी गई है। मांगने पर भी हमें कंबल नहीं दिया गया है। इसलिए घर से लेकर आना पड़ा।
-आंचल, मुल्लांपुर
हीटर इसलिए है खतरनाक
भारतीय बाल अकादमी की सदस्य डॉ. गुंजन बवेजा का कहना है कि कमरे को गर्म करने के लिए जब हम रूम हीटर चलाते हैं तो वो कमरे की ऑक्सीजन को खींच कर उसे जला देता है। इससे कमरा गर्म तो हाे जाता है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। गैस हीटर का इस्तेमाल करने से नींद में ही मौत का जोखिम बढ़ जाता है। दरअसल, गैस हीटर या अंगीठी से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस ज्यादा होने पर शरीर में खून की सप्लाई बंद कर सकती है। इससे कमरे में सोने वाले लोगों के दिमाग तक खून नहीं पहुंच पाएगा। ऐसे में ब्रेन हेमरेज हो सकता है। इससे अचानक मौत भी हो सकती है। हीटर हवा से नमी को अवशोषित करते हैं और कमरे में सूखापन बढ़ाते हैं, जिससे शिशुओं की नाक का मार्ग सूख सकता है और इस तरह ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। इसके अलावा ये खुजली और पपड़ीदार त्वचा का कारण बनते हैं।
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